बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट पद से इस्तीफा देने वाले अलंकार अग्निहोत्री मंगलवार को प्रयागराज पहुंचे. निलंबन को लेकर जारी नोटिस के विषय में उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट के अधिवक्ताओं से मुलाकात की. उन्होंने बताया कि उनकी लीगल टीम निलंबन नोटिस का अध्ययन कर रही है और उसके बाद ही आगे की रणनीति तय की जाएगी. उन्होंने संकेत दिए कि संभव है कि निलंबन को हाईकोर्ट में चुनौती दी जाए.
7 फरवरी से दिल्ली कूच करने का ऐलान
अग्निहोत्री ने केंद्र सरकार पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा कि एससी-एसटी कानून सामान्य वर्ग के लिए पूरी तरह से काला कानून है. इस कानून को खत्म कराने के लिए उन्होंने केंद्र से 6 फरवरी तक विशेष सत्र बुलाने की मांग की. अगर सरकार विशेष सत्र नहीं बुलाती है, तो वह 7 फरवरी से दिल्ली कूच करेंगे.
अलंकार अग्निहोत्री ने स्पष्ट किया कि उन्होंने अपना इस्तीफा वापस लेने की किसी भी संभावना से इंकार किया है. उन्होंने मोदी सरकार पर हमला करते हुए कहा कि केंद्र सरकार वेस्ट इंडिया कंपनी की तरह काम कर रही है. वहीं, उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रति नरमी भी दिखाई.
रविवार को अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के आश्रम पहुंचे अलंकार अग्निहोत्री
बरेली के पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री, जिन्होंने नौकरशाही से इस्तीफा देकर वैचारिक संघर्ष की राह चुनी है, एक बार फिर चर्चा में हैं. रविवार देर शाम वे वाराणसी स्थित ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के विद्यामठ आश्रम पहुंचे, जहां उन्होंने विधिवत आशीर्वाद प्राप्त किया. मंत्रोच्चार, श्लोक-पाठ और वैदिक परंपरा के बीच हुई इस मुलाकात को अग्निहोत्री अपने आगामी आंदोलन की शुरुआत के तौर पर देख रहे हैं.
इस्तीफे से आंदोलन तक की पूरी कहानी
अग्निहोत्री तब चर्चा में आए थे जब मौनी अमावस्या के स्नान के दौरान शंकराचार्य और उनके वेदपाठियों के साथ हुई कथित घटना तथा नए यूजीसी नियमों से आहत होकर उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दिया था. इसके बाद उन्हें निलंबित भी कर दिया गया. उन्होंने नौकरशाही की सुरक्षित और प्रतिष्ठित कुर्सी छोड़कर सड़क पर उतरने का फैसला भावनात्मक नहीं बल्कि वैचारिक बताया. अग्निहोत्री ने कहा कि पिछले 35 वर्षों से वे एससी-एसटी एक्ट के दुरुपयोग और विभाजनकारी प्रभाव को समाज में देख रहे हैं. उनका कहना है कि यह कानून अब देश को जोड़ने के बजाय तोड़ने का काम कर रहा है और इसे जानबूझकर लागू किया गया है.