यूपी के मिर्जापुर कलेक्ट्रेट में ऐसा नजारा देखने को मिला, जिसे देखकर पहले लोग हैरान हुए, फिर मुस्कुराए और आखिर में पुलिस को बुलाना पड़ गया. कंधे पर चमकता एक स्टार, पुलिस की वर्दी, सीने पर नेमप्लेट और चेहरे पर ऐसा आत्मविश्वास मानो किसी थाने का पूरा जिम्मा इन्हीं के कंधों पर हो. लेकिन कुछ ही मिनटों की बातचीत में लोगों को समझ आ गया कि कहानी में कुछ गड़बड़ है.
कलेक्ट्रेट परिसर में घूम रहे इस युवक ने खुद को पुलिस अधिकारी बताया, लेकिन जब उससे साधारण सवाल पूछे गए तो उसके जवाबों ने लोगों का शक और गहरा कर दिया. देखते ही देखते आसपास भीड़ जमा हो गई और फिर शुरू हुई सवालों की ऐसी बौछार, जिसने कथित दरोगा की पूरी कहानी को उलझाकर रख दिया.
वर्दी देखकर लोग पहले हुए प्रभावित
कलेक्ट्रेट परिसर में मौजूद लोगों ने बताया कि युवक पूरे रौब के साथ घूम रहा था. उसने पुलिस की वर्दी पहन रखी थी. कंधे पर एक स्टार लगा था और नेमप्लेट पर "शिवपाल इंस्पेक्टर" लिखा हुआ था. पहली नजर में देखने वाले को लग सकता था कि कोई पुलिस अधिकारी किसी सरकारी काम से आया है. लेकिन लोगों को उसके हावभाव और बातचीत का तरीका कुछ अलग लगा. किसी ने पूछा कि किस थाने में तैनाती है तो जवाब कुछ और मिला. दूसरा सवाल हुआ तो बात कहीं और पहुंच गई. तीसरा सवाल आया तो जवाब और ज्यादा उलझ गया. बस यहीं से लोगों का शक बढ़ने लगा.
कौन से थाने से हो और शुरू हो गई कहानी
स्थानीय लोगों ने जब युवक से पूछा कि वह किस थाने में तैनात है तो उसने बताया कि वह प्रयागराज से आया है और थाना तलाश रहा है. फिर कहा कि उसकी पोस्टिंग महिला थाने में है. कुछ देर बाद उसने कहा कि वह इंस्पेक्टर बनने वाला है. फिर बोला कि कागज बनवाने आया है. मौके पर मौजूद लोगों के मुताबिक उसके जवाब लगातार बदल रहे थे. एक व्यक्ति ने पूछा, मिर्जापुर के कप्तान साहब का नाम जानते हो ? युवक ने जवाब दिया, हम नहीं जानते. इसके बाद भीड़ में खड़े लोगों की उत्सुकता और बढ़ गई. सवाल पर सवाल होते गए और कथित दरोगा के जवाब लोगों को संतुष्ट करने के बजाय और ज्यादा हैरान करते रहे.
नेमप्लेट पर इंस्पेक्टर, लेकिन पहचान पर उलझन
सबसे दिलचस्प बात यह रही कि उसकी वर्दी पर लगी नेमप्लेट पर "शिवपाल इंस्पेक्टर" लिखा था, लेकिन जब लोगों ने नाम पूछा तो उसने खुद को शिवपाल बताया. बाद में पूछताछ में उसकी पहचान शिव कुमार पाल के रूप में सामने आई. लोगों को यह बात भी अजीब लगी कि जो व्यक्ति खुद को पुलिस अधिकारी बता रहा है, वह अपने विभाग, तैनाती और अधिकारियों के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं दे पा रहा था. घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. वीडियो में लोग लगातार उससे सवाल पूछ रहे हैं और वह अलग-अलग जवाब देता दिखाई दे रहा है. कभी वह कहता है कि महिला थाने में पोस्टिंग है, कभी कहता है कि इंस्पेक्टर बनने जा रहा है. कभी बताता है कि कागज बनवाने आया है तो कभी किसी और बात का जिक्र करने लगता है.
वर्दी कहां से आई? यही सवाल बना सबसे बड़ा रहस्य
मौके पर मौजूद लोगों ने उससे बार-बार पूछा कि पुलिस की वर्दी कहां से मिली. वर्दी किसने दी. नेमप्लेट कहां से बनवाई गई. लेकिन इन सवालों का भी कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला. यही वजह रही कि लोगों ने उसे रोक लिया और पुलिस को सूचना दे दी. सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और युवक को अपने साथ शहर कोतवाली ले गई. पुलिस जांच के दौरान युवक के पास से एक आईडी कार्ड भी बरामद हुआ. अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि आईडी कार्ड असली है या नकली और वर्दी किस तरह हासिल की गई. प्रारंभिक जांच में युवक की पहचान प्रयागराज जिले के करछना क्षेत्र निवासी शिव कुमार पाल के रूप में हुई है.
पुलिस क्या कह रही है?
शहर कोतवाली प्रभारी दयाशंकर ओझा के मुताबिक पकड़ा गया युवक प्रयागराज के करछना का रहने वाला है. शुरुआती जांच में यह भी जानकारी सामने आई है कि वह घर से लापता बताया गया था. उसके परिजनों ने पहले से एक मुकदमा भी दर्ज कराया हुआ है. पुलिस का कहना है कि मामले के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है. यह पता लगाया जा रहा है कि युवक पुलिस की वर्दी पहनकर कलेक्ट्रेट परिसर में क्यों घूम रहा था और उसका उद्देश्य क्या था.
कलेक्ट्रेट में दिनभर चर्चा का विषय बनी घटना
घटना के बाद पूरे कलेक्ट्रेट परिसर में इसी मामले की चर्चा होती रही. जो भी वहां पहुंचा, उसने पहले फर्जी दरोगा की कहानी सुनी और फिर वायरल वीडियो देखने लगा. कुछ लोगों का कहना था कि पहली नजर में युवक पूरी तरह पुलिसकर्मी लग रहा था. वहीं कई लोगों का मानना था कि उसके जवाब सुनते ही समझ आ गया था कि मामला सामान्य नहीं है.