नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया यानी एनपीसीआई (NPCI) भारत की खुदरा भुगतान व्यवस्था से जुड़ी एक प्रमुख संस्था है. यह देश में विभिन्न प्रकार की डिजिटल भुगतान और धन निपटान प्रणालियों के संचालन से जुड़ा काम करती है. एनपीसीआई की स्थापना भारत में भुगतान व्यवस्था के लिए एक संगठित ढांचा तैयार करने के उद्देश्य से की गई थी.
एनपीसीआई की शुरुआत दिसंबर 2008 में हुई थी. इसे भारतीय रिजर्व बैंक और भारतीय बैंक संघ की पहल पर गठित किया गया था. संस्था का गठन भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 के प्रावधानों के तहत किया गया. एनपीसीआई को कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 8 के तहत पंजीकृत किया गया है. इसका प्रमाण पत्र दिसंबर 2008 में जारी हुआ था और अप्रैल 2009 में इसे कारोबार शुरू करने की अनुमति मिली थी.
एनपीसीआई की स्थापना के समय देश के दस प्रमुख बैंकों को प्रवर्तक बैंक के रूप में शामिल किया गया था. इनमें भारतीय स्टेट बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, केनरा बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ इंडिया, आईसीआईसीआई बैंक, एचडीएफसी बैंक, सिटीबैंक और एचएसबीसी शामिल थे. बाद के वर्षों में संस्था के शेयरधारक आधार में बदलाव किया गया.
वर्ष 2016 में एनपीसीआई की हिस्सेदारी का विस्तार किया गया. इसमें कई अन्य सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक, निजी क्षेत्र के बैंक, एक विदेशी बैंक, बहुराज्यीय सहकारी बैंक और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक शामिल किए गए. इस बदलाव के बाद संस्था के स्वामित्व ढांचे में कई बैंक शामिल हो गए.
एनपीसीआई का काम देश में खुदरा भुगतान से जुड़ी विभिन्न प्रणालियों के संचालन और प्रबंधन से जुड़ा है. संस्था डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाली कई भुगतान व्यवस्थाओं से भी जुड़ी रही है. इसका काम बैंकों और अन्य संबंधित संस्थाओं के बीच भुगतान तथा निपटान से जुड़ी प्रक्रियाओं के लिए आधार तैयार करना है.
एनपीसीआई के संचालन के लिए निदेशक मंडल की व्यवस्था है. इसमें भारतीय रिजर्व बैंक के नामित प्रतिनिधि और प्रमुख प्रवर्तक बैंकों के प्रतिनिधि शामिल होते हैं. संस्था के प्रबंधन में अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक तथा मुख्य कार्यकारी अधिकारी जैसे पद महत्वपूर्ण होते हैं.
एनपीसीआई के गठन के बाद भारत में खुदरा भुगतान से जुड़े क्षेत्र में कई बदलाव हुए हैं. संस्था का काम बैंकिंग और डिजिटल भुगतान से जुड़ी सेवाओं के लिए साझा ढांचे के संचालन तक फैला हुआ है. इसके माध्यम से देश में भुगतान और धन निपटान से जुड़ी विभिन्न प्रक्रियाओं को संचालित करने के लिए संस्थागत व्यवस्था उपलब्ध होती है.
एनपीसीआई भारत की भुगतान व्यवस्था से जुड़ी संस्थाओं में एक महत्वपूर्ण नाम है. इसकी गतिविधियां बैंकिंग क्षेत्र, डिजिटल भुगतान सेवाओं और खुदरा भुगतान व्यवस्था से संबंधित हैं. संस्था का प्रशासनिक और परिचालन ढांचा भारतीय रिजर्व बैंक तथा बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े संस्थानों के साथ समन्वय पर आधारित है.
UPI MDR Charge From Next Month: अगले महीने की 15 तारीख से 2000 रुपये से ज्यादा के यूपीआई पेमेंट पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR लागू हो जाएगा. इसे लेकर NPCI CEO ने तस्वीर साफ की है.
UPI Payment MDR: 2000 रुपये से ज्यादा के यूपीआई ट्रांजैक्शन पर लगने वाले कुल एमडीआर के 5 फीसदी का इस्तेमाल एक फंड द्वारा UPI इकोसिस्टम को सिर्फ सरकारी सब्सिडी पर निर्भर रखने के बजाय आत्मनिर्भर बनाने के लिए होगा.
UPI MDR Flat Rate Model: सरकार ने 2000 रुपये से ज्यादा के यूपीआई पेमेंट पर लगने वाले एमडीआर को एक समान नहीं रखा है. इनमें कुछ खास पेमेंट पर फ्लैट रेट मॉडल लागू किया है, जहां फिक्स्ड एमडीआर वसूला जाएगा.
NPCI ने तर्क दिया है कि यूपीआई के लिए एमडीआर चार्ज चुनिंदा व्यापारियों से वसूला जाएगा, लेकिन जीएसटी पूरे ट्रांजेक्शन पर नहीं लगेगा, बल्कि भुगतान किए गए MDR पर लागू होगा. अगर 10,000 रुपये का ट्रांजेक्शन हुआ है तो 10 हजार रुपये पर जीएसटी नहीं लगेगा, बल्कि पेमेंट किए गए 40 रुपये एमडीआर पर 18 फीसदी लगेगा.