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Ground Report: यूपी-नेपाल बॉर्डर पर तेल संकट गहराया, पेट्रोल-डीजल के लिए लगी लंबी कतारें

नेपाल में पेट्रोल-डीजल की कीमतें भारत से 35 से 50 रुपए ज्यादा होने का असर अब यूपी-नेपाल बॉर्डर पर साफ दिखाई देने लगा है. सीमा से सटे कई जिलों में पेट्रोल पंप सूख चुके हैं, लंबी कतारें लग रही हैं और किसानों से लेकर ट्रांसपोर्ट सेक्टर तक संकट गहराता जा रहा है.

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50 KM दूर से तेल लेने पहुंच रहे लोग, यूपी-नेपाल बॉर्डर पर ईंधन संकट गहराया. (File Photo: ITG)
50 KM दूर से तेल लेने पहुंच रहे लोग, यूपी-नेपाल बॉर्डर पर ईंधन संकट गहराया. (File Photo: ITG)

भारत-नेपाल बॉर्डर से सटे उत्तर प्रदेश के कई जिलों में पेट्रोल और डीजल का बड़ा संकट खड़ा हो गया है. हालत यह है कि कई पेट्रोल पंप पूरी तरह बंद हो चुके हैं. जहां तेल उपलब्ध है, वहां लंबी-लंबी कतारें लगी हुई हैं. आखिर क्यों यूपी-नेपाल बॉर्डर पर तेल की इतनी भारी किल्लत हो गई है, इसे समझने के लिए आजतक की टीम ने ग्राउंड पर जाकर हालात का जायजा लिया.

बॉर्डर से सटे उत्तर प्रदेश के सात जिलों में इन दिनों पेट्रोल और डीजल का संकट लगातार गहराता जा रहा है. करीब 580 किलोमीटर लंबे सीमाई इलाके में हालात ऐसे हैं कि लगभग 60 फीसदी पेट्रोल पंप बंद पड़े हैं, जबकि बाकी पंपों पर भारी भीड़ उमड़ रही है. आजतक की टीम बलरामपुर के बॉर्डर से सटे इलाकों में पहुंची. यहां इंडिया ऑयल के पेट्रोल पंप पर ताला मिला. 

पंप को रस्सी बांधकर पूरी तरह बंद कर दिया गया था ताकि कोई वाहन अंदर न जा सके. आसपास मौजूद लोगों का कहना था कि पिछले कई दिनों से यहां तेल की सप्लाई प्रभावित है. थोड़ी दूरी आगे बढ़ने पर HP के कई पेट्रोल पंप भी बंद मिले. वहां 'पेट्रोल-डीजल उपलब्ध नहीं' के बोर्ड लगे थे. हालत यह थी कि पंप पर कोई कर्मचारी तक मौजूद नहीं था. 

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कई जगहों पर वाहन चालक मायूस होकर लौटते दिखाई दिए. हालांकि, भारत पेट्रोलियम का एक पेट्रोल पंप खुला मिला, लेकिन वहां हालात बेहद तनावपूर्ण थे. मोटरसाइकिल और अन्य वाहनों की लंबी लाइनें लगी थीं. लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा था. भीड़ को नियंत्रित करने के लिए रस्सियां लगाई गई थीं ताकि अफरा-तफरी न फैले.

स्थानीय लोगों ने बताया कि हालात इतने खराब हैं कि लोग 40-50 किलोमीटर दूर से तेल लेने पहुंच रहे हैं. कई लोग घंटों लाइन में लगे रहते हैं, लेकिन इसके बावजूद तेल मिलने की कोई गारंटी नहीं है. डीजल संकट का असर अब किसानों और ट्रांसपोर्ट सेक्टर पर भी साफ दिखाई देने लगा है. ट्रक ड्राइवर और किसान बहुत परेशान हैं.

उनका कहना है कि जरूरत के मुताबिक डीजल नहीं मिल पा रहा. जहां 150 लीटर डीजल चाहिए, वहां सिर्फ 5 से 10 लीटर ही दिया जा रहा है. ट्रांसपोर्ट कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि यही स्थिति रही तो माल ढुलाई और खेती दोनों बुरी तरह प्रभावित हो जाएंगे. एक ट्रक ड्राइवर ने कहा, ''डीजल नहीं मिलेगा तो ट्रांसपोर्ट पूरी तरह ठप हो जाएंगे.''

पेट्रोल पंप संचालक शिवम उपाध्याय ने बताया कि नेपाल से बड़ी संख्या में वाहन भारत आकर तेल भरवा रहे थे. नेपाल में तेल महंगा होने की वजह से बॉर्डर के भारतीय पेट्रोल पंपों पर दबाव लगातार बढ़ता गया. उन्होंने बताया कि हालात को संभालने के लिए अब तेल वितरण पर लिमिट तय करनी पड़ी है. नेपाल बॉर्डर पर सुरक्षा एजेंसियां भी अलर्ट मोड में हैं. 

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सीमा पर वाहनों की चेकिंग की जा रही है ताकि बड़े स्तर पर ईंधन की सप्लाई नेपाल न ले जाई जा सके. प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है. दरअसल, नेपाल में पेट्रोल और डीजल की कीमत भारत से करीब 35 से 50 रुपए प्रति लीटर ज्यादा है. भारत में करीब 100 रुपए लीटर बिकने वाला पेट्रोल नेपाल में लगभग 135 रुपए लीटर तक पहुंच रहा है. 

यही बड़ा अंतर बॉर्डर से तेल की भारी खपत की सबसे बड़ी वजह बन गया है. हाल ही में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई, लेकिन भारत में टैक्स कटौती के चलते कीमतें सीमित रहीं. वहीं नेपाल में पेट्रोल और डीजल के दामों में बड़ी बढ़ोतरी हुई, जिसका सीधा असर अब यूपी-नेपाल बॉर्डर के पेट्रोल पंपों पर दिखाई दे रहा है.

महराजगंज, सिद्धार्थनगर, बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच, लखीमपुर खीरी और पीलीभीत जैसे जिलों में हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं. कई पेट्रोल पंप पूरी तरह सूख चुके हैं और लोगों को तेल के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है. नेपाल में महंगे तेल और भारत में अपेक्षाकृत कम कीमतों के चलते यूपी-नेपाल बॉर्डर पर ईंधन संकट लगातार गहराता जा रहा है. 

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