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25 साल तक नहीं पकड़ में आई बीमारी, AI चैट ने जोड़ा सुराग और खुल गया राज

25 साल तक कई डॉक्टर, कई टेस्ट और ढेरों इलाज के बावजूद एक शख्स के चाचा की परेशानी की असली वजह सामने नहीं आ सकी. लेकिन जब परिवार ने सारे लक्षण, रिपोर्ट और मेडिकल हिस्ट्री को एक साथ AI चैट में रखा, तो एक ऐसा सुराग मिला जिसने कहानी बदल दी. सोते समय होने वाले सिरदर्द से शुरू हुई यह खोज आखिरकार स्लीप एपनिया तक पहुंची और इलाज के बाद सालों पुरानी तकलीफ खत्म हो गई.

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AI ने पुराना मर्ज पकड़ा (सांकेतिक तस्वीर-Pexel)
AI ने पुराना मर्ज पकड़ा (सांकेतिक तस्वीर-Pexel)

सोशल मीडिया पर एक दिलचस्प मेडिकल स्टोरी तेजी से चर्चा में है, जिसमें एक परिवार ने दावा किया कि AI के साथ हुई एक बातचीत ने 25 साल पुरानी अनसुलझी मेडिकल समस्या की असली वजह तक पहुंचने में मदद की. यह पोस्ट रेडिट के r/ClaudeAI कम्युनिटी में शेयर की गई.

पोस्ट लिखने वाले शख्स ने बताया कि उनके 62 साल के चाचा, जो भारत में रहते हैं, लंबे समय से कई स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे. उन्हें किडनी फेल्योर है और हफ्ते में तीन बार डायलिसिस करानी पड़ती है. इसके अलावा डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और कुछ साल पहले स्ट्रोक भी हो चुका है.

इन सबके बीच एक लक्षण सबसे ज्यादा परेशान करने वाला था- लेटकर सोते ही तेज सिरदर्द शुरू हो जाना. परिवार ने इसके लिए न्यूरोलॉजिस्ट और नेफ्रोलॉजिस्ट समेत कई विशेषज्ञों से सलाह ली. MRI और ब्लड टेस्ट भी हुए, लेकिन इस खास समस्या की वजह साफ नहीं हो सकी.

इसके बाद परिवार के सदस्य ने कई साल की मेडिकल डिटेल्स, रिपोर्ट और लक्षणों को एक साथ AI मॉडल Claude में डालकर समझने की कोशिश की. पोस्ट के मुताबिक, AI ने सबसे पहले इस बात पर ध्यान दिया कि सिरदर्द सिर्फ लेटने की स्थिति में होता है. इसी शरीर की स्थिति से जुड़ा पैटर्न ने आगे का रास्ता खोला.

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इसके बाद AI ने डायलिसिस मरीजों में स्लीप एपनिया के अनडायग्नोज्ड रहने की संभावना से जुड़ी रिसर्च का जिक्र किया और MRI रिपोर्ट के कुछ संकेतों को भी दोबारा देखने की सलाह दी.

देखें पोस्ट

 

फिर एक अहम सवाल सामने आया- क्या मरीज को लंबे समय से खर्राटे आते हैं? परिवार ने बताया कि पिछले 25 साल से तेज खर्राटे और दिन में बार-बार नींद आना उनकी आदत का हिस्सा था.

यहीं से कहानी ने नया मोड़ लिया. परिवार ने स्लीप स्टडी कराई, जिसमें स्लीप एपनिया की पुष्टि हुई. इसके बाद CPAP मशीन शुरू की गई और पोस्ट के अनुसार सोते समय होने वाला सिरदर्द खत्म हो गया.

सोशल मीडिया पर इस कहानी को लोग सिर्फ AI की भूमिका से नहीं, बल्कि उन लक्षणों के नजरअंदाज हो जाने की मिसाल के तौर पर भी देख रहे हैं, जो सालों से सामने थे लेकिन सामान्य आदत समझे जाते रहे. कई यूजर्स ने लिखा कि यह मामला दिखाता है कि अलग-अलग मेडिकल संकेतों को एक साथ देखने से कभी-कभी बड़ी तस्वीर साफ हो जाती है.

बता दें, AI ने डॉक्टरों की जगह नहीं ली, बल्कि अलग-अलग मेडिकल जानकारी को जोड़ने में मदद की. एक्सपर्ट्स भी मानते हैं कि AI हेल्थकेयर में एक उपयोगी टूल बन सकता है, लेकिन यह मुख्य रूप से जानकारी समझने और पैटर्न पहचानने तक सीमित है. अंतिम बीमारी की पुष्टि और इलाज का फैसला डॉक्टर ही बेहतर तरीके से समझते हैं.

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 (नोट:  यह एक व्यक्तिगत अनुभव है. AI मेडिकल सलाह का विकल्प नहीं है. हमेशा डॉक्टर से कन्फर्म करें.ये खबर सोशल मीडिया पर वायरल पोस्ट के आधार पर बनाई गई है. aajtak.in पोस्ट में किए गए दावों की पुष्टि नहीं करता है.) 
 

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