Uttar Pradesh News: शाहजहांपुर के तिलहर निवासी भाजपा नेता संजय पाठक की बेटी प्रियंका पाठक, दामाद अनुज पाठक और उनका बेटा बहरीन में युद्ध के बीच फंसने के बाद अब सुरक्षित अपने घर पहुंचे. सॉफ्टवेयर इंजीनियर का यह परिवार वहां मिसाइलों और ड्रोन धमाकों की आवाजों के बीच खौफ के माहौल में रह रहा था. सुरक्षित ठिकाना न मिलने के कारण उन्होंने दो दिन अपनी कार में और बाकी समय कार पार्किंग में छिपकर बिताया. बहरीन में लगातार हो रही बमबारी और अराजकता से बचने के लिए परिवार ने भारत सरकार की मदद से वतन वापसी की है.
अमेरिकी सैन्य बेस के पास गिर रही थीं मिसाइलें
प्रियंका पाठक ने बताया कि वे जिस शेल्टर में ठहरे हुए थे, उसके पास ही अमेरिका का आर्मी एरिया था. इस वजह से ईरानी मिसाइलें वहां लगातार हमले कर रही थीं. आसमान में ड्रोन की गूंज और धमाकों ने उन्हें दहशत में डाल दिया था.
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पेशे से मॉडल प्रियंका के मुताबिक, वहां हालात इतने खराब थे कि उन्हें जान बचाने के लिए 15 दिनों तक घर के बाहर कार पार्किंग में शरण लेनी पड़ी. उन्होंने इस पूरी स्थिति को एक बड़ी त्रासदी करार दिया है. 'घर वापसी' पर उन्होंने चैन की सांस ली और सरकार का शुक्रिया अदा किया.
अजान के वक्त मिलता था खाने-पीने का समय
युद्ध के बीच जिंदगी जीने के जुगाड़ पर प्रियंका ने एक चौंकाने वाली बात साझा की. उन्होंने बताया कि शुरुआत में वे बहुत डरे हुए थे क्योंकि बिल्डिंगों पर ड्रोन आकर गिर रहे थे. फिर उन्हें अहसास हुआ कि अजान के समय हमले रुक जाते हैं. उसी समय का फायदा उठाकर परिवार खाने-पीने और नहाने जैसे जरूरी काम निपटाता था. वतन वापसी पर परिवार ने भारत सरकार का शुक्रिया अदा करते हुए कहा कि बहरीन में फिलहाल हालात बेहद चिंताजनक हैं.
बकौल प्रियंका पाठक- "जिस शेल्टर में हम थे, पास में ही अमेरिकी आर्मी एरिया था, जिससे ईरान की मिसाइलें और ड्रोन हमले हो रहे थे. हमने दो दिन कार और बाकी वक्त पार्किंग में बिताया. शुरुआत में बहुत डर था, बिल्डिंगों पर ड्रोन गिर रहे थे. बाद में समझ आया कि अजान के वक्त हमला नहीं होता, तब हम खाना-पीना और नहाना कर पाते थे. सरकार का बहुत शुक्रिया."