बहराइच कोर्ट ने दो ब्रिटिश नागरिकों को नेपाल से अवैध रूप से भारत में प्रवेश करने के आरोप में छह महीने की कैद की सज़ा सुनाई है. एक एजेंसी के मुताबिक मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रतिभा चौधरी ने सोमवार को दोनों दोषियों पर 50000 रुपये का जुर्माना भी लगाया. यदि वे जुर्माना नहीं भर पाते हैं, तो उन्हें तीन महीने की अतिरिक्त कैद काटनी होगी.
हालांकि, सज़ा सुनाए जाने के बाद अदालत ने उन्हें इस शर्त पर ज़मानत दे दी कि वे अपील की अवधि के दौरान देश छोड़कर नहीं जाएंगे. अभियोजन अधिकारी निर्मल यादव के अनुसार हसन अम्मान सलीम (35) और सुमित्रा शकील ओलिविया (61) को पिछले साल नवंबर में भारत-नेपाल सीमा पर रूपईडीहा से बिना वैध दस्तावेज़ों के भारत में प्रवेश करने के आरोप में गिरफ़्तार किया गया था.
सलीम, जो मूल रूप से पाकिस्तान के गुजरांवाला का रहने वाला है. यूनाइटेड किंगडम के मैनचेस्टर में रहता है और डी मोंटफोर्ट यूनिवर्सिटी में ऑडियोलॉजी का लेक्चरर है. ओलिविया जो मूल रूप से कर्नाटक के उडुपी की रहने वाली है. बाद में उसने ब्रिटिश नागरिकता हासिल कर ली और अब UK के ग्लॉस्टर में रहती है. उसके पास ब्रिटिश पासपोर्ट के साथ-साथ 'ओवरसीज़ सिटिज़न ऑफ़ इंडिया' (OCI) कार्ड भी है.
यह भी पढ़ें: महाराष्ट्र: 7 वर्षीय बच्ची से रेप, आरोपी गिरफ्तार... जांच में जुटी पुलिस
यादव ने बताया कि ये दोनों नवंबर 2025 में UK से नेपाल गए थे. जहां नेपालगंज के एक मेडिकल कॉलेज में सुनने में अक्षम बच्चों के लिए आयोजित एक चैरिटी कार्यक्रम में उन्हें हिस्सा लेना था. उनके पास नेपाल का वैध वीज़ा था. 15 नवंबर 2025 को सशस्त्र सीमा बल (SSB) और उत्तर प्रदेश पुलिस के जवानों ने अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर चलाए जा रहे एक संयुक्त जांच अभियान के दौरान उन्हें तब रोका, जब वे भारत में प्रवेश करने की कोशिश कर रहे थे.
जांच में पाया गया कि उनके पास देश में प्रवेश करने के लिए कोई वैध दस्तावेज़ नहीं थे. जिसके बाद उन्हें 'आव्रजन और विदेशी अधिनियम' के संबंधित प्रावधानों के तहत गिरफ़्तार कर लिया गया. जेल में कुछ समय बिताने के बाद अदालत ने इन दोनों को इस शर्त पर ज़मानत दे दी कि वे देश छोड़कर नहीं जाएंगे. तब से वे नियमित रूप से अदालत की सुनवाई में शामिल होते रहे हैं और मुक़दमे की सुनवाई के दौरान ज़्यादातर बहराइच के होटलों में ही रुके रहे.
यादव ने बताया कि सबूतों और परिस्थितियों के आधार पर अदालत ने दोनों आरोपियों को दोषी पाया और उन्हें सज़ा सुनाई. अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि क़ानून का पालन सुनिश्चित करने के लिए अवैध प्रवेश के मामलों में सज़ा देना आवश्यक है.