
Kedarnath Hidden Places: चारधाम यात्रा को लेकर इन दिनों श्रद्धालुओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है. देशभर से लोग लगातार देवभूमि उत्तराखंड पहुंच रहे हैं, जिसके चलते चारों धामों में भारी भीड़ उमड़ रही है. हर दिन दर्शन करने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है, और इस लिस्ट में सबसे आगे है केदारनाथ धाम. यही वजह है कि ज्यादातर लोग अपनी यात्रा सिर्फ एक ही मकसद से प्लान करते हैं- किसी तरह केदारनाथ मंदिर तक पहुंचना, दर्शन करना और फिर वापस लौट आना.
लेकिन सच कहें तो केदार घाटी सिर्फ मंदिर तक सीमित नहीं है, यहां एक्सप्लोर करने के लिए कईं ओर भी जगह हैं. मंदिर के आसपास ही कुछ किलोमीटर की दूरी पर सुंदर झीलें हैं, जो करीब 3,900 मीटर की ऊंचाई पर है. झील के अलावा एक ऐसा व्यू पॉइंट भी है, जहां से पूरी घाटी का शानदार नजारा देखने को मिलता है. कुछ पुरानी ध्यान करने के लिए गुफाएं भी हैं, जहां साधु-संत साधना करते थे. अगर आप भी इस वक्त केदारनाथ धाम जाने की सोच रहे हैं तो इन जगहों पर एक्सप्लोर करना ना भूलें.
भैरवनाथ मंदिर
सबसे पहली जगह है भैरवनाथ मंदिर. यह केदारनाथ से 1 किमी. की दूरी पर स्थित है, जहां से आपको पूरी केदार घाटी का शानदार व्यू देखने को मिलेगा. यह मंदिर भगवान भैरव को समर्पित है, जिन्हें भगवान शिव का उग्र रूप माना जाता है. मान्यता है कि भैरवनाथ ही केदारनाथ मंदिर की बुरी शक्तियों से रक्षा करते हैं. यह जगह आस्था के साथ साथ घूमने के लिए भी बहुत बढ़िया है. केदारनाथ मंदिर की भीड़-भाड़ से दूर यहां आपको सुकूनभरा अनुभव मिलेगा. सबसे अच्छी बात यह है कि यहां तक पहुंचने के लिए सिर्फ एक छोटा सा ट्रेक है.
जाने का सही समय- भैरवनाथ मंदिर जाने का सबसे सही समय मई से जून और सितंबर से अक्टूबर के बीच है.

वासुकी ताल, हिडन झील
वासुकी ताल, केदारनाथ से करीब 8 किमी. दूर है. जो लगभग 4,135 से 4,150 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है, जिसे हाई एल्टीट्यूड झील भी कहा जाता है. यहां तक पहुंचने का रास्ता आसान नहीं है क्योंकि इसका ट्रेक काफी खतरनाक है. लेकिन ऊपर पहुंचने के बाद बहुत ही सुंदर नजारा देखने को मिलता है. वासुकी ताल पहुंचने के बाद वहां से चौखंबा की ऊंची-ऊंची चोटियों का सुंदर नजारा दिखता है, जो गढ़वाल हिमालय के सबसे खूबसूरत नजारों में गिना जाता है. इस जगह पर जाने के लिए टूर गाइड जरूर लेकर जाएं क्योंकि यहां का मौसम कभी भी बिगड़ जाता है.
पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक, भगवान शिव के गले में लिपटे नाग का नाम वासुकी है. मान्यता है कि यह झील भगवान विष्णु को भी समर्पित है. केदारनाथ के मुकाबले यहां बहुत कम लोग आते हैं क्योंकि यह काफी ऊंचाई पर है.
जाने का सही समय- जून से अक्टूबर की शुरुआत तक (इसके बाद रास्ता बंद हो जाता है)
चोराबारी ताल
चोराबारी ताल को चोराबाड़ी झील और गांधी सरोवर के नाम से भी जाना जाता है. यह झील केदारनाथ धाम से लगभग 3 किमी. दूर है. यह ताल समुद्र तल से करीब 3,900 मीटर की ऊंचाई पर चोराबाड़ी ग्लेशियर के मुहाने पर स्थित है. मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण की अस्थियों का विसर्जन यहीं किया गया था. चारों तरफ ऊंचे-ऊंचे पहाड़ों से घिरी यह झील बेहद शांत माहौल देती है. इसकी लोकेशन थोड़ी अलग होने की वजह से कई यात्री यहां तक पहुंच ही नहीं पाते हैं. लेकिन अगर आप सही प्लानिंग करें, तो इसे अपनी केदारनाथ यात्रा में आसानी से शामिल कर सकते हैं.
जाने का सही समय- मई से जून और सितंबर से अक्टूबर के बीच का होता है. इन महीनों के दौरान मौसम सुहावना और ट्रेकिंग के लिए सुरक्षित होता है.

त्रियुगीनारायण मंदिर
केदारनाथ के पास एक ओर जगह है, जिसका नाम त्रियुगीनारायण मंदिर है. यह मंदिर केदारनाथ धाम से करीब 25 किमी. दूर है. इस मंदिर का महत्व इसलिए भी बहुत ज्यादा है क्योंकि मान्यता है कि यहीं भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था, जिसमें भगवान विष्णु और ब्रह्मा भी मौजूद थे. यह मंदिर चारों तरफ से हरे-भरे जंगलों से घिरा हुआ है. यहां तक पहुंचने का ट्रेक सिंपल है, जिसमें आपको थोड़ा एडवेंचर भी मिलेगा.
जाने का सही समय- त्रियुगीनारायण मंदिर (उत्तराखंड) जाने का सबसे अच्छा समय अप्रैल से जून और सितंबर से नवंबर के बीच का है. इस दौरान मौसम सुहावना रहता है और यात्रा मार्ग पूरी तरह खुले रहते हैं.
गौरीकुंड
गौरीकुंड को लोग आमतौर पर केदारनाथ ट्रेक की शुरुआत मानते हैं, लेकिन यह जगह अपने आप में भी बहुत खास और पवित्र है. करीब 1,982 मीटर की ऊंचाई पर स्थित गौरीकुंड वही स्थान है, जहां मंदाकिनी और सोन गंगा का संगम होता है. मान्यता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए यहीं कई वर्षों तक कठोर तपस्या की थी. यहां एक प्राकृतिक गर्म पानी का झरना भी है. केदारनाथ की यात्रा शुरू करने से पहले श्रद्धालु इस कुंड में आस्था की डुबकी लगाते हैं.
जाने का सही समय- गौरीकुंड जाने के लिए सबसे अच्छा समय मई से जून और सितंबर से अक्टूबर तक का है.
गुप्तकाशी
गुप्तकाशी उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में मंदाकिनी नदी घाटी में स्थित एक प्रमुख और ऐतिहासिक तीर्थस्थल है. समुद्र तल से 1,319 मीटर की ऊंचाई पर बसा यह शहर, प्रसिद्ध केदारनाथ धाम यात्रा का एक प्रमुख पड़ाव है.
गुप्तकाशी नाम का अर्थ है छिपी हुई काशी. पौराणिक कथाओं के अनुसार, महाभारत के युद्ध के बाद पांडव अपने ही रिश्तेदारों की हत्या के पाप से मुक्ति पाने के लिए भगवान शिव से मिलना चाहते थे. पांडवों से बचने के लिए भगवान शिव काशी से यहां आ गए थे और स्वयं को छिपा लिया था. इसी छुपी हुई लीला के कारण इस स्थान का नाम गुप्तकाशी पड़ा. यहां का विश्वनाथ मंदिर और अर्धनारीश्वर मंदिर घूमने के लिए सबसे खास जगह है.
जानें का सही समय- गुप्तकाशी जाने का सबसे अच्छा समय मार्च से जून और सितंबर से नवंबर के बीच का है.