लखनऊ के आशियाना के 'नीले ड्रम' कांड ने लोगों को झकझोर दिया है. कोई सोच भी नहीं सकता कि एक बेटा अपने पिता इस बेरहमी से मार सकता है. पहले गोली मारना, फिर शव के टुकड़े-टुकड़े करना, इसको लेकर तरह-तरह की बातें हो रही हैं. इस बीच 'कातिल' बेटे को लेकर चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं. आइये जानते हैं...
पुलिस की छानबीन में सामने आया कि चार महीने पहले मृतक मानवेंद्र सिंह के मकान से कीमती गहने चोरी हो गए थे. मानवेंद्र ने नौकरानी पर शक जताते हुए थाने में शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन बाद में पता चला कि जेवर उसने नहीं चुराए थे. ऐसे में बेटे अक्षत सिंह की करतूत छिपाने के लिए पिता ने थाने से अपनी शिकायत वापस ले ली थी.
इसके बाद से मानवेंद्र अपने बेटे अक्षत की गतिविधियों पर लगातार नजर रख रहे थे. 22 फरवरी की तड़के मानवेंद्र ने अक्षत को पढ़ाई के लिए समझाया, जिसके बाद उसने वारदात को अंजाम दे दिया. हैरानी की बात यह है कि 20 फरवरी से लापता मानवेंद्र की गुमशुदगी की रिपोर्ट उनके बेटे अक्षत ने खुद दर्ज कराई थी.
परिजनों के मुताबिक, अक्षत ने एक कोचिंग संस्थान से नीट की तैयारी की थी और दो बार परीक्षा भी दी, लेकिन सफल नहीं हो पाया. पिता पढ़ाई को लेकर जोर डालते थे. डांट-डपट भी देते थे. इसी से तंग आकर अक्षत ने खौफनाक कदम उठा डाला.
मृतक मानवेंद्र अच्छे-खासे बिजनेसमैन थे. उनके पास चार पैथालॉजी लैब और तीन शराब की दुकानें थीं. घर-परिवार पैसे से सम्पन्न था लेकिन होनी को कुछ और ही मंजूर था. फिलहाल, पुलिस हर एंगल से जांच-पड़ताल कर रही है. अक्षत को गिरफ्तार कर लिया गया है.
सम्पन्न परिवार का बेटा बना पिता का 'कातिल'
मानवेंद्र सिंह का जीवन बाहर से बेहद सफल दिखता था; उनके पास चार पैथोलॉजी लैब और तीन शराब की दुकानें थीं. उनका बेटा अक्षत, जिसने प्रतिष्ठित लामार्टिनियर कॉलेज से 12वीं की थी, परिवार की उम्मीदों का केंद्र था. लेकिन कामयाबी की इस चमक के पीछे कड़वी सच्चाई छिपी थी.
चार महीने पहले जब घर से कीमती जेवर चोरी हुए, तो मानवेंद्र ने अनजाने में कामवाली पर शक किया. पर जब सच सामने आया कि चोर कोई और नहीं बल्कि उनका अपना बेटा अक्षत है, तो पिता का दिल टूट गया. बेटे की करतूत छिपाने के लिए उन्होंने पुलिस से शिकायत तो वापस ले ली, लेकिन तब से वे उसकी हर गतिविधि पर नजर रखने लगे.
अक्षत नीट (NEET) की तैयारी कर रहा था, पर दो बार असफल होने के कारण वह गहरे दबाव में था. 22 फरवरी की तड़के, जब मानवेंद्र ने उसे पढ़ाई के लिए टोकते हुए कुछ समझाया, तो अक्षत का गुस्सा और कुंठा सीमा पार कर गई. उसी आवेश में उसने एक ऐसी वारदात को अंजाम दे दिया जिसने पूरे परिवार को उजाड़ दिया.
ऐसे दिया वारदात को अंजाम
पिता मानवेंद्र की गोली मारकर हत्या करने के बाद बेटे अक्षत ने सबूत मिटाने की कोशिश की. उसने शव के कई टुकड़े किए. कुछ हिस्सों को कार से सदरौना इलाके में फेंक आया, जबकि बाकी अंग नीले ड्रम में भरकर घर में ही छिपा दिए. अक्षत द्वारा धड़ को भी ठिकाने लगाने की तैयारी थी, लेकिन इससे पहले पुलिस घर पहुंच गई. बीते सोमवार को जब कमरे का दरवाजा खोला गया तो वहां खून के धब्बे, लुढ़का ड्रम और अंदर बंद आधा शव देखकर हर कोई सन्न रह गया.