रूस की एक अदालत में हिंदुओं के पवित्र ग्रंथ भगवद् गीता पर प्रतिबंध लगाने की मांग करने वाली याचिका खारिज हो जाने के बाद हिंदू समुदाय तामस्क शहर के सरकारी अभियोजकों द्वारा अदालत के फैसले को चुनौती देने के किसी भी पहल का जवाब देने के लिए तैयार है. हिंदुओं ने अदालत में मिली इस जीत की खुशी का भी इजहार किया है.
गीता को प्रतिबंधित करने की मांग करने वाली तामस्क शहर के सरकारी अभियोजकों की याचिका लेनिन्सकी जिला अदालत के संघीय न्यायाधीश जी.ई. बुतेनके द्वारा खारिज किए जाने पर रूस में हिंदू समुदाय, भगवान कृष्ण के अनुयायियों और भारत में इस्कॉन के सदस्यों ने उत्सव मनाकर अपनी खुशी का इजहार किया और फैसले पर अपनी प्रसन्ना जाहिर करने के लिए प्रार्थनाएं आयोजित कीं.
इस्कान के सदस्य साधु प्रिया दास ने बताया कि हम तामस्क शहर अदालत के फैसले से काफी खुश हैं. अदालत को अपना धन्यवाद देने और अपनी खुशी का इजहार करने के लिए रूस में हिंदू और इस्कॉन के अनुयायी मास्को स्थित कृष्ण मंदिर में एकत्र हुए. उन्होंने इस जीत पर उत्सव मनाया और प्राथनाएं कीं.
दिल्ली में इस्कॉन समिति के उपाध्यक्ष व्रजेन्द्र नंदन दास के मुताबिक भारत में भी कृष्ण के श्रद्धालु इस्कॉन केंद्रों और मंदिरों पर पहुंचे और पूजा-अर्चना की. नंदन दास ने बताया कि रूस की एक अदालत में मिली जीत के उपलक्ष्य में हम अगले दो दिनों में भगवद् गीता के वितरण की योजना बना रहे हैं.
इस बीच, रूस का हिंदू समुदाय अदालत के फैसले को सरकारी अभियोजकों द्वारा चुनौती दिए जाने को लेकर सजग है. सरकारी अभियोजक अदालत के इस फैसले को रूस के सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दे सकते हैं.
दास ने कहा कि सरकारी अभियोजकों के पास तामस्क शहर अदालत के फैसले को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देने का अधिकार है लेकिन हमें यह जानना होगा कि क्या वे 10 दिनों की छुट्टी के बाद अगले वर्ष में अपील करेंगे. हमें भी छुट्टियों के बाद ही तामस्क अदालत के फैसले की प्रति मिलेगी. उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकारी अभियोजक फैसले को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती नहीं देंगे.