लखनऊ में चारबाग रेलवे स्टेशन पर शुक्रवार की सुबह एक टिन शेड भरभराकर गिर गया था. अब इस हादसे में रेलवे ने कार्रवाई करते हुए ठेकेदार पर 50 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है. फील्ड इंजीनियर को सस्पेंड कर दिया और निगरानी करने वाली एजेंसी के प्रभारी को हटा दिया है.
इस घटना के बाद सवाल उठ रहे हैं कि शेड क्यों गिरा, इसकी जिम्मेदारी किसकी है. रेलवे ने इस पूरे मामले को लेकर जांच शुरू की है. उत्तरी रेलवे के महाप्रबंधक राजेश पांडेय ने बताया कि चारबाग स्टेशन पर पुनर्निर्माण का काम चल रहा है. इसी दौरान प्लेटफॉर्म शेड का एक हिस्सा गिर गया था. हालांकि, इस घटना में किसी बड़े हादसे की स्थिति नहीं बनी.
रेलवे के मुताबिक, दो यात्रियों को मामूली चोटें आई थीं, जिन्हें अस्पताल ले जाया गया और उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई. राजेश पांडेय ने बताया कि जिस ठेकेदार के जिम्मे यह काम था, उस पर 50 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है. इसके अलावा परियोजना से जुड़े फील्ड इंजीनियर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है.
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निर्माण कार्य की निगरानी करने वाली संस्था यानी पीएमसी (प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंट) के प्रभारी अधिकारी पर भी गाज गिरी है. रेलवे ने प्रभारी को सेवा से हटा दिया है. रेलवे का कहना है कि निर्माण कार्य की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों की जांच के लिए तीन सीनियर अफसरों की एक कमेटी बनाई गई है. यह समिति पूरे मामले की जांच करेगी और यह पता लगाएगी कि आखिर शेड गिरने की वजह क्या रही और किस स्तर पर लापरवाही हुई.

महाप्रबंधक ने कहा कि चारबाग स्टेशन उत्तरी रेलवे का महत्वपूर्ण स्टेशन है और यहां बड़े पैमाने पर पुनर्विकास एवं निर्माण कार्य चल रहे हैं. ऐसे में हर काम यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए किया जाएगा. अब हादसे को लेकर तीन सदस्यीय जांच कमेटी रिपोर्ट तैयार करेगी, जिसमें पता चल सकेगा कि यह महज तकनीकी खामी थी या फिर निर्माण कार्य में कहीं कोई बड़ी चूक हुई.
शुक्रवार की सुबह गिरा था 60 से 70 फीट लंबा टिन शेड
शुक्रवार की सुबह करीब 8 बजे लखनऊ के चारबाग रेलवे स्टेशन पर प्लेटफॉर्म नंबर-5 का 60 से 70 फीट लंबा टिन शेड अचानक भरभराकर गिर गया था. हादसे के वक्त प्लेटफॉर्म पर टीटीई भूपेंद्र और यात्री अभिषेक व साहिल मौजूद थे, जो चपेट में आकर घायल हो गए.
घटना से कुछ मिनट पहले इंटरसिटी एक्सप्रेस प्लेटफॉर्म से रवाना हो चुकी थी, जिससे वहां भीड़ कम थी और बड़ा हादसा टल गया. इसी दौरान हावड़ा-देहरादून एक्सप्रेस प्लेटफॉर्म पर पहुंचने वाली थी, लेकिन स्थिति को देखते हुए ट्रेन को दुर्घटनास्थल से पहले ही रोक दिया गया. सूचना मिलते ही RPF और रेलवे पुलिस ने रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर घायलों को बाहर निकाला और अस्पताल पहुंचाया. बाद में रेलवे ने क्रेन बुलाकर टूटा हिस्सा वहां से हटाया गया था.