गर्मियों की छुट्टियां आते ही लोग घूमने की प्लानिंग शूरू कर देते हैं और सबसे पहले दिमाग में पहाड़ी इलाकों का नाम ही आता है. अगर आप ट्रेवल के शौकीन है, लेकिन पहाड़ों पर चढ़ाई की वजह से सिर्फ नैनीताल और मनाली ही घूम पाते हैं. लेकिन जहां भारत में कई ऐसे छिपे हुए गांव हैं जो बहुत ऊंचाई पर हैं, लेकिन वहां तक पक्की सड़कें जाती हैं. आप आराम से गाड़ी में बैठकर इन खूबसूरत वादियों, बर्फीली चोटियों और शांत माहौल का मजा ले सकते हैं. आइए जानते हैं ऐसे ही 7 शानदार गांवों के बारे में.
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कल्पा, हिमाचल प्रदेश (9,700 फीट)
हिमाचल के किन्नौर में बसा कल्पा गांव अपनी सेब के बागों और देवदार के जंगलों के लिए मशहूर है. यहां से किन्नौर कैलाश पर्वत की विशाल चोटियां नजर आती हैं. सुबह और शाम के समय जब सूरज की किरणें बर्फ़ीली चोटियों पर पड़ती हैं, तो नजारा देखने लायक होता है. यहां के पारंपरिक लकड़ी के घर और मंदिर इस गांव को बेहद खास बनाते हैं.
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जुलुक, सिक्किम (10,000 फीट)
पूर्वी सिक्किम में बसा जुलुक गांव कभी पुराने सिल्क रूट का हिस्सा हुआ करता था. यह गांव अपनी 32 घुमावदार भूलभुलैया जैसी सड़कों के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है. यहां से कंचनजंघा पर्वत का बेहद खूबसूरत नजारा दिखता है. बादलों से घिरे रहने वाले इस छोटे से गांव में साल के बारह महीने मौसम सुहावना और ठंडा रहता है.
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तवांग, अरुणाचल प्रदेश (10,000 फीट)
अरुणाचल प्रदेश का तवांग गांव बौद्ध संस्कृति और अध्यात्म का एक बड़ा केंद्र है. यहां दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा बौद्ध मठ है. यहां पहुंचने का रास्ता 'सेला पास' से होकर जाता है, जो अक्सर बर्फ़ की चादर से ढका रहता है. रंग-बिरंगे झंडे और शांत वादियां इस जगह को किसी सपनों की दुनिया जैसा बना देती हैं.
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नाको, हिमाचल प्रदेश (12,000 फीट)
स्पीति घाटी के मुहाने पर बसा नाको गांव इस सूची में सबसे ऊंचाई पर है. इस गांव के बीचों-बीच एक बेहद सुंदर और शांत झील है, जिसमें आसपास के बर्फीले पहाड़ों की परछाई दिखती है. यहां कोई शोर-शराबा या बड़े होटल नहीं हैं. आप यहां के स्थानीय होमस्टे में रुककर, 'बटर टी' का मजा लेते हुए लद्दाखी संस्कृति को करीब से देख सकते हैं.
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लामायुरु, लद्दाख (11,500 फीट)
लद्दाख के इस गांव को 'मूनलैंड' यानी 'चांद जैसी धरती' भी कहा जाता है. यहां के अनोखे और अजीब दिखने वाले पहाड़ हूबहू चंद्रमा की सतह जैसे लगते हैं. लेह-श्रीनगर हाईवे पर स्थित यह गांव अपनी पुरानी लामायुरु मोनेस्ट्री के लिए मशहूर है. अगर आप शांति और कुछ अलग तरह के नज़ारे देखना चाहते हैं, तो यहां गाड़ी से आसानी से पहुंच सकते हैं.
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लाचुंग, सिक्किम (9,600 फीट)
उत्तरी सिक्किम का लाचुंग गांव पहाड़ों से गिरते झरनों और सेब के बागों से घिरा हुआ है. यह गांव मशहूर युमथांग वैली जाने का रास्ता भी है. यहां की तिब्बती और लेपचा संस्कृति, मेहमाननवाजी और ठंडी हवाएं सैलानियों का दिल जीत लेती हैं. बिना किसी शारीरिक मेहनत या ट्रैकिंग के, यह जगह आराम से छुट्टियां बिताने के लिए सबसे बेस्ट है.
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चितकुल, हिमाचल प्रदेश(11,300 फीट)
चितकुल को भारत-तिब्बत सीमा पर भारत का आखिरी बसा हुआ गांव माना जाता है. सांगला घाटी में बसा यह गांव अपनी साफ हवा और साफ वातावरण के लिए जाना जाता है. यहां बहती हुई नीली बसपा नदी और लकड़ी के सुंदर घर इसकी खूबसूरती को बढ़ाते हैं. यहां मोबाइल नेटवर्क न के बराबर है, जिससे आप दुनिया की भागदौड़ से दूर सुकून पा सकते हैं.
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