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अमेरिका में बसी है 300 साल पुरानी दुनिया! न टीवी, न स्मार्टफोन, न बिजली... फिर भी खुशहाल हैं लोग

दुनिया जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सोशल मीडिया और स्मार्टफोन के दौर में जी रही है, वहीं अमेरिका में एक ऐसी कम्युनिटी भी है जो आज भी 300 साल पुराने तरीके से जीवन बिताती है. यहां न सरकारी बिजली है, न टीवी और न ही स्मार्टफोन का इस्तेमाल. आखिर क्यों लोग खुद को आधुनिक दुनिया से दूर रखते हैं?

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इस गांव में कोई मोबाइल फोन का इस्तेमाल नहीं करता (Photo:Insta/chillout_1588_usa)
इस गांव में कोई मोबाइल फोन का इस्तेमाल नहीं करता (Photo:Insta/chillout_1588_usa)

जब भी अमेरिका का नाम आता है तो दिमाग में गगनचुंबी इमारतें, हाईटेक शहर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इलेक्ट्रिक कारें और दुनिया की सबसे आधुनिक तकनीक की तस्वीर उभरती है. लेकिन इसी अमेरिका में एक ऐसी दुनिया भी बसती है, जहां समय मानो 300 साल पहले ही ठहर गया हो.

यह जगह है पेंसिल्वेनिया के लैंकेस्टर काउंटी का एमिश कंट्री, जहां रहने वाले एमिश समुदाय के लोग आज भी आधुनिक सुविधाओं से दूरी बनाकर सादगी भरा जीवन जीते हैं. यही वजह है कि यह जगह सोशल मीडिया पर अक्सर चर्चा का विषय बनी रहती है और लाखों पर्यटक यहां की अनोखी जीवनशैली देखने पहुंचते हैं.

यहां न टीवी चलता है, न स्मार्टफोन

एमिश समुदाय के अधिकांश परिवार अपने घरों में टीवी, स्मार्टफोन और सोशल मीडिया का इस्तेमाल नहीं करते. कई घरों में सरकारी बिजली का कनेक्शन भी नहीं होता.

उनका मानना है कि आधुनिक तकनीक इंसान को परिवार और समाज से दूर कर देती है. इसलिए वे केवल उन्हीं साधनों को अपनाते हैं, जो परिवार और समुदाय को मजबूत करें, न कि लोगों के बीच दूरी पैदा करें.

घोड़े-बग्गी से सफर, खेतों में मेहनत और सादा जीवन

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एमिश कंट्री की सड़कों पर आज भी घोड़े-बग्गियां आम बात हैं. पुरुष लंबी दाढ़ी और साधारण कपड़े पहनते हैं, जबकि महिलाएं लंबी स्कर्ट और बोनट पहनती हैं.एमिश समुदाय पर समर्पित वेबसाइट 'Amish America' की रिपोर्ट के मुताबिक,खेतों में ट्रैक्टर की जगह कई परिवार आज भी घोड़ों की मदद से खेती करते हैं. खाना लकड़ी के चूल्हे पर बनता है और रात में कई घरों में रोशनी के लिए गैस लैंप या सीमित बैटरी का इस्तेमाल किया जाता है.

देखें ये वायरल वीडियो जो इस गांव के बारे में बता रहा है

बच्चों के हाथ में मोबाइल नहीं, खेती और हुनर

आज जहां छोटे बच्चे भी घंटों मोबाइल स्क्रीन पर समय बिताते हैं, वहीं एमिश समुदाय के बच्चे खुली हवा में खेलते हैं, परिवार के साथ खेती करते हैं और बढ़ईगीरी, सिलाई तथा दूसरे पारंपरिक हुनर सीखते हैं.यहां पढ़ाई आमतौर पर आठवीं कक्षा तक होती है. इसके बाद बच्चों को जीवन से जुड़े व्यावहारिक कौशल सिखाए जाते हैं.

एक-दूसरे के लिए जीता है पूरा गांव

एमिश समुदाय की सबसे बड़ी पहचान उनकी एकजुटता है.अगर किसी परिवार का घर या खलिहान बनाना हो, तो पूरा गांव मिलकर काम करता है. इस परंपरा को बार्न रेजिंग कहा जाता है. कई बार एक ही दिन में पूरा खलिहान तैयार हो जाता है.आज के दौर में जहां पड़ोसी एक-दूसरे को मुश्किल से जानते हैं, वहीं यहां पूरा समुदाय एक परिवार की तरह रहता है.

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300 साल पहले यूरोप से अमेरिका पहुंचे थे एमिश
एमिश समुदाय पर समर्पित वेबसाइट 'Amish America' की रिपोर्ट के मुताबिक,एमिश समुदाय की शुरुआत 17वीं और 18वीं सदी में स्विट्जरलैंड और जर्मनी से हुई थी. धार्मिक स्वतंत्रता की तलाश में वे अमेरिका आकर बस गए.आज अमेरिका में एमिश समुदाय की आबादी 3 लाख से ज्यादा मानी जाती है. सबसे बड़ी आबादी पेंसिल्वेनिया, ओहायो और इंडियाना राज्यों में रहती है. लैंकेस्टर काउंटी दुनिया के सबसे बड़े एमिश इलाकों में से एक है.

क्या एमिश लोग पूरी तरह टेक्नोलॉजी से दूर हैं?

ऐसा बिल्कुल नहीं है.अगर किसी तकनीक से उनके परिवार, खेती या कारोबार को फायदा होता है और उससे सामुदायिक जीवन प्रभावित नहीं होता, तो कुछ मामलों में वे उसका सीमित इस्तेमाल करते हैं. हालांकि निजी जीवन में वे आज भी सादगी और आत्मनिर्भरता को सबसे ज्यादा महत्व देते हैं.

दुनियाभर से लोग क्यों पहुंचते हैं एमिश कंट्री?

हर साल लाखों पर्यटक एमिश कंट्री घूमने आते हैं. यहां लोग घोड़े-बग्गी की सवारी करते हैं, पारंपरिक फार्म देखते हैं, स्थानीय बाजारों से हाथ से बने फर्नीचर और रजाइयां खरीदते हैं और घर में बने ब्रेड, पाई, जैम और दूसरे पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद लेते हैं.यही वजह है कि यह इलाका अमेरिका के सबसे अनोखे पर्यटन स्थलों में भी गिना जाता है.

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क्या सचमुच खुश रहने के लिए स्मार्टफोन जरूरी है?

एमिश समुदाय की जीवनशैली हर किसी के लिए आसान नहीं हो सकती. यहां न 24 घंटे इंटरनेट है, न सोशल मीडिया और न ही आधुनिक सुविधाओं की भरमार.लेकिन उनकी जिंदगी एक सवाल जरूर छोड़ जाती है-क्या खुशी सिर्फ नई तकनीक और लग्जरी लाइफस्टाइल में छिपी है, या फिर परिवार, रिश्तों, प्रकृति और सादगी में भी उतना ही सुकून मिल सकता है?

शायद यही सवाल इस छोटी-सी कम्युनिटी को पूरी दुनिया के लिए खास बना देता है. इसलिए अमेरिका की यह अनोखी दुनिया आज भी लोगों को अपनी ओर खींचती है और सोशल मीडिया पर बार-बार चर्चा का विषय बन जाती है.

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