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हल्दी से दुपट्टे तक, ऑस्ट्रेलिया में भारतीय महिला ने बताई देसी चीजों की कीमत

ऑस्ट्रेलिया में रहने वाली एक भारतीय महिला का वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में है, जिसमें उसने बताया कि भारत में जिन्हें हम आम या ‘बहुत देसी’ मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, वही चीजें विदेश में प्रीमियम बनकर बिकती हैं. हल्दी दूध से लेकर हाथ के बने कपड़ों तक, उसके अनुभव ने लोगों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या हम अपनी ही चीजों की असली कीमत नहीं समझ पाते.

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स्मिधा ने बताया कि उनके घर के पास एक कैफे में हल्दी लट्टे 8 डॉलर में बिक रहा था (Photo:Insta/kahaniandconversations/Pexel)
स्मिधा ने बताया कि उनके घर के पास एक कैफे में हल्दी लट्टे 8 डॉलर में बिक रहा था (Photo:Insta/kahaniandconversations/Pexel)

ऑस्ट्रेलिया में रहने वाली भारतीय महिला स्मिधा का एक वीडियो वायरल हो रहा है. इस वीडियो में उन्होंने बताया कि विदेश जाकर उनकी सोच कैसे बदली और क्यों भारत की कई चीजें बाहर ज्यादा कीमती लगती हैं.

स्मिधा ने बताया कि उनके घर के पास एक कैफे में हल्दी लट्टे 8 डॉलर में बिक रहा था. लोग लाइन लगाकर इसे खरीद रहे थे, जिनमें वह खुद भी शामिल थीं. इस अनुभव ने उन्हें अपने घर की याद दिलाई, जहां उनकी मां रोज हल्दी दूध बनाती थीं, लेकिन वह उसे पीने से बचती थीं.उन्होंने कहा कि वही स्वाद और वही चीज होने के बावजूद, उस समय यह उन्हें खास नहीं लगता था. लेकिन विदेश में वही चीज प्रीमियम बन गई.

घर की चीजें, बाहर महंगी

स्मिधा ने एक और उदाहरण दिया. उनके घर में रखा एक हाथ से बना दुपट्टा, जिस पर कभी ध्यान नहीं गया, वैसी ही चीजें विदेश में महंगे दामों पर बिकती हैं. उनके मुताबिक, यह संस्कृति के खत्म होने की बात नहीं है, बल्कि अपनी ही चीजों की कीमत न पहचानने का मामला है.

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देखें वीडियो

उन्होंने कहा कि भारत में जिन परंपराओं को पुराना या आउटडेटेड माना जाता है, वही चीजें विदेश में सराही जाती हैं. उनके वीडियो का मैसेज साफ था कि जो चीजें यहां 'बहुत देसी' लगती हैं, वही बाहर 'प्रीमियम' बन जाती हैं.

सोशल मीडिया पर बंटी राय

वीडियो पर लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रिया आई है. कई यूजर्स ने उनकी बात से सहमति जताई और अपने अनुभव साझा किए. एक यूजर ने लिखा कि विदेश में योगा और आयुर्वेद जैसी चीजें ज्यादा सम्मान पाती हैं.वहीं कुछ लोगों ने इसे अलग नजरिए से देखा और कहा कि पारंपरिक चीजों को नए तरीके से पेश करने की जरूरत है.

यह वीडियो एक बड़ा सवाल छोड़ता है. क्या हम अपनी ही संस्कृति और परंपराओं की असली कीमत समझ पाते हैं, या उन्हें पहचानने के लिए हमें विदेश जाना पड़ता है.

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