उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद में डेढ़ साल के बच्चे की हत्या के मामले में कोर्ट से फांसी की सजा मिलने के बाद विराज उर्फ जितेंद्र पाठक जेल में बंद है. जेल सूत्रों के अनुसार, सजा सुनाए जाने के बाद उसकी पहली रात काफी बेचैनी में गुजरी. उसने पूरी रात नींद नहीं ली, बैरक में मौजूद अन्य बंदियों से दूरी बनाए रखी और भोजन भी नहीं किया. शनिवार को भी वह गुमसुम नजर आया.
जेल सूत्रों के मुताबिक, सजा सुनाए जाने के बाद उससे मिलने उसके परिवार का कोई सदस्य जिला जेल नहीं पहुंचा. फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद दोषी को कानूनन ऊपरी अदालत में अपील करने का अधिकार होता है. विराज उर्फ जितेंद्र पाठक भी 30 दिनों के भीतर इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपील दाखिल कर सकता है.
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अगर हाईकोर्ट फांसी की सजा को बरकरार रखता है, तो उसके पास सुप्रीम कोर्ट जाने का ऑप्शन होगा. इसके बाद भी राहत नहीं मिलने पर वह राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका दाखिल कर सकता है. जब तक ये सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी नहीं हो जातीं, तब तक उसे सामान्य बंदियों की तरह फिरोजाबाद जिला जेल में रखा जाएगा.
क्या दूसरी जेल भेजा जाएगा?
सजा के बाद यह चर्चा भी शुरू हो गई कि विराज को किसी सेंट्रल जेल में शिफ्ट किया जा सकता है या जल्द फांसी की प्रक्रिया शुरू होगी. लेकिन जेल प्रशासन के अनुसार, फिलहाल ऐसा कोई प्रस्ताव या प्रक्रिया नहीं है. विराज के खिलाफ अभी दो अन्य मामले भी अदालत में लंबित हैं.
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पहला मामला पुलिस मुठभेड़ के दौरान हत्या के प्रयास से जुड़ा है, जबकि दूसरा आर्म्स एक्ट के तहत अवैध हथियार बरामद होने का है. इन मामलों की सुनवाई फिरोजाबाद जिला अदालत में होनी है और उसे वारंट के आधार पर पेश किया जाएगा. यही वजह है कि फिलहाल विराज को दूसरी जेल में ट्रांसफर किए जाने की संभावना कम मानी जा रही है. पहले इन लंबित मामलों की सुनवाई और फांसी की सजा से जुड़ी प्रक्रिया पूरी होगी, उसके बाद ही आगे की कार्रवाई तय होगी.

क्या है पूरा मामला?
दरअसल, 30 मई 2026 की दोपहर फिरोजाबाद के शिकोहाबाद स्थित यादव कॉलोनी में डेढ़ साल के मासूम आरव की बेरहमी से हत्या कर दी गई. पुलिस के मुताबिक, बदायूं का रहने वाला विराज उर्फ जितेंद्र पाठक अपनी एक रिश्तेदार रति से शादी करना चाहता था, लेकिन रति ने इनकार कर दिया था. आरोप है कि इसी एकतरफा जुनून और बदले की भावना में विराज ने रति के डेढ़ साल के बेटे आरव को बहाने से अपने साथ ले लिया और सड़क पर पटक-पटककर मार डाला. यह पूरी वारदात पास में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई, जिसका वीडियो सामने आने के बाद पूरे प्रदेश में आक्रोश फैल गया था.
कैसे यहां तक पहुंचा मामला?
हत्या के बाद पुलिस ने तेजी से जांच शुरू की और घटनास्थल से साक्ष्य जुटाकर महज छह दिनों के भीतर अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी. इसके बाद जिला अदालत में मामले की नियमित सुनवाई हुई, जहां अभियोजन पक्ष ने 13 गवाह पेश किए, जबकि बचाव पक्ष की ओर से एक गवाह का बयान दर्ज कराया गया. 9 जुलाई 2026 को अदालत ने विराज उर्फ जितेंद्र पाठक को हत्या का दोषी ठहराया और 10 जुलाई को जिला जज ने उसे मौत की सजा सुनाई.