राजनीति, कूटनीति, विदेश नीति, य़द्ध, विश्वशांति, इन सब चीजों से अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ऊपर उठ चुके हैं. सोशल मीडिया पर उनके पोस्ट देखकर ऐसा ही लगता है. इसके साथ ही पोप लियो को लेकर उन्होंने जो कुछ भी कहा और लिखा है. इससे तो बस 'सेक्रेड गेम्स' सीरीज का वही डायलॉग याद आता है - अपुन इच भगवान है.
इन दिनों हर जगह बस डोनाल्ड ट्रंप और पोप लियो के बीच के झगड़े की चर्चा हो रही है. ट्रंप ने साफ कहा है - मुझे ऐसा पोप नहीं चाहिए जो यह मानता हो कि ईरान के पास परमाणु हथियार होना जायज है. मुझे ऐसा पोप नहीं चाहिए जो यह मानता हो कि अमेरिका द्वारा वेनेजुएला पर हमला करना भयानक है.
इसके बाद ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर इस विवाद के बाद जो पोस्ट किया है, उसको लेकर काफी बातें हो रही हैं. दरअसल, ट्रंप ने एक AI जेनरेटेड तस्वीर शेयर की है, जिसमें उन्होंने खुद को किसी फरिश्ते की तरह दिखाया है. इसे देखकर ऐसा लगता है कि वो पोप से भी ऊपर हैं. पोप लियो और ट्रंप के बीच का यह विवाद नया नहीं है.
डोनाल्ड ट्रंप , जो राजनीतिक हलकों में व्यापक आलोचनाओं के आदी हैं. अब अपने सबसे प्रभावशाली अमेरिकी आलोचकों में से एक का सामना कर रहे हैं. अब ट्रंप की आलोचना वेटिकन में भी गूंजने लगी है. पहले अमेरिकी पोप, लियो XIV ईरान में चल रहे संघर्ष को लेकर सीधे अमेरिकी राष्ट्रपति को चुनौती दे रहे हैं.
अमेरिका में जन्मे पहले पोप लियो, ईरान के साथ संघर्ष के मुखर आलोचक के रूप में उभरे हैं. इस सप्ताह की शुरुआत में ट्रंप द्वारा ईरान की सभ्यता को नष्ट करने की धमकी देने वाली ट्रुथ सोशल पोस्ट को शेयर करने के बाद, लियो ने एक बयान जारी कर उनके शब्दों को बिल्कुल अस्वीकार्य बताया था.
यह वक्त अमेरिका और पोप के बीच संबंधों में एक महत्वपूर्ण मोड़ लेकर आया है. पहली बार, यह संबंध दो अमेरिकियों के इर्द-गिर्द घूम रहा है. एक तरफ क्वींस के 79 साल के राजनेता डोनाल्ड ट्रंप है और दूसरी तरफ शिकागो के 70 वर्षीय पोप लियो. दोनों एक ही पीढ़ी के होने और सांस्कृतिक जड़ों को साझा करने के बावजूद, दोनों के अपार शक्ति वाले पदों के प्रति उनके दृष्टिकोण बिल्कुल अलग-अलग हैं.
एक बैठक के बाद व्हाइट हाउस और वेटिकन के बीच बढ़ी तनातनी
द इंडिपेंडेंट की रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी में वेटिकन के राजनयिक कार्डिनल क्रिस्टोफ पियरे ने पेंटागन में रक्षा नीति उप सचिव एलब्रिज कोल्बी से मुलाकात की थी. इस सप्ताह की शुरुआत में, द फ्री प्रेस ने बताया कि अमेरिकी अधिकारियों ने इस बैठक का इस्तेमाल पोप लियो XIV द्वारा उसी महीने दिए गए भाषण की आलोचना करने के लिए किया. इस मीटिंग में पोप की टिप्पणियों को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की नीतियों पर हमला बताया गया.
पोप लियो ने कभी ट्रंप का नाम लेकर आलोचना नहीं की है, लेकिन उन्होंने लगातार ईरान युद्ध की निंदा की है और सभी पक्षों के सरकारी अधिकारियों से अपने हथियार डालने का आग्रह किया है. अपने ऐतिहासिक पाम संडे संबोधन के दौरान, पोप ने स्पष्ट रूप से कहा था कि ईश्वर उन घमंडी विश्व नेताओं की प्रार्थना नहीं सुनता जिनके हाथ खून से सने हैं या जो युद्ध छेड़ते हैं.उन्होंने जनता से यह भी आग्रह किया है कि वे ईश्वर के नाम का व्यर्थ इस्तेमाल न करें, विशेषकर युद्ध के संदर्भ में.
हाल में पोप ने शुक्रवार को एक बयान जारी कर चेतावनी दी कि ईश्वर किसी भी संघर्ष को आशीर्वाद नहीं देते. यह बयान अमेरिका के रक्षा सचिव पीट हेगसेथ के उस बयान के कुछ ही दिनों बाद आया है जिसमें उन्होंने कहा था कि ईरान पर अमेरिकी हमले ईश्वरीय कृपा के संरक्षण में किए गए थे.
ट्रंप प्रशासन में अमेरिका नहीं जाएंगे पोप
इधर फ्री प्रेस ने यह भी बताया कि शिकागो के रहने वाले लियो ने पहले अमेरिका की 250वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में व्हाइट हाउस में आयोजित समारोह में शामिल होने का निमंत्रण ठुकरा दिया था.वहीं वेटिकन के एक अधिकारी ने अखबार को बताया कि ट्रंप प्रशासन के तहत शायद ही पोप कभी अमेरिका का दौरा करें.