समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग को लेकर तीखी टिप्पणी की है. एक सार्वजनिक बयान में उन्होंने कहा कि अब चुनाव आयोग को अपनी बिल्डिंग पर भारतीय जनता पार्टी का झंडा लगा लेना चाहिए. उनके इस बयान को आयोग की निष्पक्षता पर सवाल के तौर पर देखा जा रहा है. अखिलेश ने कहा, 'अब तो चुनाव आयोग को अपनी बिल्डिंग पर भारतीय जनता पार्टी का झंडा लगा लेना चाहिए.'
क्या है पूरा मामला?
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एसआईआर प्रक्रिया के तहत इस्तेमाल हो रहे फॉर्म-7 को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा कथित तौर पर पहले से छपे हुए फर्जी फॉर्म के जरिए बड़ी संख्या में आपत्तियां दाखिल कराकर मतदाता सूची से नाम हटवाने की कोशिश कर रही है. उनके मुताबिक इसका असर खासतौर पर पीडीए वर्ग और मुस्लिम वोटरों पर पड़ सकता है. उन्होंने यह भी दावा किया कि विधानसभा-वार डाटा पेन ड्राइव और एक्सेल शीट के रूप में प्रसारित किया गया है और करीब दो करोड़ के आसपास वोट हटाने की योजना चल रही है.
प्रेस कॉन्फ्रेंस में क्या बोले अखिलेश यादव?
पार्टी मुख्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अखिलेश यादव ने कहा कि मतदान का अधिकार लोकतंत्र की सबसे मजबूत ताकत है, इसलिए निर्वाचन आयोग की जिम्मेदारी है कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से पूरी कराई जाए. उन्होंने बताया कि फॉर्म-7 को लेकर प्रदेश के अलग-अलग जिलों से लगातार शिकायतें मिल रही हैं, जिसके चलते उन्हें संसद का कार्यक्रम छोड़कर लखनऊ आना पड़ा.
अखिलेश यादव ने यह भी कहा कि अगर चुनाव आयोग निष्पक्षता सुनिश्चित नहीं कर पाता है तो फिर उसे अपनी स्वतंत्र छवि पर पुनर्विचार करना चाहिए. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि ऐसी स्थिति में आयोग को अपनी इमारत पर भाजपा का झंडा लगा लेना चाहिए.
अखिलेश ने वोटरों को दिए ये सुझाव
अखिलेश यादव ने कहा कि साधारण कागजी फॉर्म की जगह एक स्टैंडर्डाइज फॉर्म जारी किया जाना चाहिए, ताकि हर आवेदन को ट्रैक किया जा सके. उन्होंने मांग की कि फॉर्म जमा कराने की पूरी प्रक्रिया की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखी जाए और जांच के समय उसे देखा जाए. यदि कोई व्यक्ति फर्जीवाड़े में पकड़ा जाता है तो उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर धोखाधड़ी और राज्य के खिलाफ साजिश जैसी धाराओं में केस चलाया जाए. अखिलेश ने यह भी कहा कि डाउनलोड किए गए फॉर्म के सत्यापन के लिए स्पष्ट दस्तावेजी व्यवस्था हो और गड़बड़ियों का पता लगाने के लिए एआई तकनीक का उपयोग किया जाए.