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लखनऊ में गोमती का कहर: हनुमान जी के चरणों तक पहुंचा बाढ़ का पानी, नाव पर उतरे DM-JCP, 24 घंटे अलर्ट प्रशासन

लखनऊ में गोमती नदी का जलस्तर बढ़ने से निचले इलाकों में बाढ़ के हालात हैं. गोमती का पानी हनुमान मंदिर परिसर तक पानी पहुंच गया है. फैजुल्लागंज से बीकेटी तक राहत अभियान तेज है. डीएम विशाख जी. और संयुक्त पुलिस आयुक्त बबलू कुमार ने नाव से प्रभावित इलाकों का जायजा लिया. गर्भवती महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को प्राथमिकता से सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं.

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हनुमान मंदिर में भी गोमती के बाढ़ का पानी पहुंच चुका है (Photo: ITG)
हनुमान मंदिर में भी गोमती के बाढ़ का पानी पहुंच चुका है (Photo: ITG)

लखनऊ में गोमती नदी का बढ़ता जलस्तर अब शहर के निचले इलाकों के साथ-साथ धार्मिक स्थलों तक पहुंच गया है. हनुमान मंदिर परिसर में भी गोमती का पानी प्रवेश कर चुका है. नदी के बढ़ते जलस्तर से फैजुल्लागंज से लेकर बीकेटी के ग्रामीण इलाकों तक कई जगह हालात चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं. सड़क और गलियों में पानी भरने के बीच अब कई इलाकों में राहत पहुंचाने के लिए नावों का सहारा लिया जा रहा है. हालात की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश के बाद जिला प्रशासन ने राहत और बचाव अभियान तेज कर दिया है. रविवार को ही जिलाधिकारी विशाख जी और संयुक्त पुलिस आयुक्त बबलू कुमार खुद प्रभावित इलाकों में पहुंचे. अधिकारियों ने कई जगह सड़क से तो कुछ हिस्सों में नाव से पहुंचकर हालात का जायजा लिया और स्थानीय लोगों से बातचीत की.

गोमती का जलस्तर 108.14 मीटर तक पहुंचने की जानकारी सामने आई है. इसे सामान्य स्तर से करीब आठ फीट ऊपर बताया जा रहा है. ऐसे में नदी से सटे निचले इलाकों में प्रशासन की निगरानी बढ़ा दी गई है. हनुमान मंदिर के मुख्य पुरोहित विनोद तांगड़ी के मुताबिक, गोमती का पानी हनुमान जी के चरणों तक पहुंच गया है. उनका कहना है कि जलस्तर ज्यादा बढ़ने की स्थिति में मंदिर की परंपरा के अनुसार बाहर से ही पूजा-अर्चना और आरती की जाती है. पुरोहित ने पुराने समय का जिक्र करते हुए कहा कि पहले भी गोमती का पानी मंदिर तक पहुंचता रहा है. उनके मुताबिक, वर्षों पहले तक ऐसी स्थिति कई बार देखने को मिलती थी.

फैजुल्लागंज में नाव पर सवार हुए DM और JCP

शहर के सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में फैजुल्लागंज प्रमुख है. यहां कई रिहायशी हिस्सों में पानी भरने से लोगों की आवाजाही प्रभावित हुई है. जिलाधिकारी विशाख जी और संयुक्त पुलिस आयुक्त बबलू कुमार ने नाव से प्रभावित बस्तियों का निरीक्षण किया. अधिकारियों ने मौके पर मौजूद लोगों से बात की और राहत सामग्री की उपलब्धता के बारे में जानकारी ली. प्रशासन की ओर से अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि प्रभावित इलाकों में राहत कार्यों में किसी भी तरह की ढिलाई नहीं होनी चाहिए. जलस्तर और संवेदनशील इलाकों पर लगातार नजर रखने को कहा गया है. फैजुल्लागंज में नगर निगम की टीम भी सक्रिय है. जलनिकासी के लिए पंपसेट लगाए गए हैं और साफ-सफाई तथा फॉगिंग का काम कराया जा रहा है.

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गर्भवती महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग सबसे पहले होंगे सुरक्षित

बाढ़ जैसी स्थिति में सबसे बड़ी चुनौती उन लोगों को सुरक्षित निकालना है, जो अकेले या सामान्य परिस्थितियों में आसानी से बाहर नहीं निकल सकते. इसी वजह से ग्राम सैथा में निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने गर्भवती महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को प्राथमिकता के आधार पर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के निर्देश दिए. प्रशासन की ओर से तत्काल 10 नावों की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया है, ताकि जरूरत वाले परिवारों तक पहुंच बनाई जा सके और उन्हें सुरक्षित स्थानों तक ले जाया जा सके. प्रभावित इलाकों में राहत शिविरों और सहायता केंद्रों के जरिए लोगों को जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है. बाढ़ के बीच राहत पहुंचाने का सबसे बड़ा काम उन परिवारों तक जरूरी सामान पहुंचाना है, जो पानी से घिरे हुए हैं. प्रशासन की टीमें नावों के जरिए घर-घर राहत किट पहुंचा रही हैं. प्रभावित परिवारों के लिए भोजन और जरूरी सामान की व्यवस्था की गई है. स्वास्थ्य विभाग को पर्याप्त मात्रा में दवाएं और मेडिकल किट तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं. जरूरत पड़ने पर मेडिकल टीमें प्रभावित क्षेत्रों में भेजी जा रही हैं. प्रशासन ने सिर्फ लोगों की जरूरतों पर ही फोकस नहीं किया है, बल्कि प्रभावित परिवारों के पशुओं के लिए भी भूसा और चारे की व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं.

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दाऊद नगर में अतिरिक्त कंट्रोल रूम, रात में भी पुलिस गश्त

दिन के समय राहत टीमों की आवाजाही के बावजूद रात में प्रभावित इलाकों की निगरानी अपने आप में बड़ी चुनौती है. इसे देखते हुए दाऊद नगर में अतिरिक्त कंट्रोल रूम स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं. यहां से लोगों की शिकायतों और मदद की मांग पर तत्काल कार्रवाई की व्यवस्था की जाएगी. प्रभावित इलाकों में रात्रिकालीन पुलिस पेट्रोलिंग बढ़ाने के निर्देश भी दिए गए हैं. प्रशासन का फोकस यह सुनिश्चित करने पर है कि जलस्तर बढ़ने या किसी परिवार को अचानक मदद की जरूरत पड़ने पर राहत टीम जल्द से जल्द मौके तक पहुंचे. लखनऊ शहर के साथ ग्रामीण इलाकों में भी गोमती के बढ़े जलस्तर का असर दिखाई दे रहा है. बख्शी का तालाब तहसील के लासा, बहादुरपुर, सुल्तानपुर और अकड़िया मऊ जैसे गांवों में पानी का असर बना हुआ है. कुछ इलाकों में जलस्तर में मामूली गिरावट की जानकारी है, लेकिन लोगों की मुश्किलें अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं. ग्रामीणों की आवाजाही और राहत सामग्री पहुंचाने के लिए नावों की व्यवस्था की गई है. राहत शिविरों में विस्थापित परिवारों के लिए भोजन और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है. प्रशासन की कोशिश है कि जलस्तर कम होने तक संवेदनशील गांवों में निगरानी और राहत व्यवस्था लगातार जारी रहे.

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बाढ़ के बाद बीमारी का खतरा, ड्रोन से होगा एंटी-लार्वा का छिड़काव

पानी भरने के साथ एक दूसरी चुनौती भी सामने आती है जैसे मच्छरों और जलजनित बीमारियों का खतरा. फैजुल्लागंज में नगर निगम ने इसको लेकर अलग से तैयारी शुरू की है. जलभराव वाले इलाकों में पंपसेट से पानी निकालने के साथ फॉगिंग कराई जा रही है. इसके अलावा मच्छरों के लार्वा को नियंत्रित करने के लिए ड्रोन से एंटी-लार्वा का छिड़काव कराया जा रहा है. जिन जगहों पर कर्मचारी सीधे नहीं पहुंच पा रहे हैं, वहां ड्रोन के जरिए दवा का छिड़काव करने की व्यवस्था की जा रही है. स्वास्थ्य विभाग की टीमें मेडिकल किट और क्लोरीन की गोलियां भी उपलब्ध करा रही हैं.

फूड वैली बंद, कई प्रमुख जगहों पर पानी का असर

गोमती का बढ़ा जलस्तर शहर के कई प्रमुख हिस्सों में दिखाई दे रहा है. हनुमत धाम, प्राचीन शनि देव मंदिर और लक्ष्मण मेला मैदान के आसपास जलभराव की स्थिति बनी हुई है. एहतियात के तौर पर गोमती रिवरफ्रंट स्थित फूड वैली को अस्थायी तौर पर बंद किया गया है. इन इलाकों में प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है. लोगों से भी जलभराव वाले इलाकों में अनावश्यक रूप से जाने से बचने की अपील की जा रही है.

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2006-07 के बाद फिर चर्चा में आया गोमती का जलस्तर

लखनऊ में गोमती के बढ़े जलस्तर ने पुराने बाढ़ के दौर की यादें भी ताजा कर दी हैं. स्थानीय स्तर पर मौजूदा स्थिति की तुलना 2006-07 के बाद के गंभीर जलस्तर से की जा रही है. फिलहाल सबसे ज्यादा चिंता नदी के किनारे बसे निचले इलाकों को लेकर है. इन क्षेत्रों में पानी तेजी से फैलने की स्थिति में लोगों को सुरक्षित निकालना प्राथमिकता बनी हुई है. प्रशासन ने राजस्व, स्वास्थ्य, नगर निगम, पुलिस और पशुपालन विभाग की टीमों को अलर्ट पर रखा है.

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