कुंभ (Kumbh) भारत में आयोजित होने वाला एक प्रमुख धार्मिक आयोजन है. इसे हिंदू धर्म की परंपराओं से जुड़ा बड़ा तीर्थ उत्सव माना जाता है. कुंभ का आयोजन भारत के चार प्रमुख तीर्थ स्थलों हरिद्वार, प्रयागराज, उज्जैन और नासिक में होता है. इन स्थानों पर कुंभ का आयोजन लगभग हर 12 वर्षों पर होता है. कुंभ मेले की तिथियां हिंदू पंचांग और बृहस्पति, सूर्य तथा चंद्रमा की विशेष ज्योतिषीय स्थितियों से जुड़ी होती हैं. प्रयागराज और हरिद्वार में होने वाले कुंभ आयोजनों के बीच लगभग छह वर्षों का अंतर रहता है. इन दोनों स्थानों पर महाकुंभ और अर्धकुंभ जैसे आयोजन भी होते हैं. उज्जैन और नासिक में कुंभ मेला आमतौर पर एक ही वर्ष या एक वर्ष के अंतर से आयोजित होता है.
कुंभ के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु इन तीर्थ स्थलों पर पहुंचते हैं. आयोजन के दौरान श्रद्धालु संबंधित पवित्र नदी में स्नान करते हैं और धार्मिक अनुष्ठानों में हिस्सा लेते हैं. साधु, संत और विभिन्न अखाड़ों से जुड़े धार्मिक समूह भी कुंभ में शामिल होते हैं.
कुंभ से जुड़ी धार्मिक परंपरा का उल्लेख प्राचीन भारतीय मान्यताओं में मिलता है. इसकी कथा समुद्र मंथन से जुड़ी हुई है. धार्मिक मान्यता के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान अमृत का कलश प्राप्त हुआ था. अमृत को लेकर देवताओं और असुरों के बीच संघर्ष हुआ और इसी दौरान अमृत की कुछ बूंदें चार स्थानों पर गिरीं. इन्हीं स्थानों को कुंभ से जोड़ा जाता है.
कुंभ मेले का मुख्य धार्मिक आयोजन पवित्र नदी में स्नान करना है. प्रयागराज में गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम पर श्रद्धालु स्नान करते हैं. मेले के दौरान साधु-संतों के शिविर, धार्मिक प्रवचन, पूजा-पाठ, सामूहिक आयोजन और विभिन्न मेलों का आयोजन होता है.
ऐतिहासिक रूप से हरिद्वार में वार्षिक मेले की परंपरा काफी पुरानी रही है. 1858 से पहले कुंभ नाम का प्रयोग मुख्य रूप से हरिद्वार के बारहवें वार्षिक मेले के लिए किया जाता था. प्रयाग में पहला कुंभ मेला 1870 में आयोजित किया गया था.
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सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस प्रसन्न बी. वराले ने शिक्षा व्यवस्था की स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि सिंहस्थ कुंभ के बजट का सिर्फ 0.1 फीसदी हिस्सा भी शिक्षा पर खर्च किया जाए तो कई सरकारी स्कूलों को बचाया जा सकता है.