मध्य पूर्व में स्थित ईरान में जारी हिंसा और आंदोलन को लेकर दुनिया की राय दो हिस्सों में बंटी हुई है. एक तरफ वह वर्ग है जो खामेनेई के कट्टर विचारों का विरोध करते हुए महिलाओं की स्वतंत्रता और हिजाब से मुक्ति के बाद इसे सत्ता परिवर्तन का आंदोलन मान रहा है. दूसरी तरफ ईरान इस आंदोलन को सख्ती से कुचलने में जुटा है. इन हालात पर लखनऊ की भी खास नजर बनी हुई है, क्योंकि लखनऊ देश के सबसे बड़े शिया आबादी वाले शहरों में से एक है.
लखनऊ के शिया धर्मगुरुओं और समुदाय ने एक सुर में कहा है कि अमेरिका ईरान में अपनी दादागिरी कर रहा है. शिया नेताओं का मानना है कि ईरान की हर गतिविधि पर नजर रखकर अमेरिका सीधे हस्तक्षेप का रास्ता तलाश रहा है. उनका कहना है कि ईरान के हालात भले ही खराब हों, लेकिन बाहरी दबाव समस्या का समाधान नहीं है.
शिया धर्मगुरु मौलाना यासूब अब्बास ने ईरान को लेकर कड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि अमेरिका और इजरायल लगातार ईरान पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन ईरान न तो झुकेगा और न ही बिकेगा.
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ईरान की ओर से पलटवार हुआ तो इजरायल के अस्तित्व को खतरा हो सकता है और खाड़ी देशों में अमेरिका के समर्थकों को भी नुकसान उठाना पड़ेगा.
यह भी पढ़ें: US vs Iran: क्यों अमेरिका ईरान को 'मार' तो सकता है, लेकिन झुका नहीं सकता?
मौलाना यासूब अब्बास ने इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि मोहम्मद रजा शाह पहलवी के दौर में ईरान के तेल संसाधनों पर अमेरिका और ब्रिटेन का कब्जा था. इमाम खोमैनी के नेतृत्व में हुए आंदोलन के बाद ईरान ने अपने संसाधनों पर नियंत्रण हासिल किया.
उनके मुताबिक, आज भी अमेरिका किसी न किसी रूप में ईरान पर दबाव बनाकर खुद को सुपर पावर साबित करना चाहता है.
लखनऊ के शिया समुदाय में भी ऐसे ही विचार देखने को मिल रहे हैं. जुमे की नमाज के बाद लोगों ने ईरान में हिंसा के लिए इजराइल को जिम्मेदार ठहराया. लोगों का कहना है कि सत्ता परिवर्तन के नाम पर दखल गलत है और खामनई शिया समुदाय के सर्वोच्च धार्मिक नेता हैं.
शिया नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका ने ईरान में हस्तक्षेप किया तो लखनऊ समेत देश के शिया बहुल इलाकों में प्रदर्शन हो सकते हैं.