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विदेशी टूर पैकेज से हटा टैक्स का बोझ, अब कम बजट में करें दुनिया की सैर

अब विदेश जाना हुआ सस्ता, टूर पैकेज से लेकर पढ़ाई तक सरकार ने दी टैक्स में बड़ी ढील वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026 में विदेश यात्रा करने वालों और विदेश में पढ़ रहे छात्रों के परिवारों को बड़ी राहत दी है.

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विदेश यात्रा होगी सस्ती (Photo-ITG)
विदेश यात्रा होगी सस्ती (Photo-ITG)

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026 में अंतरराष्ट्रीय यात्रा, विदेशी शिक्षा और चिकित्सा खर्च पर लगने वाले टैक्स ढांचे में बड़े बदलावों की घोषणा की है. सरकार ने विदेशी टूर पैकेज और विदेश पैसा भेजने पर लगने वाले टीसीएस (TCS) की दरों को घटाकर यात्रियों और छात्रों के परिवारों को बड़ी राहत दी है. इन संशोधनों का मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय लेन-देन पर लगने वाले अतिरिक्त वित्तीय बोझ को कम करना और टैक्स नियमों में स्पष्टता लाना है.

सरकार ने विदेशी टूर पैकेज की बुकिंग पर लगने वाले टीसीएस (TCS) नियमों को सरल कर दिया है. अब अंतरराष्ट्रीय ट्रिप के लिए पैकेज बुक करने पर मात्र 2% टीसीएस देना होगा, जबकि इससे पहले यह दर 5% और कुछ मामलों में 20% तक थी. इसके अलावा, अब टीसीएस लागू होने के लिए किसी न्यूनतम राशि की कोई शर्त नहीं रहेगी. इस फैसले से उन सभी नागरिकों को लाभ होगा जो विदेशी छुट्टियों या अंतरराष्ट्रीय यात्रा के लिए ट्रैवल एजेंसियों के माध्यम से बुकिंग करते हैं.

विदेश में शिक्षा और इलाज पर टैक्स का बोझ कम

विदेश में पढ़ाई कर रहे छात्रों और इलाज करा रहे लोगों के लिए लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (LRS) के तहत पैसा भेजना अब सस्ता हो गया है. सरकार ने एलआरएस के माध्यम से विदेशी प्रेषण पर टीसीएस की दर को 5% से घटाकर 2% करने का प्रस्ताव रखा है. इस कटौती से उन अभिभावकों और परिवारों पर टैक्स का बोझ कम होगा जो ट्यूशन फीस या मेडिकल बिलों के भुगतान के लिए नियमित रूप से विदेश पैसा भेजते हैं. इससे विदेशी बैंक ट्रांजैक्शन की लागत कम होगी और लेनदेन की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी.

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इन बदलावों के लागू होने से अंतरराष्ट्रीय यात्रा अब कम खर्चीली होगी और पर्यटन क्षेत्र को बढ़ावा मिलेगा. शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में विदेशी खर्च पर टैक्स कम होने से मध्यम वर्ग के परिवारों को अपनी वित्तीय योजना बनाने में आसानी होगी. साथ ही, कॉन्ट्रैक्टर भुगतान के नए टीडीएस नियमों से छोटे व्यवसायों के लिए नियमों का अनुपालन सरल होगा और विवादों में कमी आएगी. सरकार के इन कदमों से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नागरिकों और व्यापारियों के लिए लेनदेन की कुल लागत में कमी आना तय है.

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