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राजमा

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राजमा (Rajma) भारत की सबसे लोकप्रिय दालों में से एक है. यह मुख्य रूप से उत्तर भारत, खासकर पंजाब, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड में बड़े पैमाने पर उगाया और खाया जाता है. राजमा का वैज्ञानिक नाम फेजियोलस वल्गेरिस (Phaseolus vulgaris) है. यह लाल, गहरे लाल, सफेद और चितकबरे रंगों में पाया जाता है. अपने बेहतरीन स्वाद और पौष्टिक गुणों के कारण राजमा भारतीय रसोई का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है.

राजमा में प्रोटीन, फाइबर, आयरन, कैल्शियम, मैग्नीशियम, पोटैशियम, फोलेट और कई आवश्यक विटामिन पाए जाते हैं. यह शाकाहारी लोगों के लिए प्रोटीन का एक अच्छा स्रोत माना जाता है. इसमें मौजूद फाइबर पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने में मदद करता है और लंबे समय तक पेट भरा होने का एहसास देता है. साथ ही यह शरीर में ऊर्जा बनाए रखने और हड्डियों को मजबूत बनाने में भी सहायक होता है.

राजमा की खेती ठंडे और समशीतोष्ण जलवायु वाले क्षेत्रों में अच्छी होती है. इसकी अच्छी पैदावार के लिए उपजाऊ और जल निकासी वाली मिट्टी उपयुक्त मानी जाती है. बुवाई के बाद समय-समय पर सिंचाई और खरपतवार नियंत्रण करने से बेहतर उत्पादन मिलता है.

भारतीय भोजन में राजमा का सबसे प्रसिद्ध व्यंजन राजमा-चावल है, जिसे लगभग हर उम्र के लोग पसंद करते हैं. इसके अलावा राजमा का उपयोग सलाद, सूप, टिक्की, रैप और अन्य कई व्यंजन बनाने में भी किया जाता है. पकाने से पहले इसे 6 से 8 घंटे तक पानी में भिगोना और अच्छी तरह पकाना आवश्यक होता है, ताकि यह आसानी से पच सके.
 

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