जवाहर सिंह बेढम (Jawahar Singh Bedham) राजस्थान के राजनेता हैं. उनका जन्म 1 सितंबर 1968 को हुआ था. वे भारतीय जनता पार्टी से जुड़े हैं और राजस्थान की नगर विधानसभा सीट से विधायक हैं. वर्ष 2023 के राजस्थान विधानसभा चुनाव में उन्होंने भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा और जीत हासिल की. वर्तमान में वे भजनलाल शर्मा के नेतृत्व वाली राजस्थान सरकार में गृह और गोपालन विभाग के राज्य मंत्री के रूप में कार्यरत हैं.
जवाहर सिंह बेढम राजस्थान के भरतपुर जिले के नगर क्षेत्र के निवासी हैं. उनके पिता का नाम समंदर सिंह है. उन्होंने जयपुर स्थित राजस्थान विश्वविद्यालय से स्नातक और विधि स्नातक की शिक्षा प्राप्त की. पेशे से वे अधिवक्ता हैं. राजनीति में आने से पहले उन्होंने स्थानीय स्तर पर जनप्रतिनिधि के रूप में काम किया. उनके राजनीतिक जीवन की शुरुआत पंचायत समिति के सदस्य के रूप में हुई थी.
जवाहर सिंह बेढम ने वर्ष 1995 से 2000 तक पंचायत समिति के सदस्य के रूप में कार्य किया. इसके बाद वर्ष 2000 से 2005 तक वे जिला परिषद के सदस्य रहे. इस दौरान उन्हें स्थानीय प्रशासन और ग्रामीण क्षेत्र से जुड़े मामलों में काम करने का अवसर मिला.
भारतीय जनता पार्टी में भी उन्होंने विभिन्न जिम्मेदारियां निभाईं. वर्ष 2011 से 2016 तक वे भरतपुर जिला भाजपा के उपाध्यक्ष रहे. इसके अलावा, वर्ष 2012 से 2017 तक उन्होंने पार्टी की प्रदेश कार्यसमिति के सदस्य के रूप में काम किया. वसुंधरा राजे के नेतृत्व वाली राजस्थान सरकार के कार्यकाल में उन्हें डांग विकास बोर्ड का अध्यक्ष बनाया गया था.
वर्ष 2018 के राजस्थान विधानसभा चुनाव में जवाहर सिंह बेढम ने कामां विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था. इस चुनाव में उन्हें कांग्रेस की जाहिदा खान से हार का सामना करना पड़ा. जाहिदा खान ने उन्हें 39,621 मतों के अंतर से हराया था.
इसके बाद वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने नगर सीट से चुनाव लड़ा. इस चुनाव में उन्हें 75,579 वोट मिले. उन्होंने कांग्रेस के वाजिब अली को 1,531 मतों के अंतर से हराया और विधानसभा पहुंचे.
राजस्थान में भाजपा की सरकार बनने के बाद जवाहर सिंह बेढम को राज्य मंत्री बनाया गया. उन्हें गृह और गोपालन विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई. मंत्री के रूप में उनका कार्यक्षेत्र राज्य के गृह प्रशासन और पशुपालन से जुड़े विभागीय मामलों से संबंधित है. उनका राजनीतिक सफर पंचायत समिति और जिला परिषद से शुरू होकर विधानसभा तथा राज्य मंत्रिमंडल तक पहुंचा है.