घड़ी की सुइयों ने जैसे ही रात के 12 पर एक-दूसरे को गले लगाया, पूरी दुनिया मानो रोशनी के एक समंदर में नहा गई. 2025 अब हमारी यादों की डायरी का एक हिस्सा बन चुका है और हमारे सामने खड़ा है नई उम्मीदों, नए सपनों और नई संभावनाओं से भरा साल 2026. सिडनी के ओपेरा हाउस से लेकर न्यूयॉर्क के टाइम्स स्क्वायर तक, हर तरफ बस एक ही शोर था 'हैप्पी न्यू ईयर. इस शोर के बीच आतिशबाजी के रंगों ने आसमान में ऐसी पेंटिंग बनाई कि देखने वाले बस देखते ही रह गए.
भारत की बात करें तो यहां का नजारा तो कुछ अलग ही लेवल पर था. दिल्ली की कड़कड़ाती ठंड हो या मुंबई की मखमली रात, हर शहर जश्न के रंग में सराबोर दिखा. लोग सड़कों पर उतर आए, कहीं ढोल की थाप थी तो कहीं डीजे का शोर, लेकिन सबके दिल में एक ही दुआ थी कि यह साल हर किसी की झोली खुशियों से भर दे. चलिए, आपको सैर कराते हैं दुनिया भर के उन कोनों की, जहां 2026 का इस्तकबाल किसी शाही दावत से कम नहीं था.
देश के दिल दिल्ली से लेकर कश्मीर की वादियों तक
भारत में नए साल का स्वागत किसी त्योहार से कम नहीं रहा. देश की राजधानी दिल्ली की बात करें तो यहां इंडिया गेट और कनॉट प्लेस (CP) पर इतनी भीड़ उमड़ी कि पैर रखने की जगह नहीं थी. लोग कड़कड़ाती ठंड की परवाह किए बिना आधी रात के बाद तक नाचते-गाते रहे. हालांकि, दिल्ली पुलिस भी पूरी तरह मुस्तैद थी, करीब 20,000 जवानों ने मोर्चा संभाल रखा था ताकि हुड़दंगियों पर लगाम कसी जा सके और आप सुरक्षित तरीके से पार्टी कर सकें. यही वजह रही कि जश्न के बीच सुरक्षा का भी पूरा ख्याल रखा गया.
वहीं, अगर हम दक्षिण भारत की ओर रुख करें, तो बेंगलुरु के एमजी रोड और ब्रिगेड रोड पर रौनक देखते ही बनती थी. रोशनी से जगमगाती सड़कें और हवा में तैरती आतिशबाजी ने माहौल को जादुई बना दिया था. इतना ही नहीं, कश्मीर की वादियों में तो नजारा ही जन्नत जैसा था. गुलमर्ग और सोनमर्ग की सफेद बर्फ के बीच सैलानियों ने अलाव जलाकर 2026 का स्वागत किया. ताजी बर्फबारी ने मानों नए साल को एक सफेद खूबसूरत तोहफा दिया हो, जिसे देखकर हर कोई मंत्रमुग्ध हो गया.
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दुनिया के हर कोने ने बारी-बारी से कहा 'हेलो 2026'
क्या आपको पता है कि दुनिया में सबसे पहले नया साल कहां आता है? प्रशांत महासागर का छोटा सा देश किरिबाती वह पहली जगह बना, जहां 2026 ने सबसे पहले कदम रखा. यहां के लोगों ने अपनी पारंपरिक संस्कृति के साथ साल का आगाज किया. इसके बाद, बारी आई न्यूजीलैंड की, जहां ऑकलैंड के स्काई टॉवर से ऐसी आतिशबाजी हुई कि बारिश के बावजूद लोगों का जोश ठंडा नहीं पड़ा. ऑकलैंड में तो न्यूयॉर्क से 18 घंटे पहले ही पटाखे फूटने शुरू हो गए थे, जो कि अपने आप में एक अनोखा रिकॉर्ड है.
वहीं, न्यूयॉर्क के टाइम्स स्क्वायर का तो क्या ही कहना, यहां का मशहूर बॉल ड्रॉप इवेंट देखने के लिए लाखों लोग हाड़ कंपा देने वाली ठंड में भी घंटों खड़े रहे. 5,000 क्रिस्टल से सजी वह चमकती गेंद जैसे ही नीचे आई, लोगों ने एक-दूसरे को गले लगाकर नए साल की बधाई दी. मजे की बात तो यह है कि इस बार यह गेंद लाल, सफेद और नीले रंग में चमक रही थी, जो अमेरिका की 250वीं वर्षगांठ का संकेत दे रही थी. जश्न के उस माहौल में जब जॉन लेनन का सदाबहार गाना 'इमेजिन' गूंजा, तो उसने जैसे पूरे मंजर पर जादू कर दिया और एक अलग ही समां बांध दिया.
कहीं शोर था तो कहीं सुकून का पैगाम
ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में नया साल मनाना हमेशा से खास होता है, लेकिन इस बार यहां सुरक्षा के इंतजाम काफी कड़े थे. कुछ समय पहले हुई एक दुखद गोलीबारी की घटना के साये के बावजूद, लोगों ने हिम्मत नहीं हारी. सिडनी हार्बर ब्रिज पर जब आतिशबाजी शुरू हुई, तो पूरा समुद्र का पानी रंगों से भर गया. हालांकि, इस जश्न में उन लोगों को भी याद किया गया जिन्होंने अपनी जान गंवाई थी और उनके सम्मान में एक मिनट का मौन रखा गया. यह दिखाता है कि इंसानियत हर मुश्किल से बड़ी है.
इसके साथ ही, एशिया के बाकी हिस्सों में भी 2026 का स्वागत बड़े ही शानदार ढंग से हुआ. जापान में जहां मंदिरों की घंटियां बजाकर शांति की दुआ मांगी गई, वहीं दुबई के बुर्ज खलीफा ने एक बार फिर साबित कर दिया कि वह दुनिया का सबसे बड़ा 'शो-स्टॉपर' है. बुर्ज खलीफा से निकलते पटाखों और लेजर लाइट के शो ने रेगिस्तान की रात को रोशनी का सैलाब बना दिया. दिलचस्प बात यह है कि चीन में लोग अभी से 'ईयर ऑफ द हॉर्स' की तैयारी में जुट गए हैं, जो फरवरी में शुरू होगा, लेकिन 2026 की पहली सुबह का स्वागत वहां भी ढोल-नगाड़ों के साथ किया गया.
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यूरोप की बर्फीली रातें और गाजा की उम्मीदें: दर्द के बीच मुस्कुराने की कोशिश
बात अगर यूरोप की करें, तो यहां के देशों ने साल 2026 को गले लगाने और उसका इस्तकबाल करने में कोई कसर नहीं छोड़ी. ब्रिटेन की धड़कन कहे जाने वाले लंदन शहर में जैसे ही 'बिग बेन' की ऐतिहासिक घड़ी ने आधी रात का ऐलान किया, पूरा शहर उत्साह से पागल हो उठा. टेम्स नदी के शांत किनारे देखते ही देखते रोशनी और धमाकों से गूंज उठे, जहां नावों से छोड़ी गई भव्य आतिशबाजी ने लंदन आई के ऊपर आसमान में रंगों का एक जादुई छत्ता बना दिया था. इस नजारे ने न सिर्फ लंदन बल्कि पूरे ब्रिटेन को रात भर जगाए रखा. इतना ही नहीं, प्यार के शहर पेरिस और ऐतिहासिक बर्लिन में भी नजारा किसी फिल्मी सीन जैसा था. कड़कड़ाती ठंड और गिरती हुई सफेद बर्फबारी के बीच, हजारों लोग सड़कों पर उतर आए और शैंपेन की बोतलें खोलकर एक-दूसरे को नए साल की बधाइयां दीं. बर्फ की चादर पर गिरती रोशनी और लोगों का नाच-गाना यह बता रहा था कि यूरोप में साल 2026 का आगाज बेहद शाही अंदाज में हुआ है.
लेकिन, चकाचौंध से भरी इस दुनिया के एक कोने में एक ऐसा मंजर भी था जहां जश्न का शोर नहीं, बल्कि उम्मीदों की खामोश गूंज थी. हम बात कर रहे हैं गाजा पट्टी की, जहां युद्ध की मार झेल रहे विस्थापित फिलिस्तीनियों के लिए नया साल महज एक तारीख नहीं, बल्कि जिंदगी की एक नई भीख जैसा है. जहां दुनिया आतिशबाजी के धमाकों पर तालियां बजा रही थी.
वहीं गाजा के इन बेघर लोगों ने फटे हुए तंबुओं के नीचे बैठकर, ठिठुरती रात में सिर्फ एक ही दुआ मांगी'अमन और शांति'. उनके लिए खुशियों का मतलब पार्टी करना नहीं, बल्कि अपने घरों को लौटना और अपनों को सुरक्षित देखना है. यही वजह है कि एक तरफ जहां दुनिया भविष्य के सुनहरे सपने बुन रही थी, वहीं गाजा की आंखों में सिर्फ शांति का एक छोटा सा सपना था. खुशियों और दर्द का यह मेल हमें याद दिलाता है कि 2026 जहां किसी के लिए नई पार्टी है, वहीं किसी के लिए यह सिर्फ जिंदा रहने की एक नई उम्मीद है.