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ललिता सप्तमी

ललिता सप्तमी

ललिता सप्तमी

ललिता सप्तमी (Lalita Saptami) हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण व्रत और पर्व है, जो राधा-कृष्ण की भक्ति से जुड़ा माना जाता है. यह पर्व भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाया जाता है. इस दिन राधा रानी की प्रिय सखी ललिता देवी की पूजा करने की परंपरा है. खासतौर पर ब्रज क्षेत्र में इस पर्व का विशेष महत्व माना जाता है.

धार्मिक मान्यता के अनुसार ललिता देवी भगवान कृष्ण और राधा रानी की अष्ट सखियों में प्रमुख हैं. उन्हें राधा रानी की बेहद करीबी सखी माना जाता है. कहा जाता है कि ललिता देवी राधा-कृष्ण की सेवा और उनकी लीलाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती थीं. इसी वजह से भक्त इस दिन श्रद्धा के साथ उनकी पूजा करते हैं.

ललिता सप्तमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद साफ कपड़े पहनने की परंपरा है. इसके बाद घर के पूजा स्थान या मंदिर में ललिता देवी की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित कर पूजा की जाती है. पूजा में फूल, धूप, दीप, रोली, अक्षत, फल और मिठाई आदि अर्पित किए जाते हैं. भक्त ललिता देवी का स्मरण करते हुए राधा-कृष्ण की भी पूजा करते हैं.

इस दिन कई श्रद्धालु व्रत रखते हैं. व्रत रखने वाले लोग अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार फलाहार करते हैं. कुछ लोग पूरे दिन उपवास रखते हैं और पूजा के बाद व्रत खोलते हैं. धार्मिक मान्यता है कि ललिता सप्तमी पर सच्चे मन से पूजा और भक्ति करने से घर में सुख-शांति बनी रहती है और राधा-कृष्ण की कृपा प्राप्त होती है.

ललिता सप्तमी केवल व्रत और पूजा का दिन नहीं है, बल्कि यह राधा-कृष्ण की भक्ति और ललिता देवी के प्रति श्रद्धा प्रकट करने का अवसर भी माना जाता है. इस दिन भक्त मंदिरों में दर्शन करते हैं, भजन-कीर्तन करते हैं और भगवान का स्मरण करते हैं. ब्रज क्षेत्र में इस पर्व से जुड़ी धार्मिक गतिविधियां खास आकर्षण का केंद्र रहती हैं.

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