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भागदौड़ से लीजिए 'ब्रेक', सर्दियों में उदयपुर का सफर छुट्टियों को बना देगा यादगार

अगर आप रोजमर्रा की भागदौड़, ऑफिस के दबाव और शहर की तेज रफ्तार से थक चुके हैं, तो राजस्थान का यह शहर आपको रुकना सिखाता है. यहां घूमना सिर्फ जगहें देखने तक सीमित नहीं रहता, बल्कि हर सुबह, हर शाम और हर ठहरी हुई सांस के साथ जिंदगी को महसूस करने का मौका देता है.

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सर्दियों में घूमने के लिए बेस्ट है उदयपुर (Photo-ITG)
सर्दियों में घूमने के लिए बेस्ट है उदयपुर (Photo-ITG)

अगर आप अपनी रोजमर्रा की व्यस्त जिंदगी, दफ्तर की फाइलों और शहर के शोर-शराबे से थक चुके हैं, तो अब वक्त है एक ऐसी जगह ठहर जाने का जहां वक्त खुद अपनी रफ्तार धीमी कर लेता है. राजस्थान की झीलों की नगरी उदयपुर में सर्दियों का आना किसी मौसम के बदलाव जैसा नहीं, बल्कि एक खामोश एहसास की तरह होता है.

यह मौसम यहां बिना किसी जल्दबाजी के चुपके से आता है और पर्यटकों को मजबूर कर देता है कि वे रुकें और जिंदगी को एक नए नजरिए से देखना शुरू करें. सर्दियों के मौसम में राजस्थान के इस खूबसूरत शहर उदयपुर की हवाएं और इसकी गलियां आपको अपना एक खूबसूरत एहसास दिलाती हैं.

सर्दियों के दस्तक देते ही उदयपुर की सुबह किसी जादुई मंजर में तब्दील हो जाती है. जब सूरज की पहली किरणें पुरानी पत्थर की दीवारों पर पड़ती हैं, तो यहां की आसपास की तंग गलियां और ऐतिहासिक इलाके एक अलग ही शांति में डूबे नजर आते हैं. यह समय बिना किसी पूर्व योजना के बस निकल पड़ने का है, जहां पिछोला, फतेह सागर और स्वरूप सागर झीलों के किनारे पानी की सतह पर शहर का प्रतिबिंब इतना साफ और गहरा होता है कि सैलानी उसे घंटों निहारते रह जाते हैं.

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खास बात यह है कि इस मौसम में महलों और हवेलियों के गलियारे अपनी भव्यता के बजाय अपनी बारीक नक्काशी के जरिए इतिहास की कहानियां बयां करते हैं, जो शांति का एक अनूठा अनुभव प्रदान करता है.इसी जुड़ाव को आगे बढ़ाता है यहां का पारंपरिक खान-पान. उदयपुर की सर्दियों का असली मजा यहां के स्वादों में छिपा है, जहां ठंडी हवाओं के बीच राजस्थानी रसोई की खुशबू सैलानियों को अपनी ओर खींच लेती है.

लाल मांस की गहराई, गट्टे की सब्जी का तीखापन और केर सांगरी का सधा हुआ स्वाद इस मौसम में एक अलग ही सुकून देता है. बाजरे की रोटी और धीमी आंच पर पकाई गई कढ़ी न केवल शरीर में गर्माहट भरती है, बल्कि स्थानीय संस्कृति से गहरा जुड़ाव भी महसूस कराती है. वहीं, यहां का स्ट्रीट फूड अपने आप में एक उत्सव है, जहां सड़क किनारे बैठकर कुरकुरी कचौरी और मिर्ची वड़ा के साथ मसालेदार चाय का आनंद लेना एक यादगार अनुभव बन जाता है.

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स्लो ट्रैवल का नया ट्रेंड

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शाम ढलते ही उदयपुर की सामाजिक दिनचर्या पूरी तरह बदल जाती है और यहीं से स्लो ट्रैवल के उस नए ट्रेंड का असली एहसास शुरू होता है, जो आज की भागदौड़ भरी जिंदगी के बीच सुकून की तलाश कर रहे मुसाफिरों की पहली पसंद बन गया है. जैसे-जैसे दिन की रोशनी कम होती है, शहर के ऐतिहासिक आंगन और छतें गर्म पीली रोशनी से जगमगा उठती हैं, जहां शामें किसी दिन के अंत की तरह नहीं, बल्कि अंतहीन और गहरी बातचीत की एक नई शुरुआत की तरह आती हैं.

सर्दियों के इस खुशनुमा माहौल में दोस्तों के साथ छतों पर घंटों बैठकर वक्त गुजारना और बिना किसी पूर्व योजना या टाइम-टेबल के रातों को यादगार बनाना अब उदयपुर की एक खास पहचान बन चुका है. आधुनिक यात्रा के इस दौर में, जहां हर कोई जल्दी में होता है, यह शहर धीमी गति से चलने और पल-पल को महसूस करने का एक दुर्लभ अवसर पेश करता है.

यही वजह है कि उदयपुर सैलानियों के लिए केवल उन मशहूर जगहों की चेकलिस्ट पूरी करने वाला गंतव्य नहीं रह गया है जिन्हें देख कर आगे बढ़ जाना हो, बल्कि यह अपनी एक ऐसी शांत लय में रम जाने का केंद्र बन गया है, जहां मोमबत्ती की मद्धम रोशनी से जगमगाते आंगनों में बिताया हर एक पल आपको असली विलासिता और सुकून का एहसास कराता है.

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