डॉ अनिल मिश्रा (Anil Mishra) उत्तर प्रदेश के अंबेडकर नगर जिले के मूल निवासी हैं और पिछले चार दशक से अयोध्या में रहकर होम्योपैथी चिकित्सा का कार्य कर रहे हैं. पेशे से डॉक्टर होने के साथ-साथ वे लंबे समय से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और राम मंदिर आंदोलन से जुड़े रहे हैं. अयोध्या में उनकी पहचान एक सामाजिक और धार्मिक गतिविधियों से जुड़े व्यक्ति के रूप में रही है.
हाल के दिनों में राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े कथित चोरी के मामले के बाद डॉ. अनिल मिश्रा का नाम फिर सुर्खियों में आया. पुलिस द्वारा मामले में एफआईआर दर्ज किए जाने और कुछ लोगों की गिरफ्तारी के बाद उन्होंने नैतिक आधार पर ट्रस्ट में अपने पद से इस्तीफा देने का फैसला किया. उनके इस्तीफे के बाद यह मामला राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का विषय बना हुआ है.
डॉ. अनिल मिश्रा का नाम राम मंदिर आंदोलन, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और अयोध्या से जुड़े घटनाक्रमों के संदर्भ में लंबे समय से लिया जाता रहा है.
जब केंद्र सरकार ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन किया, तब डॉ. अनिल मिश्रा को शुरुआती 15 ट्रस्टियों में शामिल किया गया. ट्रस्ट के सदस्य के रूप में वे मंदिर निर्माण और उससे जुड़े प्रशासनिक कार्यों का हिस्सा रहे. इसी वजह से उनका नाम राम मंदिर से जुड़े प्रमुख चेहरों में शामिल किया जाता है.
22 जनवरी 2024 को अयोध्या में रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा का ऐतिहासिक कार्यक्रम आयोजित किया गया था. इस समारोह में डॉ. अनिल मिश्रा और उनकी पत्नी उषा मिश्रा ने प्रधान यजमान के रूप में धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में संपन्न हुए इस कार्यक्रम के बाद उनका नाम राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आया.
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में जांच का दायरा बढ़ते हुए SIR अब अनिल मिश्रा को आरोपी बनाने की तैयारी कर रही है. SIT की रिपोर्ट के आधार पर पुलिस उनके खिलाफ पुख्ता सबूत जुटा रही है.
राम मंदिर में आने वाले दान की सुरक्षा और पारदर्शी गणना हमेशा से ट्रस्ट की प्राथमिकता रही है. ऐसे में दान गणना प्रक्रिया को लेकर उठे सवालों ने पूरे मामले को और संवेदनशील बना दिया है. अब जांच के बीच ट्रस्ट में शीर्ष पदाधिकारी रहे लोगों के दावों ने प्रकरण को नई दिशा दे दी है.
राम मंदिर में चढ़ावा चोरी की जांच कर रही SIT की अंतरिम रिपोर्ट में बड़े खुलासे का दावा किया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक CCTV फुटेज में नोट छिपाने, फुटेज हटाने और गबन जैसे 70 मामलों के संकेत मिले हैं. 6 लोगों की प्रथम दृष्टया संलिप्तता बताई गई है, जबकि ट्रस्ट के डॉ. अनिल मिश्रा की भूमिका पर भी सवाल उठे हैं.
अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक बेहद अहम मानी जा रही है. बैठक में महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफों पर फैसला संभव है. सूत्रों के अनुसार, दोनों की विदाई के साथ ट्रस्ट की अंतरिम व्यवस्था और आगे की कार्यप्रणाली पर भी निर्णय लिया जा सकता है.
राम मंदिर में चढ़ावा चोरी मामले को लेकर आज का दिन सबसे अहम होने वाला है. सोमवार को श्रीरामजन्मभूमि ट्रस्ट की बैठक होने वाली है, जिसमें संभावना है कि ट्रस्ट की व्यवस्था में बड़े बदलाव के निर्णय हो सकते हैं. चंपत राय और अनिल मिश्रा की ट्रस्ट से विदाई तय मानी जा रही है,
राम मंदिर चढ़ावा मामले में जांच अब तेज हो गई है. सूत्रों के अनुसार, एसआईटी ने चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्रा और गोपाल राव ने इस चोरी में अपनी किसी भी भूमिका से साफ इनकार किया. पुलिस इस जांच में सीए की मदद ले रही है वहीं ट्रस्ट के ऑडिट रिकॉर्ड, बैंक दस्तावेज, सीसीटीवी फुटेज और दान प्रक्रिया की गहन जांच जारी है.
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में SIT ने अयोध्या में करीब 8 घंटे तक गहन जांच की. इस दौरान ट्रस्ट के पदाधिकारियों जैसे गोपाल राव, चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा से भी पूछताछ की गई.
अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में आरोपी टिन्नू यादव के भाई दिनेश यादव पहली बार टीवी पर सामने आए हैं. उन्होंने चंपत राय और अनिल मिश्रा पर बड़े आरोप लगाते हुए टिन्नू को निर्दोष बताया और कहा कि बड़े लोग खुद को बचाने के लिए छोटे लोगों को फंसा रहे हैं.
राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण में अयोध्या बार एसोसिएशन ने बड़ा कदम उठाया है. एसोसिएशन आज ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा और मंदिर निर्माण प्रभारी गोपाल राव के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के लिए थाना रामजन्मभूमि में तहरीर दी है. पुलिस कार्रवाई नहीं करती है तो अदालत का रुख किया जाएगा.
राम मंदिर के कथित दान घोटाले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे नए दावे सामने आ रहे हैं. सूत्रों के अनुसार, पूछताछ में ट्रस्ट से जुड़े अनिल मिश्रा ने खुद को मामले से अलग बताते हुए पूरा ठीकरा टिन्नू यादव पर फोड़ दिया है. हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि निगरानी में चूक हुई थी. अब जांच एजेंसियां दूसरे जिम्मेदार लोगों से भी पूछताछ की तैयारी में हैं.
अयोध्या में राम मंदिर के चंदा चोरी मामले के बीच पहली बार श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट की बैठक 6 जुलाई को होने जा रही है. माना जा रहा है कि इस बैठक में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे को स्वीकार करने पर विचार-विमर्श हो सकता है, लेकिन उसके लिए दो-तिहाई बहुमत चाहिए.
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में बड़े पैमाने पर वित्तीय गड़बड़ियों की आशंका के बीच मंदिर ट्रस्ट के पिछले पांच साल के ऑडिट की बारीकी से तफ्तीश करने का फैसला किया है. बताया जा रहा है कि SIT को शुरुआती जांच में कई अहम और पुख्ता साक्ष्य मिले हैं, जिसके कारण ट्रस्ट के कई बड़े पदाधिकारी अब सीधे तौर पर इस जांच की जद में आ सकते.