नालासोपारा (Nalasopara) महाराष्ट्र के पालघर जिले में स्थित एक शहर है. इसका आधिकारिक नाम शूरपारक नगर है. यह शहर मुंबई महानगर क्षेत्र का हिस्सा है और वसई-विरार महानगरपालिका के प्रशासन के अंतर्गत आता है. नालासोपारा का पुराना नाम सोपारा या सुपारा भी रहा है. यह क्षेत्र मुंबई महानगर के उत्तरी हिस्से में स्थित है और यहां से मुंबई के विभिन्न इलाकों तक रेल मार्ग के जरिए पहुंचा जा सकता है.
नालासोपारा का संबंध प्राचीन धार्मिक और ऐतिहासिक परंपराओं से भी रहा है. यहां स्थित चक्रेश्वर महादेव मंदिर भगवान शिव को समर्पित एक प्राचीन मंदिर है. यह मंदिर नालासोपारा पश्चिम में चक्रेश्वर तालाब के एक किनारे पर स्थित है. स्थानीय धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, स्वामी समर्थ ने इस स्थान पर ध्यान किया था. मान्यता यह भी है कि उन्होंने यहां एक राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा की थी और एक शिष्य को आशीर्वाद दिया था. बताया जाता है कि उसी स्थान पर उनके शिष्य ने संजीवन समाधि ली थी. मंदिर से जुड़ी ये जानकारियां स्थानीय धार्मिक परंपराओं में प्रचलित हैं.
नालासोपारा का उल्लेख साहित्य में भी मिलता है. गुजराती लेखक और कवि झवेरचंद मेघाणी के ऐतिहासिक घटनाओं पर आधारित उपन्यास गुजरातनो जय में सोपारा का संदर्भ दिया गया है. इस उपन्यास में जैन समाज से जुड़े प्रसिद्ध व्यक्तियों वस्तुपाल और तेजपाल के माता-पिता का उल्लेख है. वस्तुपाल और तेजपाल का नाम राजस्थान के माउंट आबू में स्थित दिलवाड़ा मंदिरों के निर्माण से जुड़ा है. उपन्यास के अनुसार, घर छोड़कर जाने के बाद उनके माता-पिता कुछ समय तक सोपारा में रहे थे.
शिक्षा के क्षेत्र में नालासोपारा में कई विद्यालय संचालित हैं. इनमें सेंट एलॉयसियस हाई स्कूल का नाम शामिल है. शहर की आबादी बढ़ने के साथ यहां आवासीय क्षेत्रों और शैक्षणिक संस्थानों का विस्तार हुआ है.
नालासोपारा रेलवे स्टेशन मुंबई उपनगरीय रेलवे की पश्चिमी लाइन पर स्थित है. इस स्टेशन का कोड एनएसपी है. यह शहर को मुंबई और आसपास के अन्य इलाकों से जोड़ने वाले प्रमुख रेल संपर्कों में शामिल है. वर्ष 2011 में स्टेशन पर प्रथम श्रेणी में यात्रा करने वाले यात्रियों की संख्या में पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 25 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई थी.
यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए पश्चिम रेलवे ने वर्ष 2012 में स्टेशन के प्लेटफॉर्मों का विस्तार कराया. विशेष रूप से प्लेटफॉर्म संख्या चार पर अतिरिक्त जगह बनाई गई. इस परियोजना पर लगभग 72 लाख रुपये खर्च किए गए और जुलाई 2012 में निर्माण कार्य पूरा हुआ. प्लेटफॉर्मों पर जगह बढ़ाने और पुलों तथा पैदल पारपथों की व्यवस्था का उद्देश्य यात्रियों की आवाजाही को सुविधाजनक बनाना था.
महाराष्ट्र में आग लगने की घटनाएं लगातार चिंता बढ़ा रही हैं. ठाणे में गुरुवार तड़के तीन दुकानों में आग लग गई, जिससे भारी नुकसान हुआ. राहत की बात रही कि इस हादसे में किसी की जान नहीं गई.
नालासोपारा में इम्पीरियल हाइट्स इमारत की 14वीं मंजिल पर आधी रात के करीब आग लग गई. हादसे में दो महिलाओं की मौत हो गई, जबकि छह लोगों को अस्पताल में एडमिट कराया गया है. इमारत में फंसे चार लोगों को बड़ी क्रेन की मदद से सुरक्षित बाहर निकाला गया.