भारत में रोजाना इस्तेमाल होने वाले खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और सुरक्षा से जुड़े नियमों की निगरानी के लिए एफएसएसआई (FSSAI) यानी Food Safety and Standards Authority of India काम करता है. यह देश की प्रमुख खाद्य नियामक संस्था है, जो खाद्य पदार्थों से जुड़े मानक तय करने और उनके पालन की निगरानी करने की जिम्मेदारी निभाती है.
FSSAI की नींव Food Safety and Standards Act, 2006 के तहत रखी गई थी. इस कानून को राष्ट्रपति की मंजूरी 23 अगस्त 2006 को मिली थी. इसके बाद FSSAI की स्थापना सितंबर 2008 में हुई. इसका उद्देश्य खाद्य पदार्थों से जुड़े अलग-अलग पुराने कानूनों और व्यवस्थाओं को एक व्यापक ढांचे के तहत लाना था.
इससे पहले देश में खाद्य पदार्थों से जुड़े मामलों को अलग-अलग कानूनों और विभागों के जरिए देखा जाता था. FSS Act 2006 के जरिए खाद्य सुरक्षा के लिए एक केंद्रीय नियामक व्यवस्था तैयार की गई.
FSSAI खाद्य पदार्थों के निर्माण, भंडारण, वितरण, बिक्री और आयात से जुड़े मामलों के लिए विज्ञान आधारित मानक तय करता है. इसके दायरे में खाद्य कारोबार से जुड़े कई नियम और प्रक्रियाएं आती हैं.
खाद्य कारोबार करने वाले कई व्यवसायों के लिए FSSAI लाइसेंस या रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था भी है. इसके अलावा खाद्य सुरक्षा से जुड़े नियमों के पालन, निरीक्षण, परीक्षण और जागरूकता से संबंधित काम भी व्यवस्था का हिस्सा हैं.
FSSAI समय-समय पर खाद्य पदार्थों के लिए नए नियम और मानक तैयार करता है तथा मौजूदा नियमों में बदलाव भी करता है. इसके नियम खाद्य विज्ञान, उपभोक्ता व्यवहार, नए खाद्य उत्पादों और तकनीकी बदलावों को ध्यान में रखकर तैयार किए जाते हैं. प्रमुख खाद्य सुरक्षा नियम और विनियम 2011 से लागू किए गए और बाद में अलग-अलग श्रेणियों के लिए नए विनियम भी बनाए गए.
FSSAI का मुख्यालय नई दिल्ली में है और यह स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के प्रशासनिक दायरे में काम करता है. खाद्य सुरक्षा कानूनों के कई प्रावधानों को लागू करने में राज्य खाद्य सुरक्षा प्राधिकरणों की भी भूमिका होती है.
इस तरह FSSAI भारत में खाद्य सुरक्षा और खाद्य मानकों से जुड़ी व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है. इसका काम खाद्य कारोबार और उत्पादों के लिए निर्धारित नियमों और मानकों की व्यवस्था को संचालित करना तथा सुरक्षित और मानक के अनुरूप खाद्य उपलब्ध कराने के उद्देश्य को आगे बढ़ाना है.
दीपावली से पहले दिल्ली के पांच इलाकों में मिठाई दुकानों, डेयरियों और खाद्य निर्माण इकाइयों की जांच कर करीब 100 किलोग्राम खाने लायक नहीं मिली सामग्री नष्ट की गई. इस अभियान में 40 नमूने लिए गए, 8 प्रतिष्ठानों को सुधार नोटिस मिला और नियम तोड़ने वालों पर रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई होगी.
एफएसएसएआई ने नई दिल्ली के रेडिसन ब्लू होटल को जांच में मिली फूड सेफ्टी और साफ-सफाई की कथित खामियों पर सुधार नोटिस जारी किया है. संचालक मेसर्स एबी होटल्स लिमिटेड को तुरंत सुधार कर दस्तावेजों और तस्वीरों के साथ कार्रवाई रिपोर्ट देनी होगी, जबकि पालन नहीं होने पर लाइसेंस निलंबन समेत आगे की कार्रवाई हो सकती है.
फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) ने नेस्ले के लो फैट डेयरी व्हाइटनर के एक सैंपल को खराब क्वालिटी और अनसेफ पाया है. यह सैंपल नई दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित 'दि ललित' से लिया गया था.
दिल्ली में FSSAI ने एक फाइव स्टार होटल का लाइसेंस सस्पेंड कर दिया है. दिल्ली के एक फाइव स्टार होटल सेवन सीज हॉस्पिटैलिटी में गंदगी, खराब खाद्य पदार्थ, कॉकरोच और फंगस पाए जाने के बाद इसका लाइसेंस रद्द कर दिया गया.
FSSAI ने सुप्रीम कोर्ट में 43 पन्नों का हलफनामा देकर ज्यादा चीनी, नमक और फैट वाले पैकेज्ड फूड पर रेड हेक्सागन वॉर्निंग लेबल लगाने की पुष्टि की है. हालांकि, इसमें केवल Added Sugar और फैट गिने जाएंगे, यह नियम लागू होने में अभी समय लग सकता है.
पैकेज्ड फूड में ज्यादा नमक, चीनी और सैचुरेटेड फैट को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने FSSAI और केंद्र सरकार को फटकार लगाई है. कोर्ट ने कहा कि फ्रंट-ऑफ-पैक वार्निंग लेबल जरूरी हैं, ताकि लोगों को पैकेट खोलने से पहले ही पता चल सके कि खाने में कितनी मात्रा में नमक, चीनी और फैट मौजूद है.
दिल्ली हाई कोर्ट ने डाबर इंडिया को बड़ी राहत देते हुए FSSAI के उस आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है, जिसमें कंपनी के कई प्रोडक्ट्स की बिक्री रोकने का निर्देश दिया गया था. मामला '100% प्योर', '100% नेचुरल' और '100% ऑर्गेनिक' जैसे दावों से जुड़ा है. डाबर ने FSSAI की कार्रवाई में तय प्रक्रिया का पालन नहीं होने का आरोप लगाया था.
डाबर इंडिया ने अपने फूड प्रोडक्ट्स पर ‘100 परसेंट प्योर’ और ‘100 परसेंट नेचुरल’ जैसे दावों को लेकर FSSAI के बिक्री रोकने वाले आदेश को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी है. कंपनी के शहद और घी समेत कई प्रोडक्ट्स इस विवाद के दायरे में हैं.
FSSAI की कार्रवाई के बाद ओल्ड मोंक, एंटिक्विटी ब्लू, रॉयल चैलेंज और बैगपाइपर डीलक्स की कुछ वैरायटी चर्चा में हैं. जानिए नियामक ने आखिर क्यों उठाया यह कदम
FSSAI ने स्पष्ट किया है कि पैकेज्ड फूड पर '100% प्योर' या '100% नेचुरल' जैसे दावे वैज्ञानिक आधार होने पर ही किए जा सकते हैं. जानिए FSSAI लाइसेंस का मतलब क्या है और खरीदारी से पहले किन बातों का ध्यान रखें. प्रोडक्ट्स खरीदने से पहले Ingredients की लिस्ट और FSSAI लाइसेंस नंबर जैसी जानकारी भी जरूर जांचें.