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चम्पावत

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चम्पावत (Champawat) उत्तराखंड राज्य के चम्पावत जिले में स्थित एक नगर है. यह जिले का प्रशासनिक मुख्यालय है और ऐतिहासिक रूप से कुमाऊं क्षेत्र की राजधानी रहा है. चम्पावत का संबंध कुमाऊं के पुराने राजवंशों, स्थानीय धार्मिक मान्यताओं और क्षेत्र के ऐतिहासिक घटनाक्रम से जुड़ा हुआ है. यह नगर काली कुमाऊं क्षेत्र का हिस्सा माना जाता है.

चम्पावत का इतिहास चंद राजवंश के शासन से जुड़ा है. पुराने समय में कुमाऊं के राजा चम्पावत में रहते थे. बाद में 16वीं शताब्दी के मध्य में राजधानी को अल्मोड़ा स्थानांतरित कर दिया गया. स्थानीय परंपराओं के अनुसार, चम्पावत के पुराने किले के पास स्थित एक टीले को कुर्माचल से जोड़ा जाता है. धार्मिक मान्यता है कि इसी स्थान पर भगवान विष्णु ने कूर्म अवतार धारण किया था. माना जाता है कि कुर्माचल नाम से ही आगे चलकर कुमाऊं शब्द प्रचलित हुआ. क्षेत्र के इस हिस्से को काली कुमाऊं के नाम से भी जाना जाता है.

चम्पावत का पुराना नाम चंपावती बताया जाता है. यह नाम चम्पावती नदी के किनारे बसे होने के कारण प्रचलित हुआ. इस क्षेत्र के पश्चिम में डोनकोट नाम का एक किला था, जहां स्थानीय रावत शासकों के रहने का उल्लेख मिलता है. वायु पुराण से जुड़ी मान्यताओं में चंपावती को नाग वंश के नौ राजाओं की राजधानी बताया गया है. स्थानीय धार्मिक कथाओं में चम्पावती का संबंध नागों से भी जोड़ा जाता है.

चम्पावत में स्थित बालेश्वर मंदिर का संबंध चंद राजाओं के शासनकाल से माना जाता है. इसका निर्माण 12वीं शताब्दी में कराया गया था. चम्पावती नदी की घाटी में बालेश्वर, क्रांतेश्वर, ताड़केश्वर, ऋष्णेश्वर, डिक्तेश्वर, मल्लारेश्वर और मणेश्वर सहित कई प्राचीन मंदिर स्थित हैं. इन मंदिरों का संबंध क्षेत्र की धार्मिक परंपराओं से है. चम्पावती मंदिर भी बालेश्वर मंदिर परिसर में स्थित है.

1815 में ब्रिटिश शासन के दौरान चम्पावत में एक सैनिक छावनी स्थापित की गई थी. बाद में घाटी की जलवायु को अनुपयुक्त मानते हुए इसे लगभग छह मील उत्तर में लोहाघाट स्थानांतरित कर दिया गया.

चम्पावत का नाम चंपावत बाघिन के कारण भी इतिहास में दर्ज है. इस बाघिन पर 400 से अधिक लोगों को मारने का आरोप था. वर्ष 1907 में प्रसिद्ध शिकारी जिम कॉर्बेट ने उसे मार गिराया था. यह घटना चम्पावत के इतिहास से जुड़ी चर्चित घटनाओं में शामिल है.

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