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जौहर यूनिवर्सिटी

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जौहर यूनिवर्सिटी

मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी (Mohammad Ali Jauhar University) उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले में स्थित एक निजी विश्वविद्यालय है. इसकी स्थापना वर्ष 2006 में मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट द्वारा की गई थी. यूनिवर्सिटी का नाम स्वतंत्रता सेनानी, पत्रकार और शिक्षाविद मोहम्मद अली जौहर के सम्मान में रखा गया है. हालांकि, विश्वविद्यालय समय-समय पर भूमि अधिग्रहण और जमीन के पट्टे (लीज) से जुड़े मामलों को लेकर चर्चा में रहा है. इन मामलों को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार और विश्वविद्यालय के बीच कानूनी विवाद भी चला. यह मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट तक पहुंचा, जहां सरकार के पक्ष में फैसला आया.

अक्टूबर 2024 में भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा. इसके साथ ही उत्तर प्रदेश सरकार को विश्वविद्यालय की भूमि लीज समाप्त करने की अनुमति मिल गई. इस फैसले के बाद विश्वविद्यालय एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना.

शुरुआत में इसे एक शैक्षणिक संस्थान के रूप में विकसित किया गया और बाद में इसे यूनिवर्सिटी का दर्जा मिला. साल 2012 में उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से इसे विश्वविद्यालय का दर्जा प्रदान किया गया. इसके बाद विश्वविद्यालय को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) से भी मान्यता मिली, जिससे यहां संचालित डिग्रियों को वैधानिक मान्यता प्राप्त हुई. 28 मई 2013 को राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान आयोग (NCMEI) ने इसे अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान का दर्जा भी प्रदान किया.

विश्वविद्यालय में विभिन्न विषयों के स्नातक, स्नातकोत्तर और शोध स्तर के पाठ्यक्रम संचालित किए जाते हैं. यहां कला, विज्ञान, वाणिज्य, शिक्षा, विधि, इंजीनियरिंग, चिकित्सा तथा अन्य विषयों से जुड़े अध्ययन कार्यक्रम उपलब्ध हैं. परिसर में शैक्षणिक भवनों के साथ छात्रावास, पुस्तकालय, प्रयोगशालाएं और अन्य शैक्षणिक सुविधाएं भी मौजूद हैं.
 

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