ब्राजील में रोप जंप के दौरान 21 वर्षीय मारिया एडुआर्डा रोड्रिग्स डी फ्रेटास की मौत ने पूरी दुनिया को झकझोर दिया है. शुरुआती जांच में सुरक्षा चूक की आशंका जताई जा रही है. इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर लाखों लोग यह सवाल पूछ रहे हैं कि क्या ऐसे हादसे रोके जा सकते थे?
इस सवाल का जवाब भारत के पर्यटन मंत्रालय की गाइडलाइन में मिलता है. मंत्रालय ने बंजी जंपिंग ऑपरेटरों के लिए ऐसे सुरक्षा मानक तय किए हैं, जिनका उद्देश्य किसी भी तरह की लापरवाही को रोकना है. भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय की गाइडलाइन बताती है कि जंप से पहले किन बातों की जांच करना आपकी जिम्मेदारी भी है.
सिर्फ ऊंचाई मत देखिए, ऑपरेटर की सुरक्षा भी जांचिए
सोशल मीडिया पर बंजी जंपिंग के वीडियो देखकर कई लोग तुरंत टिकट बुक कर लेते हैं. लेकिन रोमांच से पहले यह जानना जरूरी है कि जिस कंपनी के साथ आप जंप करने जा रहे हैं, वह सुरक्षा के नियमों का पालन भी करती है या नहीं.
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भारत के पर्यटन मंत्रालय और एडवेंचर टूर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ATOAI) की गाइडलाइन के मुताबिक, ऑपरेटर के पास प्रशिक्षित स्टाफ, प्रमाणित उपकरण और तय सुरक्षा व्यवस्था होना जरूरी है.
1. सबसे पहले पूछिए- क्या कंपनी पंजीकृत है?
जंप कराने वाली कंपनी से पूछें कि क्या वह राज्य पर्यटन विभाग में पंजीकृत है या पर्यटन मंत्रालय के सुरक्षा मानकों का पालन करती है. वैध लाइसेंस और रजिस्टर्ड ऑफिस किसी भी पेशेवर ऑपरेटर की पहली पहचान माने जाते हैं.
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2. जंप मास्टर का सर्टिफिकेट देखने में झिझकें नहीं
आपको यह जानने का पूरा अधिकार है कि जंप कराने वाला व्यक्ति प्रशिक्षित है या नहीं.गाइडलाइन के अनुसार, जंप मास्टर के पास प्रोफेशनल ट्रेनिंग, पर्याप्त अनुभव,वैध प्राथमिक उपचार (फर्स्ट एड) और CPR सर्टिफिकेट होना चाहिए.
3. क्या उपकरण सर्टिफाइड हैं?
हार्नेस, बंजी कॉर्ड, कैराबीनर और अन्य उपकरण प्रमाणित कंपनियों के होने चाहिए.अगर उपकरण पुराने, घिसे हुए या खराब दिखें, तो जंप न करें. मंत्रालय के मुताबिक इनकी नियमित जांच और रिकॉर्ड रखना जरूरी है.
4. क्या आपके सामने सेफ्टी चेक हो रहा है?
जंप से पहले स्टाफ को आपके सामने हार्नेस चेक करना चाहिए.रस्सी का कनेक्शन दोबारा जांचना चाहिए.कैराबीनर लॉक करना चाहिए. एंकर पॉइंट की पुष्टि करनी चाहिए.अगर यह प्रक्रिया जल्दबाजी में हो रही है, तो सवाल जरूर पूछें.
5. क्या सेफ्टी ब्रीफिंग दी गई?
एक जिम्मेदार ऑपरेटर जंप से पहले आपको पूरी जानकारी देगा:
कैसे कूदना है?
शरीर की सही पोजिशन क्या होगी?
इमरजेंसी में क्या होगा?
अगर बिना ब्रीफिंग के सीधे जंप कराया जा रहा है, तो यह खतरे का संकेत हो सकता है.
6. मेडिकल फॉर्म भरवाया गया या नहीं?
अगर किसी ने आपसे मेडिकल हिस्ट्री नहीं पूछी, तो सावधान हो जाइए.गाइडलाइन के अनुसार, हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर, मिर्गी, रीढ़ की समस्या, हालिया सर्जरी या गर्भावस्था जैसी स्थितियों में बंजी जंपिंग नहीं करनी चाहिए.
7. क्या इमरजेंसी प्लान मौजूद है?
जंप साइट पर पर्यटन मंत्रालय की गाइडलाइन के अनुसार, हर जंप साइट पर प्राथमिक उपचार (फर्स्ट एड) किट, CPR में प्रशिक्षित स्टाफ, जरूरत पड़ने पर उपलब्ध डॉक्टर (डॉक्टर ऑन कॉल), एम्बुलेंस या नजदीकी अस्पताल से तत्काल संपर्क की व्यवस्था और किसी भी हादसे से निपटने के लिए पहले से तैयार रेस्क्यू प्लान होना अनिवार्य है.
8. क्या हर जंप का रिकॉर्ड रखा जाता है?
पर्यटन मंत्रालय के अनुसार, हर जंप, हर निरीक्षण और हर घटना का रिकॉर्ड रखना जरूरी है.यही रिकॉर्ड किसी हादसे की स्थिति में जांच का आधार बनते हैं.
9. क्या ऑपरेटर अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों का पालन करता है?
भारत सरकार ने सिफारिश की है कि बंजी जंपिंग ऑपरेशन AS/NZS 5848:2000 (ऑस्ट्रेलिया-न्यूज़ीलैंड सुरक्षा मानक) के अनुसार चलाए जाएं. अगर ऑपरेटर इसका पालन करता है, तो यह एक अच्छा संकेत माना जाता है.
10. अगर स्टाफ जल्दबाजी करे, तो जंप मत कीजिए
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर आपको लगे कि स्टाफ जल्दबाजी में जंप करा रहा है, आपके सवालों का जवाब देने से बच रहा है या चिढ़ रहा है, या फिर सुरक्षा जांच पूरी तरह नहीं की जा रही है, तो ऐसे में जंप करने से बचना ही बेहतर है. रोमांच दोबारा मिल सकता है, लेकिन जिंदगी नहीं.
याद रखें...
बंजी जंपिंग अपने आप में खतरनाक खेल नहीं है. खतरा तब बढ़ता है, जब सुरक्षा नियमों में लापरवाही हो. इसलिए अगली बार एडवेंचर पर जाएं, तो सिर्फ टिकट और सेल्फी की नहीं, सुरक्षा की भी जांच जरूर करें.