माइग्रेन (Migraine) एक तरह का न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर है, जिसमें बार-बार सिरदर्द के साथ कई अन्य लक्षण भी हो सकते हैं. यह सामान्य सिरदर्द से अलग होता है और कुछ लोगों में इसका दर्द काफी तेज हो सकता है. माइग्रेन कुछ घंटों से लेकर कई दिनों तक रह सकता है.
माइग्रेन में अक्सर सिर के एक हिस्से में काफी तेज दर्द महसूस होता है, हालांकि कुछ लोगों में दोनों तरफ भी दर्द हो सकता है. इसके साथ जी मिचलाना, उल्टी, तेज रोशनी और तेज आवाज से परेशानी जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं. कुछ लोगों को माइग्रेन शुरू होने से पहले आंखों के सामने चमकती रोशनी, टेढ़ी-मेढ़ी रेखाएं या धुंधला दिखाई देने जैसे लक्षण महसूस होते हैं. इसे ऑरा कहा जाता है.
माइग्रेन का एक निश्चित कारण हर व्यक्ति में स्पष्ट नहीं होता. माना जाता है कि इसमें मस्तिष्क और उससे जुड़ी नसों में होने वाले बदलाव की भूमिका होती है. आनुवंशिक कारण भी इसका एक हिस्सा हो सकते हैं.
तनाव, नींद का बिगड़ा हुआ पैटर्न, लंबे समय तक भूखे रहना, पानी की कमी, तेज रोशनी, तेज आवाज और कुछ लोगों में खास खाद्य पदार्थ माइग्रेन को ट्रिगर कर सकते हैं. महिलाओं में हार्मोनल बदलाव के दौरान भी माइग्रेन की समस्या बढ़ सकती है.
माइग्रेन की पहचान आमतौर पर व्यक्ति के लक्षण और मेडिकल हिस्ट्री के आधार पर की जाती है. डॉक्टर सिरदर्द की अवधि, उसकी तीव्रता और साथ दिखाई देने वाले लक्षणों के बारे में जानकारी लेते हैं. जरूरत पड़ने पर दूसरी स्वास्थ्य समस्याओं को बाहर करने के लिए कुछ जांच भी कराई जा सकती हैं.
माइग्रेन से बचने के लिए पर्याप्त नींद लेना, समय पर भोजन करना और शरीर में पानी की कमी न होने देना मददगार हो सकता है. इसके अलावा अपने ट्रिगर पहचानना और उनका ध्यान रखना भी जरूरी है. बार-बार या बहुत तेज सिरदर्द होने पर डॉक्टर से सलाह लेना चाहिए.
अगर सिरदर्द अचानक बेहद तेज हो, बोलने में परेशानी हो, शरीर के किसी हिस्से में कमजोरी आए या देखने में अचानक दिक्कत हो, तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए.
सिरदर्द और माइग्रेन दोनों अलग-अलग समस्याएं हैं जिनके कारण, लक्षण और इलाज भी अलग- अलग होते हैं, सामान्य सिरदर्द टेंशन हेडेक होता है जो मानसिक तनाव, थकान या गलत जीवनशैली से होता है, जबकि माइग्रेन एक न्यूरोलॉजिकल बीमारी है.