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9 साल के बच्चे की पसल‍ियों में हुआ फ्रैक्चर, दादी ने गर्म सर‍िए से दागा तो फैला इंफेक्शन

मध्य प्रदेश के बैतूल से दर्दनाक इलाज का मामला सामने आया है जहां 9 साल के बच्चे को दादी ने गर्म सरिए से दाग द‍िया. बच्चे के कंधे-पसलियों में फ्रैक्चर हो गया था ज‍िसे ठीक करने के ल‍िए इस कुप्रथा का पालन क‍िया गया ज‍िसके गंभीर पर‍िणाम सामने आए.

मासूम बच्चे को गर्म सर‍िए से दागा. मासूम बच्चे को गर्म सर‍िए से दागा.
स्टोरी हाइलाइट्स
  • 9 साल के बच्चे के कंधे और पसल‍ियों में हुआ फ्रैक्चर
  • दादी ने गर्म सर‍िये से दागा तो हुआ इन्फेक्शन

मध्य प्रदेश के बैतूल में दादी ने ही अपने पोते को इलाज के नाम पर गर्म सरिया से दाग द‍िया. रोंगटे खड़े कर देने वाले इस घरेलू इलाज से पीड़ित बच्चे को जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया गया है. डॉक्टर इसे घातक बता रहे हैं.

दरअसल, गिरने से 9 साल के बच्चे के कंधे और पसलियों में फ्रैक्चर हो गया था. हैरानी तो तब हुई, जब परिवार वालों ने अस्पताल ले जाने के बजाय चोट वाली जगह को गर्म सरियों से दाग दिया. हालत बिगड़ने पर उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया. बच्चे को दागने से इंफेक्शन भी हो गया है. उसे लगातार बुखार आ रहा है.

बैतूल के भीमपुर विकासखंड से 40 किमी दूर खैरा गांव में रामोती बारस्कर गांव में आंगनबाड़ी सहायिका है. पिछले गुरुवार किराना दुकान से सामान लाते समय उसका 9 साल का बेटा आयुष गिर गया था. इससे उसके कंधे और पसलियों में चोट आ गई. अस्पताल के दूर होने और आने-जाने के लिए साधन के अभाव में आयुष की दादी ने घर पर ही इलाज शुरू कर दिया. दादी ने फसल काटने वाले सरियों को लाल होने तक गर्म किया, इसके बाद इन सरियों से आयुष के कंधे, हाथ और पसलियों की जगह पर कई बार दाग दिया.

दागने से बन गए जलने के न‍िशान 

इस वजह से आयुष के शरीर पर जलने के निशान भी बन गए हैं. गांव के इलाज और दागने के बावजूद हालत में सुधार नहीं हुआ. तबीयत बिगड़ने पर उसकी मां उसे लेकर भीमपुर पहुंची. यहां से उसे शनिवार की शाम बैतूल जिला अस्पताल रैफर कर दिया गया.

जिला अस्पताल में इलाज कर रहे डॉक्टर संगम मांडवे के मुताबिक, गिरने की वजह से बच्चे के शरीर में फ्रैक्चर हुआ है, एक्सरे करवाया गया है. सरियों से दागने की वजह से उसे जगह-जगह जख्म बन गए हैं, जिसकी वजह से संक्रमण फैल गया है. इससे उसे लगातार बुखार आ रहा है. मामले में भीमपुर खंड चिकित्सक को सूचना भेजकर मामले में पुलिस कार्रवाई के लिए एमएलसी करवाई जा रही है.

बता दें क‍ि बैतूल के आदिवासी इलाकों में पेट दर्द, लकवा यहां तक कि दस्त लगने पर भी शरीर को दागने की कुप्रथा है. इसमें एक-दो दिन का बच्चा हो या फिर जवान या बुजुर्ग, उसकी आयु नहीं देखी जाती. दागने के लिए कई जगह हंसिए का इस्तेमाल किया जाता है, तो कई जगह कांच की चूड़ियों को दीये से गर्म करके भी दागा जाता है. ग्रामीण इलाकों में कई लोग, जो दागने का काम करते हैं. इसके लिए लोहे का औजार भी बनाते हैं. दावा यह भी है कि दागने की वजह से लकवे जैसी बीमारी ठीक हो जाती है. 


 

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