सोमनाथ मंदिर (Somnath Temple) गुजरात (Gujarat) में प्रभास पाटन, वेरावल में स्थित एक शिव मंदिर है. इसे देव पाटन भी कहा जाता है. यह पवित्र तीर्थ स्थलों में से एक है और शिव के बारह ज्योतिर्लिंग मंदिरों में से पहला है- Shiv Jyotirlinga.
मंदिर का उल्लेख हिंदू धर्म के प्राचीन संस्कृत ग्रंथों में सोमनाथ नामकरण के रूप में नहीं किया गया है, लेकिन 'प्रभास-पट्टन' का उल्लेख एक तीर्थ स्थल के रूप में किया गया है, जहां यह मंदिर मौजूद है. उदाहरण के लिए, पुस्तक वन पर्व के अध्याय 109, 118 और 119 में महाभारत और भागवत पुराण के खंड 10.45 और 10.78 में प्रभास को सौराष्ट्र के समुद्र तट पर एक तीर्थ बताया गया है.
कई मुस्लिम आक्रमणकारियों और शासकों द्वारा बार-बार नष्ट किए जाने के बाद, मंदिर का अतीत में कई बार पुनर्निर्माण किया गया था.
गुजरात के सोमनाथ मंदिर में महाशिवरात्रि के अवसर पर करीब 5 लाख श्रद्धालुओं के आने की संभावना है. पिछले महीने आयोजित सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के बाद श्रद्धालुओं की संख्या में वृद्धि हुई है.
महमूद ग़ज़नवी ने 24 वर्षों तक भारत पर लगातार हमले किए, जिनमें सोमनाथ जैसे प्रमुख मंदिरों को लूटा और विध्वंस किया. उनके हमलों ने न केवल धार्मिक स्थलों को नुकसान पहुंचाया बल्कि राजनीतिक एकता को भी तोड़ा. जयपाल और आनंदपाल जैसे हिंदू शाही राजाओं ने उनका सामना किया, लेकिन अंततः महमूद ने खैबर दर्रा पर नियंत्रण कर भारत के द्वार खोल दिए. लेकिन दरवाजा उसके लिए भी खुल रहा था, उसकी मौत का...
जनवरी 1026 में महमूद गजनवी ने गुजरात के सोमनाथ मंदिर पर 50,000 सैनिकों के साथ हमला किया, जहां रक्षकों ने बहादुरी से मुकाबला किया, लेकिन महमूद ने मंदिर को लूटकर सोमनाथ का अनमोल खजाना जब्त कर लिया, लेकिन भारत के रेगिस्तान 'मौत' इस आततायी सेना का इंतजार कर रही थी. वहां क्या हुआ था?
सोमनाथ मंदिर पर पहले हमले के पूरा होने के 1000 साल के अवसर पर सोमनाथ स्वाभिमान पर्व बड़े धूमधाम से मनाया गया. इस समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी उपस्थित थे. इस पर्व का प्रभाव इंटरनेट पर भी साफ देखा गया. बड़ी संख्या में लोगों ने सोमनाथ मंदिर को ऑनलाइन खोजा. इस मायने में सोमनाथ मंदिर पिछले 20 वर्षों में सबसे ज्यादा सर्च किया गया स्थल बना.
गुजरात सरकार ने सोमनाथ स्वाभिमान पर्व की तारीख पंद्रह तक बढ़ा दी है. इस दौरान कार्यक्रम श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए बढ़ाए गए हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शौर्य यात्रा में हिस्सा लिया, वीर हमीर जी गोहिल की मूर्ति को नमन किया और शहीदों को श्रद्धांजलि दी.
सोमनाथ मंदिर में आयोजित होने वाले भव्य उत्सव में ढाई हजार संतों की उपस्थिति में 72 घंटों तक ओम का जाप किया जाएगा. मंदिर के अंदर और बाहर एक हजार कलाकार शाम को संगीत प्रस्तुत करेंगे. इस पर्व को खास बनाने के लिए शिव भक्ति भजन और लोक नृत्यों के लिए लगभग बीस मंच बनाए गए हैं.
बीजेपी प्रवक्ता ने कहा कि नेहरू जी ने सबसे पहले सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का विरोध किया था. उन्होंने अपने कैबिनेट के सहयोगियों को लिखा कि यह हिंदू पुनरुत्थानवाद है. सरदार पटेल और राजेंद्र प्रसाद को भी इस प्रयास को रोकने की कोशिश की गई.
सोमनाथ मंदिर, जो बारह ज्योतिर्लिंगों में पहला और पृथ्वी का सबसे प्राचीन मंदिर माना जाता है. अपनी अद्भुत और रहस्यमय कथाओं के लिए प्रसिद्ध है. यहां का शिवलिंग सदियों पहले हवा में तैरता था, जो प्राचीन भारतीय विज्ञान और आध्यात्मिकता का प्रमाण है. इस मंदिर का इतिहास कई आक्रमणों और पुनर्निर्माणों से भरा हुआ है. इसकी प्राचीन दीवारों और स्तंभों में छिपे रहस्यों ने इतिहास के पन्नों को चुनौती दी है. देखें अद्भुत, अविश्वसनीय, अकल्पनीय.
सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का आज आखिरी दिन था। इस मौके पर सोमनाथ में शौर्य यात्रा निकाली गई. प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया पोस्ट कर कहा है कि जगह-जगह शिवभक्तों का जोश और उल्लास आनंद से भर देने वाला था. इस दौरान प्रधानमंत्री ने सोमनाथ में हुए विदेशी आंक्रांताओं के हमले का जिक्र किया. तो वहीं विपक्ष पर तुष्टीकरण की सियासत का आरोप भी लगाया. देखें शंखनाद.
प्रधानमंत्री मोदी ने सोमनाथ मंदिर से बिना नाम लिए याद दिलाया कि जब सरदार वल्लभभाई पटेल ने सोमनाथ के पुनर्निर्माण का संकल्प लिया, तब भी उन्हें रोका गया. 1951 में मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा में राष्ट्रपति के शामिल होने पर आपत्ति जताई गई. यह वही दौर था जब आस्था को सत्ता की सीमाओं में बांधने की कोशिश हुई. सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के मौके पर पीएम मोदी का संबोधन सिर्फ अतीत की कथा नहीं, यह भविष्य का घोष है. देखें दंगल.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के अवसर पर पावन श्री सोमनाथ मंदिर परिसर से देश को संबोधित किया. अपने संबोधन की शुरुआत पीएम मोदी ने ‘जय सोमनाथ’ के जयघोष के साथ की, जिससे पूरा मंदिर परिसर गूंज उठा और श्रद्धालुओं में उत्साह की लहर दौड़ गई. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सोमनाथ स्वाभिमान पर्व करोड़ों-करोड़ भारतीयों की शाश्वत आस्था, साधना और अटूट संकल्प का जीवंत प्रतिबिंब है. उन्होंने कहा कि यह पर्व केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि भारत की सनातन चेतना, सांस्कृतिक विरासत और आत्मसम्मान का प्रतीक है.
सोमनाथ में चार दिनों तक चले स्वाभिमान पर्व का समापन हुआ, जहां प्रधानमंत्री मोदी ने शौर्य यात्रा निकाली. इस महोत्सव में नारी शक्ति की भागीदारी ने माहौल को और गरिमामय बनाया. मोदी ने मंदिर में पूजा अर्चना की और डमरू बजाते नजर आए. इस अवसर पर मोदी ने कहा कि सोमनाथ का इतिहास क्रूर और साहसिक है जिसे छिपाया नहीं जा सकता.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के दौरान पावन श्री सोमनाथ मंदिर परिसर से पूरे देश को संबोधन दिया. उन्होंने अपने संबोधन की शुरुआत जय सोमनाथ के जयघोष के साथ की जिससे मंदिर परिसर गूंज उठा और श्रद्धालुओं में उत्साह की लहर दौड़ गई. पीएम मोदी ने बताया कि यह पर्व भारत की सनातन चेतना, सांस्कृतिक विरासत तथा आत्मसम्मान का प्रतीक है. उन्होंने इस पर्व को करोड़ों भारतीयों की आस्था, साधना और अटूट संकल्प का जीवंत प्रतिबिंब बताया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने गुजरात दौरे के दूसरे दिन सोमनाथ में आयोजित शौर्य यात्रा में शामिल हुए. यह औपचारिक शोभा यात्रा सोमनाथ मंदिर की रक्षा करते हुए अपने प्राणों की आहुति देने वाले अनगिनत वीर योद्धाओं को श्रद्धांजलि अर्पित करने के उद्देश्य से निकाली गई थी. शौर्य यात्रा में 108 घोड़ों के साथ एक प्रतीकात्मक जुलूस निकला, जो शौर्य, साहस और बलिदान का प्रतीक माना जाता है. इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी ने सोमनाथ मंदिर में दर्शन-पूजन किया.
अपने गुजरात दौरे के दूसरे दिन पीएम मोदी शौर्य यात्रा में हुए शामिल। यह यात्रा सोमनाथ मंदिर की रक्षा में प्राण न्योछावर करने वाले वीरों को श्रद्धांजलि देने के लिए निकाली गई. पीएम मोदी भगवान शिव की भक्ति में लीन नजए आए. एक किलोमीटर लंबी यात्रा में डमरू बजाकर भगवान शिव के प्रति अपनी भक्ति प्रदर्शित की. देखें वीडियो.
पीएम मोदी ने सोमनाथ में आयोजित शौर्य सभा को संबोधित करते हुए सोमनाथ मंदिर पर हुए विदेशी आक्रांताओं के हमलों, उनके विरुद्ध संघर्ष करने वाले वीरों के बलिदान और सरदार वल्लभभाई पटेल द्वारा मंदिर के पुनर्निर्माण की नींव रखे जाने के ऐतिहासिक योगदान का उल्लेख किया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमनाथ में आयोजित शौर्य यात्रा में भाग लिया, जो मंदिर की रक्षा में बलिदान देने वाले वीर योद्धाओं को समर्पित था. शौर्य यात्रा में 108 घोड़ों का प्रतीकात्मक जुलूस निकाला गया. इसके बाद प्रधानमंत्री ने सोमनाथ मंदिर में पूर्जा-अर्चना की.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने गुजरात दौरे के दूसरे दिन सोमनाथ में आयोजित शौर्य यात्रा में शामिल हुए. यह औपचारिक शोभा यात्रा सोमनाथ मंदिर की रक्षा करते हुए अपने प्राणों की आहुति देने वाले अनगिनत वीर योद्धाओं को श्रद्धांजलि अर्पित करने के उद्देश्य से निकाली गई. शौर्य यात्रा में 108 घोड़ों के साथ एक प्रतीकात्मक जुलूस निकला, जो शौर्य, साहस और बलिदान का प्रतीक माना जाता है. इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी ने सोमनाथ मंदिर में दर्शन-पूजन किया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने गुजरात दौरे के दूसरे दिन सोमनाथ में आयोजित शौर्य यात्रा में शामिल हुए. यह औपचारिक शोभा यात्रा सोमनाथ मंदिर की रक्षा करते हुए अपने प्राणों की आहुति देने वाले अनगिनत वीर योद्धाओं को श्रद्धांजलि अर्पित करने के उद्देश्य से निकाली गई थी. शौर्य यात्रा में 108 घोड़ों के साथ एक प्रतीकात्मक जुलूस निकला, जो शौर्य, साहस और बलिदान का प्रतीक माना जाता है. इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी ने सोमनाथ मंदिर में दर्शन-पूजन किया.
Somnath Temple : गुजरात के प्रसिद्ध सोमनाथ मंदिर में स्वभिमान पर्व मनाया जा रहा है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शामिल हुए. 10 जनवरी की शाम को इस मंदिर परिसर में ड्रोन शो हुआ, जिसमें 3 हजार ड्रोन शामिल हुए. तस्वीरों में ड्रोन की मदद से सोमनाथ मंदिर, शिवलिंग और ब्रह्मांड की इमेज तैयार की गई.
सोमनाथ मंदिर में स्वाभिमान पर्व का आयोजन भव्यता और दिव्यता के साथ हो रहा है. हजारों साधु-संत मंत्रोच्चार और अखंड ओंकार जाप कर रहे हैं, शंखनाद और डमरू नाद से वातावरण शिवमय हो उठा है. सौराष्ट्र की हवा में इतिहास की खुशबू और समुद्र की लहरों में स्वाभिमान की कहानी गूंज रही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंदिर पहुंचे हैं और कल सुबह जलाभिषेक, ध्वजा पूजा और सोमेश्वर महा पूजा में शामिल होंगे. सोमनाथ ट्रस्ट के अध्यक्ष के रूप में उनकी मौजूदगी इस पर्व को और भी ऐतिहासिक बना रही है.