स्वामी गोविंद देव गिरी (Swami Govind Dev Giri) महाराज भारत के प्रमुख आध्यात्मिक संत और धर्म प्रवचनकार हैं. संन्यास लेने से पहले उनका नाम आचार्य किशोरजी व्यास (किशोर मदन गोपाल व्यास) था. वे वेद, रामायण, भगवद्गीता, उपनिषद और अन्य भारतीय धार्मिक ग्रंथों पर प्रवचन देने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में वे 'श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट' के कोषाध्यक्ष और मथुरा कृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट के उपाध्यक्ष के रूप में भी जिम्मेदारी निभा रहे हैं.
स्वामी गोविंद देव गिरी महाराज का जन्म 25 जनवरी 1949 को महाराष्ट्र के अहिल्यानगर (पूर्व नाम अहमदनगर) जिले के बेलापुर गांव में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था. उनका बचपन धार्मिक और आध्यात्मिक वातावरण में बीता. प्रारंभिक शिक्षा उन्होंने अपने गांव बेलापुर में प्राप्त की.
आगे की पढ़ाई के लिए उन्होंने स्वाध्याय परिवार के संस्थापक पांडुरंग शास्त्री आठवले द्वारा स्थापित दर्शन विश्वविद्यालय में प्रवेश लिया. यहां उन्होंने दर्शनशास्त्र में स्नातकोत्तर शिक्षा प्राप्त की. इसके बाद वे वाराणसी गए, जहां उन्होंने वेद, उपनिषद और भारतीय धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन किया. प्रसिद्ध वैदिक विद्वान वेदमूर्ति डॉ. विश्वनाथजी देव के मार्गदर्शन में उन्हें 'दर्शनाचार्य' की उपाधि प्राप्त हुई.
स्वामी गोविंद देव गिरी महाराज ने 17 वर्ष की आयु में अपने गांव बेलापुर में पहली बार भगवद्गीता पर प्रवचन दिया. इसके बाद उन्होंने भारत और विदेशों में लगातार धार्मिक प्रवचन दिए. उनके प्रवचनों के विषयों में भगवद्गीता, रामायण, महाभारत, ज्ञानेश्वरी, दासबोध, योग वशिष्ठ, श्री देवी भागवत, शिव पुराण, हनुमान कथा और बुद्ध कथा जैसे ग्रंथ शामिल रहे हैं.
30 अप्रैल 2006 को तमिलनाडु के कांची कामकोटि पीठ के शंकराचार्य स्वामी श्री जयेन्द्र सरस्वती के आशीर्वाद से हरिद्वार में गंगा तट पर उन्होंने परमहंस संन्यास की दीक्षा ग्रहण की. इसके बाद उनका नाम औपचारिक रूप से स्वामी गोविंद देव गिरी महाराज रखा गया.
स्वामी गोविंद देव गिरी महाराज कई धार्मिक और शैक्षणिक संस्थाओं से जुड़े रहे हैं. 21 फरवरी 1990 को उन्होंने आलंदी में 'महर्षि वेदव्यास प्रतिष्ठान' की स्थापना की. इस संस्था का उद्देश्य वेदों के अध्ययन और उनके प्रचार-प्रसार को बढ़ावा देना है.
जनवरी 2024 में अयोध्या में श्रीराम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा समारोह के दौरान स्वामी गोविंद देव गिरी महाराज राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में रहे. इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपना 11 दिनों का उपवास उनके हाथों से समाप्त किया था.
राम मंदिर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी ने कहा कि मेरा अंदाजा है कि रकम करीब 3 करोड़ होगी. अकाउंट वेरिफिकेशन ठीक से चल रहा है. चंपत राय ने इसकी ज़िम्मेदारी अनिल मिश्रा को दी थी. इसमें मेरा कोई रोल नहीं है. गोविंद देव गिरी ने कहा कि पैसों की चोरी का कोई पॉलिटिकल कनेक्शन नहीं है. देखें.
ट्रस्ट की बैठक के बाद गोविंद देव गिरी ने चंपत राय का बचाव करते हुए कहा कि उनकी नीयत पर कोई सवाल नहीं है और उन पर भ्रष्टाचार का आरोप नहीं लगाया जा सकता. उन्होंने माना कि निगरानी और कार्य-पद्धति में कमियां रहीं. उन्होंने यह भी कहा कि ट्रस्ट में प्रशासनिक अनुशासन मजबूत करने के लिए सीईओ नियुक्त किया जाएगा.
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले के बाद हुई श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की पहली बैठक में कई बड़े फैसले लिए गए. ट्रस्ट ने चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार कर लिए. ट्रस्ट ने नए महासचिव की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करने और वित्तीय पारदर्शिता बनाए रखने की बात कही. इसके अलावा कुछ भौतिक चढ़ावे सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किए गए, जिनके चोरी होने की बात कही जा रही थी.
राम मंदिर चढ़ावा चोरी विवाद के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने रामभक्तों के नाम खुला पत्र जारी कर कहा है कि दोषियों को किसी भी कीमत पर नहीं बख्शा जाएगा. उन्होंने चढ़ावा चोरी को महापाप बताते हुए निष्पक्ष जांच और दोषियों के लिए कठोर सजा की मांग की है.