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नैनीताल-मसूरी नहीं, उत्तराखंड की इस छिपी घाटी में मिलेगा असली सुकून, हर तरफ दिखेगा जन्नत जैसा नजारा!

अगर आप नैनीताल, मसूरी और ऋषिकेश जैसी भीड़भाड़ वाली जगहों से हटकर किसी शांत और अनछुई डेस्टिनेशन की तलाश में हैं तो उत्तराखंड की दारमा वैली आपके लिए परफेक्ट जगह हो सकती है. बर्फीले पहाड़ों, हरे-भरे घास के मैदानों और खूबसूरत गांवों से घिरी यह घाटी नेचर लवर्स के लिए किसी जन्नत से कम नहीं है.

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किसी जन्नत से कम नहीं है उत्तराखंड की दारमा वैली (Photo-ITG)
किसी जन्नत से कम नहीं है उत्तराखंड की दारमा वैली (Photo-ITG)

जब भी उत्तराखंड घूमने की बात आती है तो ज्यादातर लोग नैनीताल, मसूरी या ऋषिकेश का रुख करते हैं. लेकिन अगर आप भीड़-भाड़ से दूर नेचर के बीच कुछ सुकून भरे पल बिताना चाहते हैं तो यहां का दारमा वैली आपके लिए एक बेहतरीन डेस्टिनेशन हो सकती है. उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में स्थित यह खूबसूरत घाटी अभी भी बड़े पैमाने पर पर्यटन की चकाचौंध से दूर है. बर्फ से ढके पहाड़, ग्लेशियर, हरे-भरे घास के मैदान और शांत वातावरण यहां घूमने आने वाले लोगों को खूब पसंद आते हैं.

कहां स्थित है दारमा वैली?
दारमा वैली उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र के पिथौरागढ़ जिले में स्थित है. यह घाटी दारमा नदी के किनारे फैली हुई है और नेपाल व तिब्बत (चीन) की सीमा के बेहद करीब है. यहां से दिखाई देने वाली पंचाचूली पर्वत श्रृंखला इस जगह की सबसे बड़ी खासियत मानी जाती है. बर्फ से ढकी पांच ऊंची चोटियां इस घाटी की खूबसूरती में चार चांद लगा देती हैं.

क्यों खास है दारमा वैली?
दारमा वैली उन चुनिंदा जगहों में से है जहां आज भी प्रकृति अपने सबसे शुद्ध रूप में दिखाई देती है. यहां दूर-दूर तक फैले ग्लेशियर, हरे घास के मैदान और पारंपरिक पहाड़ी गांव देखने को मिलते हैं. मोबाइल नेटवर्क और शहरी शोर-शराबे से दूर यह जगह आपको नेचर के और करीब ले जाती है.

यह घाटी रांग (Rung) समुदाय का पारंपरिक निवास स्थान भी है. यहां के लोग आज भी अपनी संस्कृति, रीति-रिवाज और पारंपरिक जीवनशैली को संजोए हुए हैं. नागलिंग, बालिंग, दुग्तू और दांतू जैसे गांवों में घूमते हुए ऐसा महसूस होता है जैसे समय थम गया हो.

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दारमा वैली में घूमनें की मुख्य जगहें

पंचाचूली की बर्फीली चोटियों को करीब से देखें
दारमा वैली आने का सबसे बड़ा आकर्षण पंचाचूली पर्वत श्रृंखला को बेहद करीब से देखने का मौका है. यहां से इन पांचों बर्फ से ढकी चोटियों का नजारा इतना खूबसूरत दिखाई देता है कि मानो किसी पोस्टकार्ड या पेंटिंग को सामने से देख रहे हों.

पंचाचूली बेस कैंप ट्रेक करें
अगर आपको ट्रेकिंग और एडवेंचर पसंद है तो पंचाचूली बेस कैंप ट्रेक आपके लिए शानदार अनुभव साबित हो सकता है. यह ट्रेक खूबसूरत गांवों, हरे-भरे घास के मैदानों और ग्लेशियरों के बीच से होकर गुजरता है. रास्ते में आपको बर्फीले पहाड़, ग्लेशियर और धौलीगंगा नदी के उद्गम स्थल के शानदार नजारे देखने को मिलेंगे.

स्थानीय संस्कृति और खानपान का आनंद उठाएं
यहां आने पर आप स्थानीय लोगों के खानपान, त्योहारों और पारंपरिक लाइफस्टाइल को करीब से देख सकते हैं. स्थानीय अनाजों से बने व्यंजन भी पर्यटकों को काफी पसंद आते हैं.

दारमा वैली घूमने कब जाना चाहिए घूमने?
दारमा वैली घूमने के लिए मई से जून और सितंबर से अक्टूबर का समय सबसे अच्छा माना जाता है. गर्मियों में यहां हरियाली और बहते झरनों का खूबसूरत नजारा देखने को मिलता है, जबकि मानसून के बाद साफ मौसम में पंचाचूली पर्वत श्रृंखला का दृश्य और भी शानदार दिखाई देता है.

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कैसे पहुंचें?
दारमा वैली पहुंचने के लिए सबसे पहले पिथौरागढ़ जिले के धारचूला पहुंचना होता है. इसके लिए आप काठगोदाम तक ट्रेन या पिथौरागढ़ के नैनी सैनी एयरपोर्ट तक फ्लाइट ले सकते हैं. इसके बाद सड़क मार्ग से धारचूला और फिर तवाघाट व सोबला होते हुए घाटी तक पहुंचा जा सकता है.

इन बातों का रखें ध्यान
दारमा वैली अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास स्थित है, इसलिए यहां जाने के लिए भारतीय नागरिकों को इनर लाइन परमिट (Inner Line Permit) बनवाना जरूरी होता है. यह परमिट धारचूला से आसानी से प्राप्त किया जा सकता है.

अगर आप भीड़भाड़ वाले हिल स्टेशनों से अलग कोई शांत, खूबसूरत और अनछुई जगह तलाश रहे हैं तो दारमा वैली आपकी ट्रैवल लिस्ट में जरूर होनी चाहिए. यहां की प्राकृतिक सुंदरता, बर्फीले पहाड़ और स्थानीय संस्कृति आपको एक यादगार अनुभव दे सकते हैं.

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