पद्मनाभस्वामी मंदिर (Padmanabhaswamy Temple), तिरुवनंतपुरम केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम में स्थित भारत के सबसे प्रसिद्ध और रहस्यमय हिंदू मंदिरों में से एक है. यह मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है, जिन्हें यहां अनंत शयन मुद्रा में “श्री पद्मनाभ” के रूप में पूजा जाता है. भगवान विष्णु शेषनाग पर शयन करते हुए दर्शाए गए हैं, जिनकी नाभि से कमल निकलता है और उस पर ब्रह्मा विराजमान हैं.
मंदिर का इतिहास अत्यंत प्राचीन माना जाता है. कहा जाता है कि इसका उल्लेख पुराणों और दिव्य प्रबंधम जैसे ग्रंथों में मिलता है. वर्तमान संरचना का अधिकांश भाग 16वीं शताब्दी में त्रावणकोर के महाराजाओं द्वारा विकसित किया गया. यह मंदिर त्रावणकोर राजपरिवार की आस्था का केंद्र रहा है, और आज भी शाही परिवार स्वयं को भगवान पद्मनाभ का सेवक मानता है.
पद्मनाभस्वामी मंदिर अपनी द्रविड़ स्थापत्य शैली के लिए प्रसिद्ध है. इसका ऊंचा गोपुरम, पत्थर की नक्काशी, भित्तिचित्र और गर्भगृह की कलात्मकता दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देती है. मंदिर में भगवान विष्णु के दर्शन तीन द्वारों से होते हैं- पहले से मुख और वक्ष, दूसरे से नाभि, और तीसरे से चरण.
यह मंदिर 2011 में उस समय विश्वभर में चर्चा में आया, जब इसके भूमिगत कक्षों (तहखानों) से अपार धन-संपत्ति- स्वर्ण आभूषण, सिक्के, मुकुट और रत्न प्राप्त हुए. इसी कारण इसे विश्व का सबसे समृद्ध मंदिर भी कहा जाता है. हालांकि, कुछ कक्ष आज भी धार्मिक कारणों से नहीं खोले गए हैं.
मंदिर में केवल पारंपरिक हिंदू रीति-रिवाजों का पालन करने वाले श्रद्धालुओं को ही प्रवेश की अनुमति है और सख्त ड्रेस कोड का पालन करना अनिवार्य है. पद्मनाभस्वामी मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि भारत की सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और आध्यात्मिक विरासत का एक अमूल्य धरोहर भी है.
दुनिया में कुछ ऐसे बंद दरवाजें हैं, जिनके पीछे क्या छिपा है. आज के समय में किसी को कुछ पता नहीं है. क्योंकि, कोई इन्हें खोल नहीं पाया है. चलिए जानते हैं कहां- कहां हैं ऐसे रहस्यमय दरवाजे और क्या है इनसे जुड़ी कहानियां?