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गाजर

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गाजर (Carrot) एक जड़ वाली सब्जी है, जिसे दुनिया के सबसे अधिक उगाए और खाए जाने वाले खाद्य पौधों में गिना जाता है. इसका वैज्ञानिक नाम Daucus carota subsp. sativus है और यह एपिएसी (Apiaceae) कुल का पौधा है. गाजर का उपयोग भारत सहित दुनिया के कई देशों में सब्जी, सलाद, जूस, सूप, अचार और मिठाइयों में किया जाता है. इसकी खेती मुख्य रूप से ठंडे मौसम में की जाती है और यह किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण नकदी फसल भी मानी जाती है.

गाजर की उत्पत्ति मध्य एशिया, विशेष रूप से अफगानिस्तान और उसके आसपास के क्षेत्रों में मानी जाती है. शुरुआती समय में गाजर का रंग बैंगनी, पीला और सफेद हुआ करता था. समय के साथ विभिन्न किस्मों के विकास के बाद नारंगी रंग की गाजर सबसे अधिक लोकप्रिय हुई. आज लाल, नारंगी, पीली, सफेद और बैंगनी रंग की गाजर अलग-अलग देशों में उगाई जाती हैं.

भारत में गाजर की खेती उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, बिहार, मध्य प्रदेश, कर्नाटक और हिमाचल प्रदेश सहित कई राज्यों में की जाती है. मैदानी क्षेत्रों में इसकी बुवाई आमतौर पर अक्टूबर से दिसंबर के बीच होती है, जबकि पहाड़ी क्षेत्रों में मौसम के अनुसार इसकी खेती की जाती है. अच्छी जल निकासी वाली दोमट मिट्टी और ठंडा मौसम इसकी खेती के लिए उपयुक्त माना जाता है.

गाजर एक द्विवर्षीय पौधा है, लेकिन खेती के लिए इसे आमतौर पर एक वर्ष में ही तैयार कर लिया जाता है. इसकी जड़ ही खाने योग्य भाग होती है, जबकि पौधे की पत्तियां पतली और हरे रंग की होती हैं. गाजर का आकार और रंग उसकी किस्म के अनुसार अलग-अलग हो सकता है. भारत में लाल और नारंगी गाजर सबसे ज्यादा बाजार में दिखाई देती हैं.

बाजार में गाजर ताजी, पैक्ड और प्रोसेस्ड कई रूपों में उपलब्ध होती है. इसका उपयोग घरों के अलावा होटल, रेस्तरां और खाद्य उद्योग में भी बड़े पैमाने पर किया जाता है. गाजर से जूस, मिक्स वेजिटेबल, सूप, अचार, मुरब्बा, हलवा और कई प्रकार के तैयार खाद्य उत्पाद बनाए जाते हैं. इसके अलावा इसे फ्रोजन और डिब्बाबंद रूप में भी बेचा जाता है.

भारत में सर्दियों के मौसम में गाजर की मांग सबसे अधिक रहती है. इस समय स्थानीय मंडियों और खुदरा बाजारों में इसकी बड़ी मात्रा में बिक्री होती है. कई राज्यों में गाजर किसानों की आय का महत्वपूर्ण स्रोत भी है. कृषि वैज्ञानिक समय-समय पर अधिक उत्पादन और रोग प्रतिरोधी किस्मों के विकास पर काम करते रहते हैं, जिससे इसकी खेती और उत्पादन में लगातार सुधार हो रहा है.

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