उत्तर प्रदेश के हापुड़ जनपद की गढ़मुक्तेश्वर तहसील से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है. गढ़मुक्तेश्वर कोतवाली क्षेत्र के गांव दौताई में कथित बांग्लादेशी महिला महमूदा खातून द्वारा ‘रानी बेगम’ नाम से पहचान बनाए जाने का खुलासा हुआ है. यह मामला निर्वाचन प्रक्रिया की SIR सत्यापन के दौरान सामने आया.
जानकारी के अनुसार SIR की वोटर लिस्ट जांच प्रक्रिया के दौरान एक महिला के दस्तावेजों में गड़बड़ी पाई गई. जांच में सामने आया कि महिला मूल रूप से बांग्लादेश की रहने वाली है और उसने फर्जी दस्तावेजों के सहारे अपनी नई पहचान बनाई. आरोप है कि उसने ग्राम दौताई की प्रधान अफसाना के फर्जी लेटर बनाकर कागजात तैयार किए. इस संबंध में ग्राम प्रधान अफसाना ने गढ़ कोतवाली में शिकायत भी दी है.
SIR सत्यापन में खुली फर्जी पहचान की परतें
पुलिस जब पूछताछ के लिए मसरूफ के घर पहुंची तो वहां से एक संदिग्ध लेडीज पर्स बरामद हुआ. पर्स के अंदर से बांग्लादेश से जुड़े अहम दस्तावेज मिले. पुलिस को महमूदा खातून और उसकी बेटी रोजा का पासपोर्ट और वीजा भी मिला. इसके अलावा बांग्लादेश में बने अन्य दस्तावेज और वहां की करेंसी भी बरामद हुई, जिन्हें पुलिस ने जब्त कर लिया है.
बरामद कागजातों में एक निकाहनामा भी मिला है. इसके अनुसार गढ़ तहसील के ग्राम दौताई निवासी मसरूफ का निकाह 11 फरवरी 2021 को दिल्ली के हजरत निजामुद्दीन में महमूदा खातून से हुआ था. निकाह में दिल्ली के बाटला हाउस के दो लोग गवाह बने थे. आरोप है कि निकाह के बाद महमूदा खातून का नाम बदलकर रानी बेगम कर दिया गया और वह अपने पति के साथ गांव में रहने लगी.
दिल्ली के हजरत निजामुद्दीन में हुआ था निकाह
बताया गया है कि इस निकाह से उसके तीन बच्चे हैं, जिनमें दो बेटियां और एक बेटा शामिल हैं. बड़ी बेटी रोजा का जन्म वर्ष 2023 में बांग्लादेश में हुआ था. पुलिस को रोजा का बर्थ सर्टिफिकेट और पासपोर्ट भी मिला है. इस बीच मसरूफ सऊदी अरब में ड्राइवर की नौकरी करता है.
फिलहाल महमूदा खातून उर्फ रानी बेगम और उसका पति मसरूफ दोनों फरार बताए जा रहे हैं. गढ़ कोतवाली प्रभारी इंस्पेक्टर देवेंद्र बिष्ट ने बताया कि बरामद दस्तावेजों को कब्जे में लेकर जांच की जा रही है. पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर मामले की पड़ताल कर रही है. वहीं हापुड़ में SIR सत्यापन प्रक्रिया भी अब सवालों के घेरे में आ गई है.