हल्दी भारत में इस्तेमाल होने वाला एक प्रमुख मसाला और औषधीय पौधा है. इसका वैज्ञानिक नाम 'करकुमा लोंगा' है और यह अदरक वाले पौधों के परिवार से संबंधित मानी जाती है. हल्दी का पौधा जमीन के ऊपर हरे पत्तों वाला होता है, जबकि इसका मुख्य उपयोग जमीन के अंदर बनने वाली गांठ यानी प्रकंद के लिए किया जाता है.
हल्दी की खेती भारत के कई राज्यों में की जाती है. आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, ओडिशा, कर्नाटक और पश्चिम बंगाल इसके प्रमुख उत्पादक राज्यों में शामिल हैं. इसकी खेती के लिए गर्म और नम जलवायु उपयुक्त मानी जाती है. आमतौर पर इसकी बुवाई बारिश के मौसम की शुरुआत में की जाती है और फसल तैयार होने में कई महीने लगते हैं.
हल्दी की कच्ची गांठ को साफ करने के बाद उबालकर सुखाया जाता है. इसके बाद इसे पीसकर पीले रंग का पाउडर तैयार किया जाता है. बाजार में हल्दी साबुत गांठ, पाउडर और कई अन्य खाद्य उत्पादों के रूप में मिलती है.
भारतीय खानपान में हल्दी का इस्तेमाल सब्जी, दाल, कढ़ी, अचार और कई तरह के व्यंजनों में किया जाता है. इसका उपयोग भोजन को पीला रंग देने के लिए भी किया जाता है. पारंपरिक भारतीय घरेलू इस्तेमाल में हल्दी को दूध और अन्य चीजों के साथ भी लिया जाता रहा है.
हल्दी का उल्लेख भारतीय पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में भी मिलता है. इसमें करक्यूमिन नाम का एक प्रमुख प्राकृतिक यौगिक पाया जाता है, जिस पर आधुनिक विज्ञान में भी कई शोध हुए हैं. हालांकि किसी बीमारी के इलाज के लिए हल्दी या इसके उत्पादों का इस्तेमाल चिकित्सकीय सलाह का विकल्प नहीं माना जाता है.
हल्दी भारत की मसाला अर्थव्यवस्था का भी एक हिस्सा है. इसकी खेती, प्रसंस्करण, व्यापार और निर्यात से किसानों, व्यापारियों और इससे जुड़े अन्य लोगों को रोजगार मिलता है. भारतीय रसोई और पारंपरिक जीवन में लंबे समय से मौजूद होने के कारण हल्दी एक परिचित कृषि और खाद्य उत्पाद के रूप में अपनी पहचान रखती है.
सर्दियों में कच्ची हल्दी से बनने वाली राजस्थानी सब्जी का स्वाद बेहद खास होता है. देशी घी, दही और पारंपरिक मसालों से तैयार यह डिश राजस्थान के घरों में खूब पसंद की जाती है. जानें कच्ची हल्दी की सब्जी बनाने की आसान रेसिपी और सामग्री.