दीपांशु शौकीन (Deepanshu Shokeen) ने दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ यानी DUSU चुनाव 2026 में बतौर निर्दलीय उम्मीदवार उपाध्यक्ष पद पर जीत हासिल की. उन्होंने 30,615 वोट हासिल किए और अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के इशु मौर्य को 13,705 वोटों के अंतर से हराया.
दीपांशु शौकीन दिल्ली के पीरागढी इलाके से आते हैं. उनके पिता दिल्ली परिवहन निगम (DTC) में बस कंडक्टर हैं, जबकि उनकी मां आंगनवाड़ी कार्यकर्ता हैं. रिपोर्ट्स के अनुसार, उनके पिता चाहते थे कि वह संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा की तैयारी करें. हालांकि, शौकीन ने छात्र राजनीति में सक्रिय रहे.
दीपांशु शौकीन दिल्ली विश्वविद्यालय के बौद्ध अध्ययन विभाग में पीजी की पढाई कर रहे हैं. इससे पहले उन्होंने शहीद भगत सिंह कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई पूरी की. बौद्ध अध्ययन विभाग से इस साल डीयूएसयू चुनाव में कई उम्मीदवार मैदान में थे.
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव 2026 में दीपांशु 100कीन (शौकीन) ने बिना किसी बड़े राजनीतिक घराने या पार्टी के समर्थन के उपाध्यक्ष पद पर जीत हासिल की. वे एक आम परिवार से आते हैं, जिनके पिता दिल्ली ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन में कॉन्ट्रैक्ट बेस पर कंडक्टर हैं. दीपांशु ने अपने संघर्ष और 'नंगे पैर' विरोध के जरिए छात्रों के अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ी. जानिए उनके बारे में...
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (DUSU) चुनाव में केंद्रीय पैनल के 10 उम्मीदवारों में से 7 बौद्ध अध्ययन विभाग से थे. इस विभाग के ABVP उम्मीदवार यश डबास ने अध्यक्ष पद जीता, जबकि स्वतंत्र उम्मीदवार दीपांशु शोकीन उपाध्यक्ष बने.
DUSU की सियासत में ABVP और NSUI जैसे बड़े संगठनों के बीच एक निर्दलीय चेहरे दीपांशु शौकीन की जीत ने हलचल मचा दी है. चार साल पहले फ्रेशर्स पार्टी में ‘आज अकेला चल रहा हूं, एक दिन पीछे काफिला होगा’ कहने वाला दीपांशु अब सचमुच काफिले के साथ खड़ा है. लेकिन इस जीत के पीछे सिर्फ तुक्का नहीं, लंबी तैयारी और कई समीकरण हैं.