लखनऊ के मानवेंद्र सिंह हत्याकांड जैसा कांड इटावा जिले से भी सामने आया है. जैसे अक्षत ने पिता मानवेंद्र की बेरहमी से हत्या की थी वैसे ही यहां गजराज ने बाप को निर्मम तरीके से मार डाला. 'कलयुगी' बेटे ने कर्ज चुकाने के लिए पिता को डंडों से पीटकर मारा, फिर सबूत मिटाने के लिए शव को रजाई में लपेटकर जला दिया. फिलहाल, पुलिस ने पुलिस आरोपी बेटे को गिरफ्तार कर लिया है. आइये जानते हैं पूरी कहानी...
इटावा का 'कातिल' बेटा
आपको बता दें कि इटावा के थाना जसवंतनगर क्षेत्र के ग्राम नीलोई में 25 जनवरी की रात गजराज नामक युवक ने अपने पिता मुन्नालाल की डंडों से पीटकर हत्या कर दी. आरोपी ने वारदात को खेतों में बने एक कमरे के भीतर अंजाम दिया और साक्ष्य छिपाने के लिए शव को रजाई व बोरियों में लपेटकर डीजल डालकर आग लगा दी.
गजराज शराब का आदी था और कर्ज चुकाने के लिए जमीन बेचना चाहता था, जिसका पिता विरोध कर रहे थे. पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर धारा 103(1) और 238(a) बीएनएस के तहत जेल भेज दिया है.
संपत्ति के लालच और कर्ज ने बनाया 'कातिल'
आरोपी गजराज शराब पीने का लती है और उस पर काफी कर्ज हो गया था. इस कर्ज से मुक्ति पाने के लिए वह अपने पिता की जमीन बेचना चाहता था. पिता मुन्नालाल इसके लिए तैयार नहीं थे, जिसे लेकर दोनों के बीच अक्सर विवाद होता रहता था. 25 जनवरी की रात को भी इसी बात पर झगड़ा हुआ, जिसके बाद गजराज ने कमरे को बंद कर पिता पर डंडों से ताबड़तोड़ हमला कर उन्हें मौत के घाट उतार दिया.
पुलिस को गुमराह करने की नाकाम साजिश
पिता की हत्या करने के बाद गजराज ने खुद ही पुलिस को सूचना दी ताकि किसी को उस पर शक न हो. उसने पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की, लेकिन जब फॉरेंसिक टीम और पुलिस ने घटनास्थल की जांच की, तो शक की सुई गजराज की ओर मुड़ गई. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में डंडों से पिटाई और जलने के कारण मौत की पुष्टि हुई. कड़ी पूछताछ के बाद गजराज ने अपना जुर्म कबूल कर लिया.
पुलिस की कार्रवाई और सीओ का बयान
सीओ जसवंतनगर आयुषी सिंह ने बताया कि गजराज ने अपनी योजना के तहत पिता के नाम की प्रॉपर्टी अपने नाम कराने और उसे बेचने के लिए हत्या की थी. आरोपी ने शव को रजाई और बोरियों में लपेटकर कमरे में ही आग लगा दी थी ताकि मामला हादसा लगे. पुलिस ने सक्रियता दिखाते हुए हत्या में इस्तेमाल सामान बरामद कर लिया है. आरोपी अब सलाखों के पीछे है और मामले की कानूनी कार्रवाई जारी है.