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नामी-गिरामी प्राइवेट स्कूल भी पड़े फीके! क्यों इस सरकारी स्कूल में दाखिले के लिए कतारों में खड़े हैं पेरेंट्स?

स्कूल प्रशासन के मुताबिक लोकप्रियता का आलम यह है कि केवल शहर से ही नहीं, बल्कि जिले के सुदूर इलाकों और पड़ोसी जिलों से भी अभिभावक बच्चों के फॉर्म लेकर पहुंच रहे हैं. एडमिशन का नोटिफिकेशन जारी होने के महज कुछ ही दिनों के भीतर 3,000 से ज्यादा फॉर्म जमा हो चुके थे. अब 450 सीटों के ल‍िए 4000 के करीब आवेदन आए हैं.

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कभी खाली रहती थी क्लास, अब बच्चे लेना चाहते हैं इसी सरकारी स्कूल में एड‍मिशन
कभी खाली रहती थी क्लास, अब बच्चे लेना चाहते हैं इसी सरकारी स्कूल में एड‍मिशन

अभी बहुत दिन नहीं बीते हैं, जब तेलंगाना के नलगोंडा जिले का नाम सरकारी स्कूलों में बच्चों के बेहद कम या 'शून्य' एनरोलमेंट (दाखिले) के लिए एक खराब उदाहरण के तौर पर लिया जाता था. लेकिन आज, यही जिला शिक्षा के क्षेत्र में एक ऐसी ऐतिहासिक क्रांति और बदलाव के लिए देश भर की सुर्खियों में है, जिसने बड़े-बड़े नामी प्राइवेट स्कूलों की नींद उड़ा दी है.

इसे आप तेलंगाना के सरकारी क्रेडिबिलिटी के पुनर्जन्म की कहानी भी कह सकते हैं. नलगोंडा के बोट्टूगुडा स्थित 'कोमाटिरेड्डी प्रतीक गवर्नमेंट स्कूल' में इस साल एडमिशन का ऐसा क्रेज देखा जा रहा है कि यहाँ महज 450 सीटों के लिए करीब 4,000 आवेदन आ चुके हैं. इसके चलते इस सरकारी स्कूल में दाखिला मिलना किसी आईआईटी या आईआईएम की सीट मिलने जितना प्रतिस्पर्धी और मुश्किल हो गया है.

स्कूल के बाहर का नजारा किसी महंगे और वीआईपी प्राइवेट स्कूल जैसा लग रहा है, जहां सुबह-सुबह से ही माता-पिता अपने बच्चों का भविष्य सुरक्षित करने के लिए लंबी-लंबी कतारों में खड़े नजर आ रहे हैं.

तंबू से लेकर तीन मंजिला 'हाई-टेक' कैंपस तक का सफर
इस स्कूल की सबसे हैरान कर देने वाली बात इसकी पुरानी स्थिति है. पिछले साल तक इस संस्थान के पास अपनी कोई स्थायी बिल्डिंग तक नहीं थी और पूरे स्कूल में बमुश्किल 200 छात्र पढ़ते थे. लेकिन आज, 'कोमाटिरेड्डी प्रतीक फाउंडेशन' द्वारा दिवंगत प्रतीक रेड्डी की स्मृति में पुनर्निर्मित यह स्कूल एक शानदार तीन मंजिला मॉडर्न कैंपस में तब्दील हो चुका है.

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यह स्कूल अब सिर्फ कागजों पर सरकारी नहीं रहा, बल्कि यह स्मार्ट क्लासरूम, डिजिटल लैबोरेट्रीज और एआई (Artificial Intelligence) आधारित आधुनिक लर्निंग सुविधाओं से पूरी तरह लैस है. बुनियादी ढांचे और पढ़ाई के माहौल के मामले में यह बड़े-बड़े कॉरपोरेट स्कूलों को टक्कर दे रहा है.

मजबूरी नहीं, अब गर्व से सरकारी स्कूल चुन रहे हैं पेरेंट्स
एडमिशन की लाइन में लगे एक अभिभावक ने बताया कि हम पहले अपने बच्चे के लिए एक नामी प्राइवेट स्कूल में भारी-भरकम फीस चुका रहे थे. लेकिन जब हमने इस सरकारी स्कूल के कैंपस और सुविधाओं को देखा, तो हम दंग रह गए. यहाँ का इंफ्रास्ट्रक्चर कई प्राइवेट स्कूलों से कहीं बेहतर है.

लाइन में खड़े एक अन्य पैरेंट ने बेहद भावुक होकर कहा कि बेहतर और अच्छी शिक्षा पाना इस बात पर निर्भर नहीं होना चाहिए कि किसी परिवार की जेब में कितना पैसा है. इस स्कूल ने हमारे जैसे मिडिल क्लास परिवारों को एक नई उम्मीद दी है कि सरकारी स्कूल भी देश के सबसे बेस्ट स्कूलों का मुकाबला कर सकते हैं.

स्थानीय निवासी करन ने भी अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूल से निकालकर इसी सरकारी स्कूल में डाला है. उनका कहना है कि स्कूल की टेक्नोलॉजी-बेस्ड क्लासेज और आधुनिक सुविधाएं वाकई काबिले-तारीफ हैं.

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पड़ोसी जिलों से भी आ रहे हैं आवेदन, हेडमास्टर भी हैरान
स्कूल प्रशासन के मुताबिक, लोकप्रियता का आलम यह है कि केवल नलगोंडा शहर ही नहीं, बल्कि जिले के सुदूर इलाकों और पड़ोसी जिलों से भी अभिभावक बच्चों के फॉर्म लेकर पहुँच रहे हैं. एडमिशन का नोटिफिकेशन जारी होने के महज कुछ ही दिनों के भीतर 3,000 से ज्यादा फॉर्म जमा हो चुके थे.

स्कूल के हेडमास्टर (प्रधानाचार्य) ने इस अभूतपूर्व बदलाव पर मुस्कुराते हुए कहा, "कुछ साल पहले तक हमारे सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि बच्चों को सरकारी स्कूल की दहलीज तक कैसे लाया जाए. और आज चुनौती यह है कि हम उन हजारों बच्चों को इस स्कूल में कैसे समाहित करें जो यहां पढ़ना चाहते हैं. यह बदलाव अपने आप में पूरी कहानी बयां कर देता है.

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