अमेरिका में मंगलवार (5 नवंबर) को होने वाले राष्ट्रपति के चुनाव के लिए मीडिया में एक खास पैटर्न देखने को मिल रहा है. कई बड़े मीडिया संस्थानों ने उप राष्ट्रपति कमला हैरिस का समर्थन किया है, जबकि पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को नकारा है. न्यू यॉर्क टाइम्स और द इकोनॉमिस्ट दो ऐसे प्रमुख उदाहरण हैं. द इकोनॉमिस्ट ने तो साफतौर पर कमला हैरिस का समर्थन करते हुए लिखा, 'हम कमला के लिए वोट की अपील करते हैं.' लेकिन इस बार अमेरिका के कई मीडिया संस्थानों ने उम्मीदवारों का खुलकर समर्थन नहीं किया है. ऐसे में ये सवाल भी उठ रहे हैं कि क्या अब अमेरिका के चुनावों में मीडिया की दखल का असर घट रहा है?
पहले जानें अमेरिका का इतिहास
अमेरिकी मीडिया का चुनाव में खुलकर उम्मीदवारों के समर्थन का इतिहास बहुत पुराना रहा है. न्यू यॉर्क टाइम्स, द वाशिंगटन पोस्ट और कई क्षेत्रीय अखबारों के संपादकीय पन्नों ने वर्षों से समर्थन का उपयोग करके उम्मीदवारों के रुख को स्पष्ट किया है या विशेष चुनावों के महत्व को उजागर किया है. 1960 में, न्यू यॉर्क टाइम्स ने केनेडी का समर्थन किया था. इसी तरह, शिकागो ट्रिब्यून ने 2008 में बराक ओबामा का समर्थन करके उनकी अभियान को विश्वसनीयता दी और वोटर्स को प्रभावित किया.
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इस बार क्या है अलग
न्यू यॉर्क टाइम्स और द इकोनॉमिस्ट ने कमला हैरिस का समर्थन किया है, जबकि द वाशिंगटन पोस्ट ने किसी भी उम्मीदवार का समर्थन करने से परहेज किया, जो एक चौंकाने वाला कदम था. इसके प्रकाशक विल लुईस ने कहा कि इससे पाठकों की स्वतंत्रता का सम्मान होगा. वॉल स्ट्रीट जर्नल जो आमतौर पर कंजर्वेटिव उम्मीदवारों का समर्थन करता है, वह इस बार किसी उम्मीदवार का समर्थन नहीं कर रहा है. इसी तरह फॉक्स न्यूज और सीएनएन ने भी इसबार किसी का खुलकर समर्थन नहीं किया है.
स्थानीय चुनावों में भी मीडिया का दखल
दरअसल, भारत में मीडिया आमतौर पर राजनीतिक उम्मीदवारों का सार्वजनिक समर्थन नहीं करता है. इसके बजाय, वे विश्लेषण और उम्मीदवारों के विस्तृत कवरेज पर जोर देते हैं. दिलचस्प बात यह है कि अमेरिका में समर्थन राष्ट्रपति चुनाव तक ही सीमित नहीं है, बल्कि राज्य और स्थानीय चुनावों में भी फैला हुआ है. स्थानीय समाचार पत्र अक्सर गवर्नरों, सीनेटरों, महापौरों, और यहां तक कि स्कूल बोर्ड के सदस्यों के लिए उम्मीदवारों का समर्थन करते हैं.
इस बार बदल रही तस्वीर
अमेरिका में इस बार के चुनावों में द वाशिंगटन पोस्ट समेत कई छोटे-बड़े अखबारों ने उम्मीदवारों को खुलकर समर्थन देने से इनकार किया है. यह अमेरिका में एक नई शुरुआत जैसा है. अमेरिका में इस बार का चुनाव कई मायनों में खास है. ट्रंप और हैरिस के बीच कांटे की टक्कर मानी जा रही है.