प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शुक्रवार को संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की यात्रा भले ही संक्षिप्त रही हो, लेकिन इससे देश को कई बड़े रणनीतिक और आर्थिक फायदे होने वाले हैं. पीएम की इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच रक्षा, ऊर्जा और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े कई अहम समझौते हुए. साथ ही अरबों डॉलर के निवेश की घोषणाएं भी की गईं.
दरअसल, प्रधानमंत्री मोदी का अबू धाबी दौरा ऐसे समय में हुआ जब मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष और वैश्विक ऊर्जा बाजारों में अनिश्चितता बनी हुई है. क्षेत्रीय संघर्ष और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे अहम समुद्री मार्गों पर खतरे की आशंका के बीच दोनों देशों ने स्थिरता, कनेक्टिविटी और आर्थिक मजबूती पर जोर दिया.
पीएम मोदी के UAE दौरे की बड़ी बातें-
रणनीतिक रक्षा साझेदारी पर समझौता: पीएम मोदी की करीब 2.5 घंटे की इस यात्रा में भारत और UAE के बीच 'स्ट्रैटेजिक डिफेंस पार्टनरशिप' के फ्रेमवर्क पर समझौता हुआ. यह केवल सैन्य अभ्यास तक सीमित नहीं है, बल्कि एडवांस रक्षा तकनीकों के संयुक्त विकास और निर्माण, खुफिया जानकारी साझा करने और आतंकवाद-रोधी सहयोग को भी मजबूत करेगा.
रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार पर MoU: ऊर्जा क्षेत्र में दोनों देशों ने 'स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व' पर एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए. इसका उद्देश्य वैश्विक कच्चे तेल बाजार में अस्थिरता और क्षेत्रीय तनाव के कारण आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना है.
अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी (ADNOC) पहले से ही भारत के भूमिगत तेल भंडार में तेल रखने वाली एकमात्र विदेशी कंपनी है. नया समझौता दोनों देशों के रणनीतिक सहयोग को और गहरा करेगा. इससे भारत को विश्वसनीय ऊर्जा आपूर्ति मिलेगी और UAE को अपने बढ़ते कच्चे तेल उत्पादन के लिए स्थायी बाजार मिलेगा.
LPG सप्लाई पर समझौता: भारत और UAE के बीच तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (LPG) की आपूर्ति को लेकर भी समझौता हुआ. इसका मकसद भारत को स्थिर और दीर्घकालिक ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करना है ताकि वैश्विक कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर घरेलू उपभोक्ताओं पर कम पड़े.
यह समझौता इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOCL) और ADNOC के बीच हुआ. इसके तहत UAE से भारत को दीर्घकालिक प्राथमिकता आधारित ईंधन आपूर्ति सुनिश्चित होगी. UAE फिलहाल भारत की घरेलू LPG जरूरतों का लगभग 40 प्रतिशत पूरा करता है.
गुजरात के वाडिनार में शिप रिपेयर क्लस्टर: दोनों देशों के बीच गुजरात के वाडिनार में “शिप रिपेयर क्लस्टर” स्थापित करने को लेकर भी MoU हुआ. इससे भारत की समुद्री अवसंरचना मजबूत होगी और देश क्षेत्रीय स्तर पर जहाजों की मरम्मत और रखरखाव का बड़ा केंद्र बन सकेगा.
5 अरब डॉलर का निवेश: UAE ने भारत में 5 अरब डॉलर निवेश की भी घोषणा की. यह निवेश भारतीय इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं, RBL बैंक की क्रेडिट क्षमता बढ़ाने और हाउसिंग फाइनेंस कंपनी सम्मान कैपिटल में तरलता बढ़ाने के लिए किया जाएगा.
अधिकारियों के मुताबिक, ये समझौते दिखाते हैं कि भारत-UAE संबंध अब पारंपरिक व्यापार और ऊर्जा सहयोग से आगे बढ़कर रक्षा, लॉजिस्टिक्स, इंफ्रास्ट्रक्चर और वित्तीय क्षेत्रों तक पहुंच चुके हैं.
हाल के वर्षों में भारत और UAE बड़े आर्थिक साझेदार बनकर उभरे हैं. व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) के बाद दोनों देशों के बीच व्यापार 100 अरब डॉलर के पार पहुंच चुका है. अब दोनों देश आने वाले वर्षों में इसे 200 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य रख रहे हैं.