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Exclusive: लखनऊ अग्निकांड के बाद जांच को पहुंची टीम, सवाल पूछे गए तो एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालते दिखे अफसर

यूपी की राजधानी लखनऊ में अग्निकांड के बाद एलडीए, फायर और बिजली विभाग की टीम घटनास्थल से 400 मीटर दूर बेसमेंट कॉम्प्लेक्सों की जांच करने पहुंची. इस दौरान जब अफसरों से सुरक्षा मानकों और हादसे की जिम्मेदारी को लेकर सवाल पूछे गए तो ज्यादातर अफसर जवाब देने से बचते नजर आए. जिम्मेदारी दूसरे विभागों पर डालते दिखे.

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घटनास्थल के आसपास जायजा लेने पहुंचे थे अधिकारी. (Photo: Screengrab)
घटनास्थल के आसपास जायजा लेने पहुंचे थे अधिकारी. (Photo: Screengrab)

लखनऊ में अलीगंज अग्निकांड के बाद प्रशासनिक महकमे में हलचल तेज हो गई है. जिन विभागों पर सुरक्षा मानकों की निगरानी की जिम्मेदारी है, वे अब शहर के अलग-अलग इलाकों में जांच-पड़ताल करते नजर आ रहे हैं. जब इन्हीं विभागों के अधिकारियों से उनकी जिम्मेदारी को लेकर सवाल पूछे गए, तो जवाब देने की बजाय वे एक-दूसरे के पाले में गेंद डालते दिखे.

अलीगंज में घटनास्थल से महज 400 मीटर दूर स्थित बेसमेंट वाले कॉम्प्लेक्सों की जांच के लिए एलडीए (LDA), फायर विभाग और बिजली विभाग की टीम पहुंची थी. मौके पर आजतक की टीम भी मौजूद थी. जांच शुरू होने से पहले ही अधिकारियों से सवाल पूछे गए कि आखिर नियमित जांच और सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद इतना बड़ा हादसा कैसे हो गया.

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पहले एलडीए अफसरों से सवाल किया गया, लेकिन जवाब देने के बजाय उन्होंने कहा कि वे मीडिया से बात करने के लिए अधिकृत नहीं हैं. इसके बाद एक अधिकारी सीधे शोरूम के अंदर चले गए और सवालों से बचते नजर आए.

फिर फायर विभाग के कर्मचारियों से पूछा गया कि अगर लगातार जांच होती रहती है, तो अलीगंज जैसी घटना कैसे हो गई? इस पर उन्होंने कहा कि निरीक्षण तो नियमित होते हैं, लेकिन घटना के बारे में वे ज्यादा जानकारी नहीं दे सकते, क्योंकि वे किसी दूसरे एरिया से आए हैं. सवाल वहीं का वहीं रह गया.

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इसके बाद बिजली विभाग के अधिकारियों से पूछा गया कि अगर बिजली से जुड़ी कोई खामी थी, तो उस पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई? जवाब मिला कि नोटिस जारी होने और प्रक्रिया पूरी होने में करीब तीन महीने लग जाते हैं, संभव है कि हादसा उससे पहले हो गया हो.

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मौके पर मौजूद कुछ अन्य अधिकारियों से सवाल किया गया तो उनका जवाब था, 'सर बताएंगे'... लेकिन जब पूछा गया कि सर कहां हैं, तो आसपास कोई वरिष्ठ अधिकारी नजर नहीं आया. इसी दौरान एक अधिकारी कागज पर नोट्स बनाते दिखाई दिए. जब उनसे पूछा गया कि क्या कार्रवाई सिर्फ कागजों तक सीमित रहती है या जमीन पर भी कुछ होता है, तो उन्होंने कहा कि उनका काम केवल नोट करना है, आगे की जिम्मेदारी दूसरे अधिकारियों की है.

एक वरिष्ठ अधिकारी से बात करने की कोशिश की गई तो उन्होंने भी जिम्मेदारी लेने से बचते हुए कहा कि उनकी यहां पोस्टिंग अभी कल ही हुई है. पूरे घटनाक्रम में एक बात साफ नजर आई कि अलीगंज अग्निकांड के बाद जांच तो हो रही है, लेकिन जवाबदेही तय करने के सवाल पर हर विभाग दूसरे विभाग की ओर इशारा करता दिखाई दिया. हादसा कैसे हुआ, जिम्मेदार कौन है और भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे, इन सवालों का जवाब फिलहाल किसी के पास नहीं दिखा.

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