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बारासात

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बारासात (Barasat) पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले का एक प्रमुख शहर और नगर पालिका क्षेत्र है. यह बारासात सदर उपखंड का मुख्यालय होने के साथ-साथ पूरे उत्तर 24 परगना जिले का प्रशासनिक केंद्र भी है. यह शहर कोलकाता महानगरीय क्षेत्र का हिस्सा है

बारासात का इतिहास कई शताब्दियों पुराना है. मुगल काल के दौरान, वर्ष 1600 के आसपास जेसोर के शासक प्रतापादित्य के सेनापति शंकर चक्रवर्ती यहां आए और उन्होंने इस क्षेत्र में अपना निवास स्थापित किया. इसके बाद वर्ष 1700 में हजरत एकदिल शाह बारासात पहुंचे. उनका मकबरा आज भी काजीपाड़ा इलाके में स्थित है, जहां बड़ी संख्या में लोग आते हैं.

इतिहास में यह भी उल्लेख मिलता है कि जेसोर से कोलकाता जाने के दौरान प्रतापादित्य और बाद में मुर्शिदाबाद से कोलकाता जाते समय नवाब सिराजुद्दौला भी बारासात मार्ग से होकर गुजरे थे. समय के साथ यही मार्ग आगे चलकर राष्ट्रीय राजमार्गों का हिस्सा बना.

ब्रिटिश शासन के दौरान बारासात का महत्व और बढ़ गया. उस समय Warren Hastings ने यहां एक आवास बनवाया था. वहीं प्रसिद्ध साहित्यकार बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने बारासात में पहले भारतीय डिप्टी मजिस्ट्रेट के रूप में कार्य किया.

उन्नीसवीं शताब्दी में बारासात क्षेत्र में नील की खेती बड़े पैमाने पर होती थी. इसी दौर में किसान नेता तीतूमिर ने नील व्यापारियों के खिलाफ आंदोलन चलाया. इसी समयईश्वर चंद्र विद्यासागर, प्यारी चरण सरकार और कालीकृष्ण मित्र ने सामाजिक सुधारों से जुड़े कई कार्य किए.

वर्ष 1834 से 1861 तक बारासात, बारासात जिले का मुख्यालय रहा. बाद में प्रशासनिक पुनर्गठन के बाद इसे तत्कालीन 24 परगना जिले का उपखंड बनाया गया. वर्तमान में यह उत्तर 24 परगना जिले का मुख्यालय है और प्रशासनिक, शैक्षणिक तथा ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण शहरों में गिना जाता है

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