उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले के दुद्धी तहसील में बाहरी राज्यों से आए मुस्लिम पुरुषों ने स्थानीय अनुसूचित जनजाति (ST) की महिलाओं से शादियां रचाकर करोड़ों की जमीनें हड़प लीं. छत्तीसगढ़, झारखंड और बिहार से आए इन लोगों ने आदिवासी महिलाओं के नाम पर बेनामी रजिस्ट्रियां करवाईं और वहां अपने रिश्तेदारों को बसाकर इलाके की डेमोग्राफी बदल दी. इस पूरी साजिश का मकसद आदिवासियों के लिए आरक्षित जमीनों पर कब्जा करना था, क्योंकि नियम के मुताबिक आदिवासी की जमीन केवल आदिवासी ही खरीद सकता है. प्रशासन ने जांच के बाद 15 बीघा जमीन वापस लेकर मुख्य आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है.
शादी की आड़ में जमीन की बेनामी रजिस्ट्रियां
जांच में खुलासा हुआ कि बहादुर अली, सिराज और तनवीर जैसे लोगों ने आदिवासी महिलाओं से निकाह किया, लेकिन दस्तावेजों में महिलाओं के हिंदू नाम ही रहने दिए. बहादुर अली ने अपनी पत्नी दुलारी के नाम पर 19 जगहों पर जमीनें खरीदीं और वहां 17 बीघा जमीन पर अपने करीबियों को बसा दिया.
इसी तरह तनवीर ने कुंती जगते नाम की महिला से शादी कर झारखंड और छत्तीसगढ़ के लोगों को वहां दुकानें और घर बनवाकर बसा दिया. यह पूरा खेल कागजों पर आदिवासियों के नाम पर चलता रहा, जबकि वास्तविक नियंत्रण किसी और का था.
बाहरी राज्यों के लोगों को बसाकर बदली डेमोग्राफी
दुद्धी क्षेत्र के बघाडू गांव और आसपास के इलाकों में बीते कुछ सालों में परिवारों की संख्या अचानक बढ़ गई. आरोप है कि दो परिवारों से शुरू हुआ यह सिलसिला अब 200 परिवारों और 1000 लोगों तक पहुंच गया है. कनहर बांध परियोजना के विस्थापन के दौरान यह गतिविधियां और तेज हुईं.
सिराज नाम के व्यक्ति ने ननकी नाम की महिला के नाम पर जमीन लेकर वहां दूसरे राज्यों के लोगों को बसाया. स्थानीय लोगों का कहना है कि आदिवासियों को मामूली रकम देकर उनके नाम का इस्तेमाल जमीनों की रजिस्ट्री के लिए किया गया.
युवतियों पर दबाव और प्रशासन का डंडा
पीड़ित युवती रेणु कुमारी ने आरोप लगाया कि नसीमुद्दीन और अब्दुल सुभान जैसे लोग उस पर शादी के लिए दबाव बना रहे थे और पीछा करते थे. जेल से छूटने के बाद उसे जान से मारने की धमकियां भी दी गईं. रेणु के मुताबिक, यह सब उसकी जमीन हड़पने की साजिश थी.
वहीं, मंगल सिंह नामक आदिवासी की जमीन पर शरीफ जुगनू ने कब्जा कर लिया. मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने अब तक 15 बीघा जमीन सरकार के नाम वापस करा ली है और मास्टरमाइंड बहादुर अली सहित अन्य संदिग्धों पर शिकंजा कसा जा रहा है.
बहादुर अली है सरगना
इस पूरे मामले का सरगना बहादुर अली बताया जा रहा है. आरोप है कि उसने एक आदिवासी महिला से दुष्कर्म के बाद कोर्ट मैरिज की और फिर उसकी आड़ में जमीनों का खेल शुरू किया. दावा किया जा रहा है कि बहादुर अली अपने बेटे की शादी रजनी से कराना चाहता था, ताकि उसके नाम पर भी आदिवासियों की जमीनें खरीदी जा सकें. इस मसले पर आदिवासी महिला रेणु कुमारी ने खुलकर कहा कि यह पूरी साजिश आदिवासी जमीनों को हड़पने के लिए रची जा रही थी. शिकायतकर्ता के मुताबिक, यहां लंबे समय से एक पैटर्न चला आ रहा था- पहले किसी आदिवासी के नाम पर जमीन खरीदो, उस पर कब्जा कर बस जाओ, और बाद में सर्वे के दौरान उसी नामधारी व्यक्ति से अपने पक्ष में बयान दिलाकर जमीन अपने नाम ट्रांसफर करा लो.