न्यायमूर्ति उज्ज्ल भुइयां भारत के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश हैं. उनका जन्म 2 अगस्त 1964 को गुवाहाटी में हुआ था. उनके पिता सुचेन्द्र नाथ भुइयां वरिष्ठ अधिवक्ता और असम के पूर्व महाधिवक्ता रहे हैं.
उज्ज्ल भुइयां ने अपनी स्कूली शिक्षा गुवाहाटी के डॉन बॉस्को हाई स्कूल से की. इसके बाद उन्होंने कॉटन कॉलेज से पढ़ाई की. दिल्ली के किरोड़ीमल कॉलेज से कला में स्नातक की डिग्री लेने के बाद उन्होंने गुवाहाटी के गवर्नमेंट लॉ कॉलेज से विधि स्नातक और गुवाहाटी विश्वविद्यालय से विधि स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल की.
20 मार्च 1991 को उनका अधिवक्ता के रूप में पंजीकरण हुआ. उन्होंने गुवाहाटी उच्च न्यायालय और उसकी विभिन्न पीठों के साथ कई अन्य न्यायिक संस्थानों में वकालत की. वे लंबे समय तक आयकर विभाग के स्थायी वकील भी रहे. वर्ष 2010 में उन्हें गुवाहाटी उच्च न्यायालय का स्थायी वकील नियुक्त किया गया. सितंबर 2010 में उन्हें वरिष्ठ अधिवक्ता बनाया गया और जुलाई 2011 में असम का अतिरिक्त महाधिवक्ता नियुक्त किया गया.
17 अक्टूबर 2011 को उज्ज्ल भुइयां गुवाहाटी उच्च न्यायालय के अतिरिक्त न्यायाधीश बने और 20 मार्च 2013 को स्थायी न्यायाधीश नियुक्त हुए. वर्ष 2019 में उनका स्थानांतरण बॉम्बे उच्च न्यायालय हुआ. वर्ष 2021 में वे तेलंगाना उच्च न्यायालय पहुंचे.
28 जून 2022 को उन्होंने तेलंगाना उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में पदभार संभाला. इसके बाद 14 जुलाई 2023 को वे भारत के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश बने.
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस उज्जल भुइयां ने भारतीय नागरिकों के वोटिंग अधिकार को संविधान का अभिन्न हिस्सा बताया है और इसे छीनना दूसरे दर्जे का नागरिक बनाने के समान बताया.
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस उज्जल भुइयां ने कहा कि नागरिकता और वोट देने का अधिकार एक-दूसरे से जुड़े हैं. उन्होंने कहा कि किसी भारतीय नागरिक को वोटिंग से वंचित करना संविधान के अनुच्छेद 326 और 14 का उल्लंघन होगा.